हेमंत सोरेन की कोर्ट में पेशी! बड़गाईं जमीन केस में आरोप तय...अब आगे क्या होगा?

Hemant Soren:   बड़गाईं जमीन मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेशी हुई. सुनवाई के दौरान मामले में उनके खिलाफ आरोप तय किए गए. अब इस केस में आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी. बड़गाईं जमीन से जुड़े इस मामले को लेकर झारखंड की राजनीति में भी लंबे समय से चर्चा रही है.
 

Jharkhand:  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े बड़गाईं जमीन मामले में बुधवार को बड़ा कानूनी अपडेट सामने आया। रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय कर दिए। मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए।

अदालत ने आरोप गठन की कार्यवाही के दौरान हेमंत सोरेन के खिलाफ लगाए गए आरोप उन्हें पढ़कर सुनाए। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को निराधार बताया और कहा कि उन्होंने किसी तरह का अपराध नहीं किया है।

17 आरोपियों के खिलाफ आगे बढ़ेगा ट्रायल

हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय होने के साथ ही अब इस मामले में कुल 17 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे पहले मामले में 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप गठित किए जा चुके थे।

मामले में भानु प्रताप प्रसाद, अंतू तिर्की, विनोद कुमार सिंह, बिजेंद्र सिंह, बिपिन सिंह, प्रियरंजन सहाय, मनोज कुमार यादव, कुमार राजश्री, राजकुमार पाहन, संजीत कुमार, शेखर कुशवाहा, तापस घोष, मोहम्मद इरशाद अख्तर, अफसर अली, मोहम्मद सद्दाम हुसैन और मोहम्मद इरशाद समेत अन्य आरोपी शामिल हैं।

8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला

यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और जमीन पर कथित अवैध कब्जे से जुड़े पहलुओं की जांच की गई थी। ED ने मामले को मनी लॉन्ड्रिंग से भी जोड़ा है।

आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं

कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोप तय होने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो गए हैं। अब मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष को अपना-अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। आरोपों की पुष्टि या खारिज होने का फैसला ट्रायल और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।

अब आगे क्या होगा?

हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय होने के बाद मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अदालत में अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य पेश करेगा और बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। ऐसे में बड़गाईं जमीन मामला अब अगले कानूनी चरण में प्रवेश कर गया है।