राज्यसभा चुनाव में हर वोट की अहमियत, विधानसभा में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था सख्त
Jharkhand Rajya Sabha Elections 2026: झारखंड में राज्यसभा की सीटों के लिए चल रहे चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है. विधानसभा परिसर में मतदान प्रक्रिया के दौरान माननीय विधायकों के हर कदम और हर वोट पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. क्रॉस वोटिंग की आशंका के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र को पहले से अधिक सख्त कर दिया गया है.
सूत्रों के अनुसार, मतदान के दौरान यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी विधायक निर्धारित प्रक्रिया से हटकर कोई गतिविधि न करे. विधानसभा परिसर में प्रवेश से लेकर मतदान कक्ष तक की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल मौजूद हैं, वहीं सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी लगातार निगरानी की जा रही है.
मतदान के साथ-साथ राजनीतिक दलों की नजर अपने-अपने विधायकों पर भी बनी हुई है. किस पार्टी का विधायक किस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर रहा है, इस पर निगरानी रखने के लिए सभी दलों ने अधिकृत एजेंटों की तैनाती की है. राजनीति में भरोसा बड़ी चीज होती है, लेकिन चुनाव आते ही भरोसे के साथ निगरानी भी मुफ्त में जुड़ जाती है.
कांग्रेस और झामुमो ने वरिष्ठ नेताओं को दी जिम्मेदारी
कांग्रेस ने अपने विधायकों के मतदान की निगरानी के लिए प्रदेश प्रभारी के राजू, सह-प्रभारी बेला प्रसाद और राज्यसभा सांसद डॉ. नासिर हुसैन को एजेंट बनाया है. वहीं झामुमो की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय, फागू बेसरा और पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर को जिम्मेदारी सौंपी गई है. इंडिया गठबंधन के अन्य दलों में माले ने हलधर महतो और गीता मंडल को एजेंट नियुक्त किया है, जबकि राजद की ओर से भोला यादव को यह जिम्मेदारी दी गई है.
एनडीए की ओर से भाजपा ने अमर बाउरी, नवीन जायसवाल, अनंत ओझा और भानु प्रताप शाही को एजेंट बनाया है. लोजपा की तरफ से वीरेंद्र प्रधान और अनिल कुमार को अधिकृत प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है. आजसू पार्टी ने हरिश और ओम वर्मा को एजेंट बनाया है, जबकि जदयू की ओर से सागर कुमार और दुष्यंत पटेल को यह जिम्मेदारी दी गई है. हालांकि जेएलकेएम की ओर से अभी तक एजेंट के नाम तय नहीं किए गए हैं.
राज्यसभा चुनाव में मतदान करने वाले विधायकों के लिए कुछ विशेष नियम भी लागू हैं. प्रत्येक विधायक को मतदान करने के बाद अपने दल के अधिकृत एजेंट को बैलेट पेपर दिखाना अनिवार्य है. यदि कोई विधायक अपने पार्टी एजेंट को वोट नहीं दिखाता है, तो उसका वोट अवैध घोषित किया जा सकता है.
राज्यसभा चुनाव विधानसभा के बाहर होने वाला चुनाव माना जाता है, इसलिए इसमें राजनीतिक दलों का व्हिप लागू नहीं होता. इसका मतलब है कि विधायक अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को वोट दे सकता है. हालांकि मतदान के बाद पार्टी के अधिकृत एजेंट को वोट दिखाना अनिवार्य है. इसी कारण राज्यसभा चुनाव में मतदान के साथ-साथ हर वोट की निगहबानी भी उतनी ही अहम हो जाती है, क्योंकि यहां एक-एक मत और एक-एक संकेत चुनावी नतीजों की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं.