पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने राज्य में महिला आयोग की गठन नहीं होने से सरकार के कामकाज पर जताई चिंता...

Ranchi: विधानसभा परिसर में पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने महिला आयोग को लेकर जमकर भरास निकाली. उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक को संज्ञान में लेने की अपील की...
 
Ranchi: राज्य में महिला सशक्तिकरण की लंबी चौड़ी बातें भले ही की जाती हो, लेकिन हकीकत यह है कि महिला आयोग जैसी संवैधानिक संस्था बीते 6 वर्षों से डिफंड पड़ी है. जाहिर तौर पर इसके गठन की लगातार उठ रही मांग अब तेज होने लगी है. कल तक महिला आयोग की बदहाल स्थिति को लेकर सवाल उठा रहे विपक्ष के बाद अब सत्तारूढ़ दल के नेता भी अपनी सरकार पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है.
जनप्रतिनिधि होने के नाते डरती हूं: अंबा प्रसाद
विधानसभा परिसर में पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने महिला आयोग को लेकर जमकर भरास निकाली. उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक को संज्ञान में लेने की अपील की.
अंबा प्रसाद ने कहा कि एक महिला जनप्रतिनिधि होने के नाते डरती हूं कि अगर उनका अधिकार हनन होता है तो वो कैसे महिला आयोग जाएगी, क्योंकि राज्य में महिला आयोग ही नहीं है.
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण और महिला को लेकर खूब प्रचार प्रसार होता है, इसके बावजूद महिला आयोग का ना होना बेहद ही चिंता का विषय है.
राज्य महिला आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष कल्याणी शरण का कार्यकाल 6 जून 2020 को समाप्त हो गया था. उसके बाद से अब तक झारखंड राज्य महिला आयोग में न तो नए अध्यक्ष की नियुक्ति हुई और न ही सदस्यों की. आयोग में अध्यक्ष नहीं होने से कामकाज प्रभावित है.
जानकारी के मुताबिक महिला आयोग में कुल 4014 शिकायतें दर्ज हैं. जिसमें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामले शामिल हैं. आयोग का गठन नहीं होने के कारण इन मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है और पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने में देरी हो रही है.
आयोग को लेकर सरकार भले ही विभागीय कार्रवाई का दावा करती रही हो, लेकिन पीड़ित महिलाओं के लिए समर्पित मंच और त्वरित सुनवाई की व्यवस्था पिछले छह वर्षों से ठप पड़ी हुई है.
गौरतलब है कि झारखंड राज्य महिला आयोग में एक अध्यक्ष और पांच सदस्यों के पद स्वीकृत हैं. सभी पद खाली होने के कारण फिलहाल केवल शिकायतें दर्ज कर फाइलों में रख दी जाती हैं. लेकिन उन मामलों पर आगे की कार्रवाई नहीं हो पाती हैं.