‘अब बहाने नहीं चलेंगे’- लापता मामले में प्रगति नहीं होने पर झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो SP को फटकारा
Jharkhand High Court: लापता व्यक्ति के एक मामले में प्रगति नहीं होने पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान बोकारो के पुलिस अधीक्षक (SP) की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए तीखी फटकार लगाई और सवाल किया कि इतने गंभीर मामले में पुलिस अब तक खाली हाथ क्यों है?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लापता मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि समय बीतने के साथ ऐसे मामलों में साक्ष्य कमजोर होते जाते हैं, इसके बावजूद पुलिस की ओर से ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है.
अदालत ने कहा कि लापता व्यक्ति की तलाश में पुलिस को हर संभव प्रयास करने चाहिए थे, लेकिन केस डायरी और रिपोर्ट से ऐसा प्रतीत होता है कि जांच अपेक्षित स्तर पर नहीं हुई है. हाईकोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए भविष्य में सख्त कदम उठाने के संकेत दिए.
SP को चेतावनी
हाईकोर्ट ने बोकारो SP को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अगली सुनवाई तक जांच में ठोस प्रगति नहीं दिखाई गई, तो कोर्ट कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मामले की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और हर पहलू से जांच को आगे बढ़ाया जाए
हाईकोर्ट ने अधिकारियों की गंभीरता पर उठाए सवाल
अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि बोकारो के पूर्व व वर्तमान पुलिस अधीक्षक (SP) और डीएसपी लापता होने वाले मामलों के खुलासे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं. खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा – ”पुलिस स्वयं मान रही है कि यह अपहरण का मामला हो सकता है, लेकिन जांच उस दिशा में नहीं की जा रही है. दो बेंचों की खंडपीठ ने नार्को टेस्ट में पुलिस पर लापरवाही बरतने का भी दावा किया. उन्होंने ने कहा कि 2020 में दर्ज इस प्राथमिकी में तीन लोगों का नार्को टेस्ट होना था, लेकिन एक व्यक्ति को खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर छोड़ दिया गया. कोर्ट ने यहां तक कहा दिया कि बोकारो पुलिस की विफलता को छिपाने के लिए केस को अप्रैल 2026 में सीआईडी (CID) को हस्तांतरित कर दिया गया.
CBI जांच की दी चेतावनी
सीआईडी की केस डायरी का अध्ययन करने के बाद खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान अनुसंधान सही दिशा में नहीं है. कोर्ट ने सीआईडी को अगले तीन सप्ताह के भीतर जांच में ठोस प्रगति दिखाने का निर्देश दिया. अदातल ने कहा कि यदि सीआईडी की जांच संतोषजनक नहीं पाई गई, तो अदालत राज्य एजेंसी और सीबीआई (CBI) को संयुक्त रूप से जांच करने का आदेश दे सकती है.
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला 16 अक्तूबर 2020 का है, जब एक 14 वर्षीय किशोरी लापता हो गई थी. उसकी मां ने पिंडराजोरा थाना में कांड संख्या 161/2020 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी. बेटी का सुराग न मिलने पर मां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उसे बरामद करने की गुहार लगाई है. मामले की अगली सुनवाई अब 8 जून को होगी.