हेमंत सरकार ने बदली Treasury की व्यवस्था, अब डिजिटल सिग्नेचर से होगा सरकारी भुगतान

Jharkhand:  झारखंड सरकार ने सरकारी कोषागार को पेपरलेस बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है. 1 सितंबर 2026 से वेतन, आकस्मिक व्यय, यात्रा भत्ता और अन्य अग्रिमों से जुड़े बिलों का भुगतान ई-साइन या डिजिटल सिग्नेचर के जरिए किया जा रहा है. राज्य के 33 कोषागार और उप कोषागार इस व्यवस्था के दायरे में हैं.
 

Jharkhand: झारखंड में सरकारी कोषागार से होने वाली वित्तीय निकासी की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने सरकारी कोषागार को पेपरलेस बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्त विभाग के निर्देश के मुताबिक 1 सितंबर 2026 से बिलों के भुगतान की प्रक्रिया ई-साइन या डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से लागू की गई है।

नई व्यवस्था के तहत सरकारी कर्मचारियों के वेतन, आकस्मिक खर्च, यात्रा भत्ता और विभिन्न अग्रिमों से जुड़े बिलों के लिए कागजी विपत्र की जगह डिजिटल प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसका उद्देश्य वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, तेज और डिजिटल बनाना है।

वित्त विभाग ने पहले ही जारी किया था निर्देश

वित्त विभाग की संयुक्त सचिव ज्योति कुमारी झा ने अगस्त में ही सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDO) को पत्र जारी कर डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू करने के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था।

विभागों को अपने स्तर पर कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़ा जरूरी डिजिटल डाटा अपडेट करने के साथ-साथ ई-साइन और डिजिटल सिग्नेचर से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया था। हालांकि, जानकारी के अनुसार कुछ विभागों में अभी भी अधीनस्थ कर्मचारियों का डिजिटल डाटा पूरी तरह अपडेट नहीं हो पाया है।

कागजी विपत्र की जगह अब ई-साइन से भुगतान

झारखंड में कुल 33 कोषागार और उप कोषागार हैं। इनमें सरकारी कर्मचारियों के वेतन बिल, आकस्मिक व्यय, यात्रा भत्ता (TA), हाउस बिल्डिंग एडवांस, मोटर कार एडवांस और अन्य वित्तीय विपत्रों के भुगतान की प्रक्रिया डिजिटल की जा रही है।

राज्य के कोषागारों से हर महीने औसतन करीब 3,205 करोड़ रुपये की निकासी होती है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किए जाने से बिलों की जांच, स्वीकृति और भुगतान में लगने वाले समय को कम करने में मदद मिल सकती है।

नई व्यवस्था में ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करने और उसका डिजिटल माध्यम से निष्पादन करने की सुविधा भी होगी। इससे किसी विपत्र में कमी पाए जाने पर उसे कागज के साथ वापस भेजने की जरूरत कम होगी।

3.25 लाख से अधिक कर्मचारियों के वेतन-भत्ते पर असर

राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और कार्यालयों में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 1.78 लाख नियमित सरकारी कर्मचारी दर्ज हैं। इसके अलावा संविदा और आउटसोर्सिंग के आधार पर करीब 1.60 लाख कर्मचारी विभिन्न विभागों में काम कर रहे हैं।

इस तरह नियमित, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को मिलाकर करीब 3.25 लाख कर्मचारियों की वित्तीय निकासी प्रक्रिया डिजिटल व्यवस्था से प्रभावित होगी।

वहीं, झारखंड में करीब 1.48 लाख पंजीकृत पेंशनभोगी हैं, जिनमें सेवानिवृत्त कर्मचारी और पारिवारिक पेंशनर्स शामिल हैं। इनके पेंशन भुगतान से जुड़ी वित्तीय प्रक्रिया में भी डिजिटल सिस्टम की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

वेतन और पेंशन पर हर महीने करोड़ों का खर्च

राज्य सरकार अपनी कुल राजस्व प्राप्ति का एक बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर खर्च करती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वेतन मद में हर महीने करीब 1,800 से 2,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।

वहीं पेंशन पर हर महीने लगभग 800 से 900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इतनी बड़ी वित्तीय प्रक्रिया को डिजिटल करने से बिलों की ट्रैकिंग और भुगतान की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से किए जाने की उम्मीद है।

ई-वाउचर सिस्टम में मेकर-चेकर की होगी भूमिका

नई डिजिटल व्यवस्था में ई-वाउचर सिस्टम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वित्तीय निकासी से पहले डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) से जुड़े दस्तावेजों और विपत्रों की जांच के लिए विभागीय स्तर पर अधिकृत मेकर और चेकर की व्यवस्था रहेगी।

मेकर द्वारा संबंधित प्रक्रिया तैयार किए जाने के बाद चेकर स्तर पर उसकी जांच की जाएगी। इसके बाद अधिकृत डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से विपत्र को आगे बढ़ाया जाएगा।

कर्मचारी महासंघ ने जताई वेतन में देरी की चिंता

झारखंड राज्य कर्मचारी महासंघ ने डिजिटल व्यवस्था का स्वागत किया है, लेकिन कर्मचारियों के प्रोफाइल अपडेट नहीं होने को लेकर चिंता जताई है।

महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा के अनुसार, त्योहारों के समय अगर कर्मचारियों का डिजिटल डाटा या प्रोफाइल अपडेट नहीं हुआ तो वेतन भुगतान में परेशानी हो सकती है। महासंघ ने मांग की है कि त्योहार को देखते हुए फिलहाल नई व्यवस्था में कुछ राहत दी जाए और जरूरत पड़ने पर पुरानी व्यवस्था से भी भुगतान की अनुमति दी जाए।

साइबर फ्रॉड से सुरक्षा पर भी उठे सवाल

नई डिजिटल व्यवस्था को लेकर साइबर सुरक्षा का मुद्दा भी सामने आया है। सचिवालय संघ के पूर्व अध्यक्ष ध्रुव प्रसाद ने डिजिटल सिस्टम को कर्मचारियों और प्रशासन के लिए उपयोगी बताते हुए साइबर फ्रॉड से सुरक्षा की तैयारी पर ध्यान देने की बात कही है।

झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महासचिव सुनील कुमार साह ने भी डिजिटल व्यवस्था का समर्थन करते हुए सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को समय पर भुगतान मिले।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराध की घटनाओं को देखते हुए नई वित्तीय व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए पर्याप्त तकनीकी सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।

कोषागार में अवैध निकासी के मामलों के बीच डिजिटल व्यवस्था

झारखंड के कुछ जिलों में सरकारी कोषागार से कथित अवैध निकासी के मामले सामने आने के बाद वित्तीय लेनदेन की निगरानी और नियंत्रण को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे समय में कोषागार व्यवस्था को पेपरलेस करने का कदम वित्तीय प्रक्रियाओं को डिजिटल ट्रैकिंग के दायरे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है।

हालांकि, नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डिजिटल सत्यापन, साइबर सुरक्षा, कर्मचारियों का डाटा अपडेट और समय पर वेतन-पेंशन भुगतान कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।

फिलहाल सरकार की ओर से ई-साइन आधारित व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में राज्य के सरकारी वित्तीय भुगतान का बड़ा हिस्सा डिजिटल सिस्टम के जरिए संचालित किया जाना है।