गिरिडीह में खुलेआम नियमों की अनदेखी: 800+ गोलगप्पा विक्रेता, गंदगी से खतरे में सेहत

Giridih: गोलगप्पा का पानी बनाने में मात्र सौ से डेढ़ सौ रुपया का ही खर्च आता है. गोलगप्पा बेचने के दौरान विक्रेता को कई दफा पानी में हाथ डालना पड़ता है, ऐसे में एक ही दिन में गोलगप्पा का पानी खराब हो जाता है. इसलिए पानी को किसी भी हाल में दूसरे दिन यूज नहीं करना है.
 

Giridih: चाट-गोलगप्पे का व्यवसाय पूरी तरह से बेहतरीन स्वाद और विश्वास पर टिका हुआ है. लोग इस विश्वास से ठेले-खोमचे वालों से गोलगप्पा या चाट खरीद कर खाते हैं कि विक्रेता ने अच्छी सामग्री और सफाई का ध्यान दिया होगा. लेकिन यह विश्वास गिरिडीह के गोलगप्पा कांड से टूट गया है.

गोलगप्पा खाने के बाद 49 लोगों के बीमार पड़ने जिसमें एक की मौत हो जाने की घटना के बाद गुणवत्ता ओर सफाई पर सीधा सवाल उठने लगा है. इस घटना के बाद ईटीवी भारत ने जिला खाद्य सुरक्षा विभाग से लेकर शहर में गोलगप्पा-चाट बेचने वालों से बात की. यहां एक बात तो साफ हुई कि गोलगप्पा विक्रेता ओभी लाल रजक ने लापरवाही की. लापरवाही जानबूझ कर की गई या कैसे हुई इसकी जांच जारी है.

यहां बेहतर सामान के साथ-साथ सफाई और स्वाद का ध्यान दिया जाता है. वे कम मसाला और मामूली रंग का उपयोग चाट में करते हैं. गोलगप्पा का पानी भी हर रोज बदला जाता है. बजटो - कुम्हरगढ़िया में गोलगप्पा खाने से 49 लोगों के बीमार होने के मामले पर गंगा कहते हैं कि गोलगप्पा का पानी यदि खराब रहा तो लोगों की तबियत बिगड़ सकती है.

उन्होंने बताया कि गोलगप्पा का पानी बनाने में मात्र सौ से डेढ़ सौ रुपया का ही खर्च आता है. गोलगप्पा बेचने के दौरान विक्रेता को कई दफा पानी में हाथ डालना पड़ता है, ऐसे में एक ही दिन में गोलगप्पा का पानी खराब हो जाता है. इसलिए पानी को किसी भी हाल में दूसरे दिन यूज नहीं करना है. उनका कहना है कि गोलगप्पा कांड में पानी ही खराब हुआ होगा, जिसका उपयोग किया गया और लोगों की तबियत बिगड़ गई.

गोलगप्पा कांड का बिक्री पर असर

गोलगप्पा कांड के बाद बिक्री पर इसका असर दिखा है. ग्राहक कम संख्या में आए हैं. गंगा कहते हैं कि विक्रेता को सबसे पहले सफाई का ध्यान रखना होगा. लोग विश्वास के साथ ठेला पर आते हैं. वहीं, विक्रेता गोपाल राम कहते हैं कि घटना गंभीर है. अब देखते हैं इसका कितना असर दुकानदारी पर पड़ता है.

इधर, खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजा कुमार कहते हैं कि जिले में गोलगप्पा-चाट बेचने वालों की संख्या लगभग आठ सौ है. इनमें से बहुत से लोगों ने निबंधन नहीं करवाया है. ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी वाली है. इतना ही नहीं हर ठेला में जाकर चेक करने का काम शुरू किया गया है. जो लोग सफाई का विशेष ध्यान नहीं रखते हैं या फूड कलर के नाम पर घटिया रंग सामग्री में डालते हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई तय है. उन्होंने बताया कि गोलगप्पा कांड के बाद विक्रेता के घर पर छापेमारी की गई थी. इनके यहां से चम्पई रंग मिला था, जो सेहत के लिए सही नहीं है.

सवालों के घेरे में खाद्य सुरक्षा विभाग

वैसे तो इस घटना के बाद कार्रवाई हुई और विक्रेता को जेल भी भेजा गया लेकिन इस प्रकरण ने निश्चित तौर पर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाया है. सवाल है कि आखिर जब खुलेआम जैसे तैसे ठेला-खोमचा में खाद्य सामग्री बेची जा रही, सफाई का ध्यान नहीं रखा जा रहा है, गंदगी और नाली के पास स्टॉल लगाकर सामान बेच रहे, स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले रंगों का इस्तेमाल होता रहा तो फिर विभाग कहां सोया रहा. पहले से कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

यदि कार्रवाई नहीं हुई तो जागरूकता अभियान क्यों नहीं चलाया गया. सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी लोग विभाग पर सवाल उठा रहे हैं. ऐसे में देखना होगा कि इस घटना के बाद क्या विभाग पूरी तरह से गंभीर होता है या फिर कुछ दिनों बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है. सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी लोग विभाग पर सवाल उठा रहे हैं. ऐसे में देखना होगा कि इस घटना के बाद क्या विभाग पूरी तरह से गंभीर होता है या फिर कुछ दिनों बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है.

गोलगप्पा सीधा हाथों से खिलाया जाता है, ऐसे में विक्रेताओं को इन बातों का रखना चाहिए:-

  • हमेशा दास्ताने पहनकर गोलगप्पा खिलाए या किसी चम्मच से गोलगप्पा का पानी सूखे गोलगप्पा में भरे. अगर दस्ताने नहीं हो तो हाथ को बार-बार धोए. नाखून को भी छोटा कर साफ रखना चाहिए.
  • गोलगप्पा में सबसे संवेदनशील पानी है. हमेशा साफ पानी, आरो वाटर या उबले पानी का उपयोग करना चाहिए.
  • ताजी सब्जियों का प्रयोग करना सही है. मसाले भी शुद्ध होना चाहिए. उबले हुए आलू समेत अन्य सामान को हमेशा जाली या ढक्कन से ढंककर रखे.
  • साफ कपड़ा के साथ-साथ हेड कवर का प्रयोग करें ताकि बाल खाना में न गिरे.
  • पानी कंटेनर और अन्य बर्तनों को हर रोज गर्म पानी से धोए. नाली एवं गंदगी के ढेर के पास स्टॉल नहीं लगाए. अच्छी क्वालिटी के डिस्पोजल का उपयोग करें.
  • बचे हुए पानी, आलू, चाट, कटे हुए प्याज, धनिया का अगले दिन उपयोग न करें.

क्या है गोलगप्पा कांड

बता दें कि शनिवार को सदर प्रखंड के बजटो-कुम्हरगढ़िया समेत कुछ गांव के बच्चें, बड़ों ने पालमो के गोलगप्पा विक्रेता से गोलगप्पा खाया था. इसके बाद 49 लोगों की तबियत बिगड़ गई थी. इनमें से एक बच्चे की मौत हो गई. घटना के बाद एफआईआर दर्ज की गई और आरोपी को जेल भेज दिया गया.