हजारीबाग में अब ड्रोन से होगी खेती! 5-7 मिनट में एक एकड़ खेत का छिड़काव, महिलाओं और युवाओं को मिलेगा रोजगार

 

Jharkhand news: खेती में तकनीक का इस्तेमाल अब हजारीबाग के गांवों में भी बड़ा बदलाव ला सकता है। जिले में किसानों के खेतों में ड्रोन के जरिए कीटनाशक और तरल उर्वरक के छिड़काव का प्रयोग शुरू किया गया है। फिलहाल पदमा, बरही और इचाक प्रखंड में इसे प्रायोगिक तौर पर आजमाया जा रहा है।

प्रशासन और कृषि विभाग यह पता लगाने में जुटे हैं कि ड्रोन से छिड़काव करने पर खेती की लागत, समय और फसल की उत्पादकता में कितना अंतर आता है। प्रयोग के नतीजों की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी। अगर परिणाम बेहतर रहे तो आने वाले समय में जिले के दूसरे इलाकों में भी ड्रोन आधारित खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है।

एक एकड़ खेत में सिर्फ 5 से 7 मिनट में छिड़काव

ड्रोन तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसका तेज काम करना है। कृषि विभाग के मुताबिक, ड्रोन की मदद से करीब 5 से 7 मिनट में एक एकड़ खेत में कीटनाशक या तरल खाद का छिड़काव किया जा सकता है।

जहां पारंपरिक तरीके से किसान को खेत में उतरकर काफी समय और मेहनत लगानी पड़ती है, वहीं ड्रोन कम समय में पूरे खेत में छिड़काव कर सकता है। इससे किसानों की मेहनत कम होने के साथ पानी और दवा के इस्तेमाल को भी बेहतर तरीके से नियंत्रित करने की संभावना है।

पांच जगहों पर हो रहा तकनीक का परीक्षण

हजारीबाग में इस प्रयोग के लिए पांच स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। इन जगहों पर ड्रोन से कीटनाशक और उर्वरक का छिड़काव किया जा रहा है।

प्रयोग के दौरान फसल पर पड़ने वाले असर, छिड़काव की गुणवत्ता और उत्पादकता में होने वाले बदलाव का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर जिला प्रशासन और कृषि विभाग आगे की रणनीति तैयार करेंगे।

कृषि विभाग और गोरियाकरमा संस्थान की साझी पहल

ड्रोन आधारित खेती के इस प्रयोग में हजारीबाग कृषि विभाग के साथ भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोरियाकरमा के वैज्ञानिक भी जुड़े हुए हैं।

जिला कृषि पदाधिकारी शुभांकर गुप्ता के मुताबिक प्रयोग पूरा होने के बाद इसकी रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन और सरकार को भेजी जाएगी। यह पूरा प्रोजेक्ट हजारीबाग के उपायुक्त हेमंत सती के निर्देशन में आगे बढ़ाया जा रहा है।

वैज्ञानिक बोले- खेती में बड़ा बदलाव ला सकती है ड्रोन तकनीक

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोरियाकरमा के वरिष्ठ वैज्ञानिक पंकज कुमार सिंह का कहना है कि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है।

उनके मुताबिक बड़े खेतों में कम समय में छिड़काव करने की सुविधा किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। इससे मजदूरी और समय की बचत हो सकती है और खेत में उर्वरक या दवा के समान रूप से छिड़काव की संभावना बढ़ती है।

सिर्फ खेती नहीं, गांव में रोजगार का भी रास्ता

हजारीबाग प्रशासन ड्रोन प्रोजेक्ट को केवल खेती तक सीमित नहीं रखना चाहता। इसके जरिए ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है।

जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि भारत सरकार की ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन तकनीक की जानकारी और प्रशिक्षण से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इच्छुक महिलाओं का पंजीकरण कर उन्हें ड्रोन संचालन के लिए प्रशिक्षित करने की योजना है।

इसके साथ ही गांव के युवाओं को भी इस तकनीक से जोड़कर उनके लिए रोजगार के अवसर तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

ड्रोन देखकर महिलाओं में भी बढ़ी दिलचस्पी

प्रायोगिक छिड़काव देखने पहुंची ग्रामीण महिलाओं ने भी इस तकनीक में रुचि दिखाई। महिलाओं का कहना है कि अगर भविष्य में सरकार की ओर से ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है और उन्हें प्रशिक्षण मिलता है तो वे खुद इसका संचालन कर सकती हैं।

महिलाओं के प्रशिक्षण और भागीदारी से कृषि क्षेत्र में तकनीक के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर नए स्वरोजगार के अवसर भी बन सकते हैं।

किसानों की लागत और मेहनत घटाने की कोशिश

ड्रोन आधारित खेती का उद्देश्य सिर्फ छिड़काव की रफ्तार बढ़ाना नहीं है। इसके जरिए किसानों की मेहनत, समय और खेती की लागत कम करने की संभावना भी देखी जा रही है।

अगर प्रयोग के दौरान फसल की उत्पादकता में सकारात्मक बदलाव सामने आता है और लागत कम होती है, तो इस मॉडल को हजारीबाग के दूसरे प्रखंडों में भी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

हजारीबाग में खेती का बदल सकता है तरीका

फिलहाल ड्रोन खेती का प्रयोग शुरुआती चरण में है। लेकिन अगर इसके परिणाम उम्मीद के मुताबिक रहे तो आने वाले वर्षों में हजारीबाग के खेतों में ट्रैक्टर और पारंपरिक उपकरणों के साथ ड्रोन भी खेती का हिस्सा बनते नजर आ सकते हैं।

इससे किसानों को आधुनिक तकनीक का फायदा मिलने के साथ ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए ड्रोन संचालन से जुड़े नए काम के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।