उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा घोटाला: 166 आरोपियों को अदालत ने भेजा न्यायिक हिरासत में, जांच एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई

Ranchi: गैंग के एजेंट अभ्यर्थियों को पहले से प्रश्न और उत्तर रटवा रहे थे. इसके लिए रड़गांव में अभ्यर्थियों को एकत्र किया गया था. इस अवैध सौदे के तहत प्रत्येक अभ्यर्थी से करीब 15-15 लाख रुपये तय किए गए थे. इतना ही नहीं, अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड भी गैंग के कब्जे में ले लिए गए थे, ताकि कोई बाहरी संपर्क न हो सके. कुछ अभ्यर्थियों ने गैंग के सदस्यों के नाम पर बैंक चेक भी दिए थे, जिससे पूरे रैकेट की संगठित प्रकृति का अंदाजा लगाया जा सकता है.
 

Ranchi: झारखंड में जेएसएससी उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े पेपर लीक मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किए गए 166 आरोपियों को सिविल कोर्ट में पेश किया. सभी आरोपियों की पेशी अपर न्याययुक्त योगेश कुमार की अदालत में हुई, जहां सुनवाई के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में होटवार जेल भेज दिया गया. इस पूरे मामले ने राज्य की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

शनिवार देर रात मिली थी गुप्त सूचना

जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव स्थित एक अर्धनिर्मित भवन में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को इकट्ठा कर पेपर लीक से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं. सूचना मिलते ही विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया और 11 अप्रैल की देर रात मौके पर धावा बोला गया. पुलिस के पहुंचते ही वहां मौजूद लोग भागने लगे, लेकिन तत्परता दिखाते हुए पुलिस ने 166 लोगों को मौके से पकड़ लिया.

गिरफ्तार किए गए लोगों में 152 पुरुष अभ्यर्थी, 7 महिला अभ्यर्थी, दो ड्राइवर और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्य शामिल हैं. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि यह एक अंतरराज्यीय पेपर लीक और सॉल्वर गैंग है, जिसके सरगना समेत पांच मुख्य आरोपी अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद भी इस मामले में शामिल हैं.

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि गैंग के एजेंट अभ्यर्थियों को पहले से प्रश्न और उत्तर रटवा रहे थे. इसके लिए रड़गांव में अभ्यर्थियों को एकत्र किया गया था. इस अवैध सौदे के तहत प्रत्येक अभ्यर्थी से करीब 15-15 लाख रुपये तय किए गए थे. इतना ही नहीं, अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड भी गैंग के कब्जे में ले लिए गए थे, ताकि कोई बाहरी संपर्क न हो सके. कुछ अभ्यर्थियों ने गैंग के सदस्यों के नाम पर बैंक चेक भी दिए थे, जिससे पूरे रैकेट की संगठित प्रकृति का अंदाजा लगाया जा सकता है.

पुलिस ने इस मामले में तमाड़ थाना में प्राथमिकी दर्ज की है और आगे की जांच जारी है. इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को भी उजागर किया है.

रूरल एसपी प्रवीण पुष्कर का बयान

रूरल एसपी प्रवीण पुष्कर ने कहा कि गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई है. उन्होंने बताया कि तमाड़ के रड़गांव में बड़े स्तर पर अभ्यर्थियों को इकट्ठा कर पेपर लीक और सॉल्विंग की तैयारी कराई जा रही थी. पुलिस ने समय रहते छापेमारी कर पूरे गिरोह का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जांच को और व्यापक किया जा रहा है, ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक भी पहुंचा जा सके. फिलहाल सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और पुलिस इस पूरे नेटवर्क के तार अन्य राज्यों तक जोड़कर जांच को आगे बढ़ा रही है.

बचाव पक्ष की दलील

फिलहाल सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजते हुए होटवार जेल भेज दिया गया है. कोर्ट में पेशी के दौरान दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस हुई. इस दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता अमलाल पालित ने दलील दी कि अभ्यर्थी आरोपी नहीं, बल्कि इस पूरे मामले के पीड़ित हैं. उन्होंने कहा कि इन छात्रों को गलत तरीके से फंसाया गया है और उन पर गंभीर आरोप लगाकर पुलिस ने कार्रवाई की है, जबकि असली दोषी पेपर लीक मामले से जुड़े गिरोह के सदस्य हैं. उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. अधिवक्ता ने यह भी कहा कि अभ्यर्थियों को गैंग के लोगों ने फंसाया और उनसे पैसे वसूली की तैयारी की गई थी.