पेपर लीक से परीक्षा रद्द करने तक, JPSC-JSSC मामले में हाईकोर्ट में क्या-क्या हुआ? सुबह 11 बजे कोर्ट में फिर होगी बहस

Ranchi:  JPSC और JSSC CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने करीब सवा दो घंटे तक चली सुनवाई के बाद JSSC CGL परीक्षा-2023 (विज्ञापन संख्या 10/2023) मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया. राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और प्रश्नपत्र लीक की जांच का हवाला देते हुए परीक्षा रद्द करने के फैसले को उचित बताया.
 
 

Ranchi:  झारखंड में JPSC और JSSC CGL परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में करीब सवा दो घंटे तक चली सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों, राज्य सरकार और हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने JSSC CGL परीक्षा (विज्ञापन संख्या 10/2023) से जुड़े मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। वहीं, JPSC परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई जारी रही। अब JPSC मामले में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से फिर सुनवाई होगी।

JSSC CGL पर फैसला सुरक्षित, अंतरिम राहत बरकरार

सुनवाई के दौरान अदालत ने JSSC द्वारा आयोजित CGL परीक्षा-2023 को रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। हालांकि, अदालत ने प्रार्थियों को पहले से मिली अंतरिम राहत को अगले आदेश तक बरकरार रखने का निर्देश दिया है।

इस मामले में अब अभ्यर्थियों की नजर हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी है। परीक्षा रद्द किए जाने के बाद प्रभावित अभ्यर्थी न्यायालय से राहत की उम्मीद कर रहे हैं।

JPSC, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा का मामला भी पहुंचा कोर्ट

JSSC CGL के साथ-साथ JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) और फूड सेफ्टी ऑफिसर समेत विभिन्न परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई।

इन परीक्षाओं को लेकर दायर याचिकाओं में परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई है। अदालत ने इन मामलों में सुनवाई जारी रखी है। अब 9 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में JPSC मामले से जुड़ी दलीलों पर आगे चर्चा होगी।

सरकार ने परीक्षा रद्द करने के पीछे बताईं अनियमितताएं

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि CGL परीक्षा-2023 को रद्द करने का प्रमुख कारण परीक्षा में बड़े पैमाने पर सामने आई कथित अनियमितताएं और भ्रष्टाचार था।

सरकार की ओर से दलील दी गई कि अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की जांच में कई नए तथ्य सामने आए हैं और मामले का अनुसंधान अभी जारी है। अधिवक्ता ने प्रश्नपत्र लीक होने, अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचने और जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं से परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई थी।

निर्दोष और दोषी अभ्यर्थियों की पहचान करना कठिन : सरकार

राज्य सरकार की ओर से अदालत में यह भी दलील दी गई कि कथित अनियमितताओं की व्यापकता को देखते हुए निर्दोष और दोषी अभ्यर्थियों की अलग-अलग पहचान करना बेहद कठिन था। इसी आधार पर पूरी परीक्षा रद्द करने के निर्णय को उचित ठहराया गया।

सरकार का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। दूसरी ओर, परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाले प्रार्थियों की दलीलों पर भी अदालत विचार कर रही है।

अब 9 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें

JSSC CGL मामले में फैसला सुरक्षित रखे जाने और JPSC मामले में सुनवाई जारी रहने के बाद अब झारखंड के हजारों अभ्यर्थियों की नजर हाईकोर्ट की अगली कार्यवाही पर है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से JPSC परीक्षाओं को रद्द करने के मामले में सुनवाई होगी।

इस सुनवाई में आगे क्या दलीलें सामने आती हैं और अदालत का रुख क्या रहता है, इस पर अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हैं। फिलहाल, JSSC CGL मामले में फैसला सुरक्षित है, जबकि JPSC और अन्य परीक्षाओं से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया जारी है।