पहली बार पलामू जिले की कमान पूरी तरह महिलाओं के हाथ में, बड़ी जिम्मेदारी के साथ बड़े प्रशासनिक पदों पर है महिलाएं..चुनौतियों के बीच ऐतिहासिक बदलाव...
Palamu: झारखंड का पलामू जिला लंबे समय से नक्सल हिंसा, सूखा-अकाल और पलायन जैसी समस्याओं के लिए चर्चित रहा है. 1892 में गठित इस जिले का इतिहास 134 वर्ष पुराना हो चुका है, लेकिन पहली बार प्रशासनिक और राजनीतिक महत्वपूर्ण पदों पर महिलाओं का पूर्ण दबदबा देखने को मिल रहा है. जिले की पूरी आबादी की सुरक्षा, विकास और सुविधाओं की जिम्मेदारी अब महिला अधिकारियों के कंधों पर है.
महिलाओं का ऐतिहासिक नेतृत्व
पलामू प्रमंडल की कमान प्रमंडलीय आयुक्त कुमुद सहाय (2012 बैच की आईएएस अधिकारी) के हाथ में है. उन्होंने फरवरी 2026 में यह पद संभाला है. जिला स्तर पर प्रमुख पद इस प्रकार हैं, उपायुक्त (डीसी)- समीरा एस (2018 बैच की आईएएस अधिकारी), जिन्होंने मई 2025 में पदभार ग्रहण किया. वे पूर्व में मेदिनीनगर नगर निगम की आयुक्त भी रह चुकी हैं. पुलिस अधीक्षक (एसपी)- रीष्मा रमेशन (आईपीएस), जो जिले के इतिहास में सबसे लंबे कार्यकाल वाले एसपी में से एक हैं.
अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम)- सुलोचना मीणा, जिला आपूर्ति पदाधिकारी (डीएसओ)- प्रीति किस्कू, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ)- नीता चौहान. राजनीतिक क्षेत्र में भी महिलाओं की मजबूत उपस्थिति है. जिला परिषद अध्यक्ष प्रतिमा कुमारी हैं. वहीं, मेदिनीनगर नगर निगम मेयर अरुणा शंकर हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार पलामू की आबादी 19.36 लाख थी, जो वर्तमान में अनुमानित 22-23 लाख के आसपास पहुंच गई है.
पलामू को केंद्र सरकार ने आकांक्षी जिलों की सूची में शामिल किया हुआ है. यह क्षेत्र बिहार और उत्तर प्रदेश की संस्कृति से प्रभावित है और लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहा है. यहां से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए पलायन करते हैं. कोविड-19 काल में 53,000 से अधिक प्रवासी मजदूर लौटे थे, जबकि कुल आंकड़ा एक लाख से ज्यादा दर्ज किया गया.
हालांकि, 2024 में केंद्र सरकार ने पलामू को नक्सल मुक्त श्रेणी में रखा है. कई दशकों बाद 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव नक्सल हिंसा से मुक्त हुए. सुरक्षा की कमान एसपी रीष्मा रमेशन के पास थी, जबकि निर्वाचन पदाधिकारी की भूमिका डीसी समीरा एस, एसडीएम सुलोचना मीणा और डीएसओ प्रीति किस्कू ने निभाई. हाल ही में संपन्न नगर निकाय चुनाव भी इनके नेतृत्व में शांतिपूर्ण ढंग से हुए.
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
एक परसेप्शन है कि पलामू में कार्य करना एक बड़ी चुनौती है, पलामू में दूसरी पोस्टिंग है. पलामू चुनौती पूर्ण माना जाता है और यह राजनीतिक रूप से जागरूक इलाका है, आगे जाने के लिए यह अच्छी बात है. लोगों को अपने अधिकार के बारे में जागरूक होना अच्छी बात है. अभी देखा जाता सभी महत्वपूर्ण पदों पर महिलाएं हैं जैसे कमिश्नर मैडम, एसपी मैडम, एसडीओ, डीएसओ. महिला पुरुष के अंतर को लेकर कभी फील नहीं हुआ. - समीरा एस, डीसी पलामू
चुनौती हर जगह है इलाके के हिसाब से चुनौतियां बदलती रहती है. पलामू के इलाके में भी एक अलग चुनौती है, पलामू के इलाके में सामाजिक अपराध एक बड़ी चुनौती. पोस्टिंग के दौरान फीडबैक दिया गया था कि पलामू का इलाका विवादित है और अधिक अपराध की घटनाएं होती हैं. पलामू की इलाके में एक चीज देखने को मिली है आर्थिक अपराध से अधिक सामाजिक अपराध है. अच्छी बात है कि पलामू के लोग एक दूसरे से जुड़े हुए रहते हैं. पलामू के लोगों से बहुत सारा प्यार और स्नेह मिल रहा है और लोगों ने काफी विश्वास किया है. - रीष्मा रमेशन, एसपी, पलामू