Hazaribagh Floating Restaurant: झील में तैरेगा 2 मंजिला रेस्टोरेंट! दशहरा तक होगा शुरू बड़ा टूरिस्ट स्पॉट

Hazaribagh:  ऐतिहासिक हजारीबाग झील में फ्लोटिंग रेस्टोरेंट तैयार किया जा रहा है, जिसे अक्टूबर में दशहरा तक शुरू करने की तैयारी है. दो मंजिला इस रेस्टोरेंट में करीब 50 से 70 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी. लेक-व्यू डाइनिंग और आकर्षक लाइटिंग के साथ इसे PPP मॉडल पर संचालित करने की योजना है.
 

Hazaribagh:  झारखंड के हजारीबाग की ऐतिहासिक झील अब पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित होने की तैयारी में है। नगर निगम झील के सौंदर्यीकरण फेज-2 के तहत यहां फ्लोटिंग रेस्टोरेंट तैयार कर रहा है। इसे अक्टूबर में दशहरा तक शुरू करने की तैयारी है। प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना हजारीबाग के पर्यटन को नई पहचान देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ा सकती है।

हालांकि, परियोजना को लेकर पर्यावरण और निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। पर्यावरण प्रेमी झील के पारिस्थितिक संतुलन को लेकर चिंता जता रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने योजना की लागत और निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच की मांग की है। झील किनारे कारोबार करने वाले छोटे वेंडर्स को भी अपने रोजगार पर असर की आशंका है।

झील के पानी पर तैरेगा दो मंजिला रेस्टोरेंट

प्रस्तावित फ्लोटिंग रेस्टोरेंट जमीन पर बने सामान्य भवन की तरह नहीं होगा। इसे झील के पानी पर तैरने वाले बड़े बजरे या प्लेटफॉर्म पर दो मंजिला ढांचे के रूप में तैयार किया जा रहा है।

रेस्टोरेंट को झील के किनारे से एक छोटे पुल के जरिए जोड़ा जाएगा, जिससे पर्यटक सीधे वहां पहुंच सकेंगे। इसमें एक साथ करीब 50 से 70 लोगों के बैठने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

फैमिली डाइनिंग, कैफेटेरिया और शाम के समय आकर्षक लाइटिंग के साथ लेक-व्यू डिनर की सुविधा विकसित करने की योजना है।

नगर निगम के मुताबिक, परियोजना को गोरखपुर के रामगढ़ताल और भोपाल की झील की तर्ज पर PPP मॉडल के तहत संचालित करने की योजना है।

पर्यावरण प्रेमियों ने जताई चिंता

फ्लोटिंग रेस्टोरेंट को लेकर सबसे बड़ी चिंता पर्यावरण को लेकर सामने आई है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि हजारीबाग की ऐतिहासिक झील सात कृत्रिम झीलों के समूह का हिस्सा है और शहर के पारिस्थितिक संतुलन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

उनका तर्क है कि रेस्टोरेंट शुरू होने के बाद यदि तेल, खाद्य पदार्थों का कचरा, बर्तन धोने का पानी या अन्य अपशिष्ट झील में पहुंचा तो प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है।

पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि पहले झील की सफाई, गाद निकालने और गहरीकरण जैसे कामों पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके बाद ही झील में बड़े पर्यटन प्रोजेक्ट को बढ़ावा देना चाहिए।

13.97 करोड़ की योजना पर कांग्रेस के सवाल

परियोजना की लागत और निर्माण गुणवत्ता को लेकर कांग्रेस ने भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रदेश महासचिव सुरजीत नागवाला ने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि करीब 13.97 करोड़ रुपये की योजना में निर्माण गुणवत्ता से समझौता किया गया है।

उन्होंने परियोजना का तकनीकी और वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की है। कांग्रेस नेता के मुताबिक, पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए।

हालांकि, नगर निगम ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। निगम की ओर से कहा गया है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार कराया जा रहा है।

झील किनारे के छोटे दुकानदारों को रोजगार की चिंता

फ्लोटिंग रेस्टोरेंट शुरू होने से झील किनारे वर्षों से कारोबार कर रहे छोटे दुकानदार और फूड वेंडर्स भी चिंतित हैं।

बताया गया है कि करीब 15 से 20 वेंडर्स झील किनारे छोटे फूड स्टॉल चलाते हैं। उन्हें आशंका है कि बड़े रेस्टोरेंट के संचालन के बाद उनके कारोबार को सीमित किया जा सकता है या उन्हें वहां से हटाने का फैसला लिया जा सकता है।

वेंडर्स का कहना है कि अगर परियोजना से पर्यटन बढ़ता है तो इसका फायदा छोटे कारोबारियों को भी मिलना चाहिए। उनका कहना है कि पर्यटन विकास का लाभ केवल बड़े व्यावसायिक मॉडल तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

पर्यटन बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा होने की उम्मीद

प्रशासन को उम्मीद है कि फ्लोटिंग रेस्टोरेंट शुरू होने के बाद हजारीबाग आने वाले पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण विकसित होगा।

अधिकारियों के मुताबिक, बरही और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले पर्यटक होटल अरण्य विहार के साथ हजारीबाग झील का भी रुख कर सकते हैं। इससे स्थानीय दुकानदारों, परिवहन और अन्य सेवा क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

परियोजना के जरिए नगर निगम को नियमित किराये के रूप में राजस्व मिलने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की भी संभावना जताई गई है।

पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार फ्लोटिंग रेस्टोरेंट में पर्यावरणीय मानकों का ध्यान रखा जाएगा। इसके लिए बायो-टॉयलेट, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम और नियमित निगरानी जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं।

प्रशासन का कहना है कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि रेस्टोरेंट से निकलने वाला किसी भी तरह का कचरा या गंदा पानी झील में न पहुंचे।

अब परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्यटन विकास और झील के पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी। अक्टूबर में दशहरा तक रेस्टोरेंट शुरू होने के बाद इसकी वास्तविक व्यवस्था और पर्यावरणीय प्रभाव पर भी नजर रहेगी।