JPSC-JSSC केस में हाईकोर्ट सख्त! सरकार को 48 घंटे का समय, सीलबंद रिपोर्ट से क्या निकला?

JPSC-JSSC Highcourt Hearing: JPSC-JSSC नियुक्ति विवाद को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई. राज्य सरकार ने CID जांच से जुड़ी स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष पेश की, जिसका अदालत ने अवलोकन किया. सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने जांच की रफ्तार पर चिंता जताई और कहा कि मामला हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है.
 

Ranchi Highcourt: झारखंड में JPSC-JSSC की विभिन्न परीक्षाओं और नियुक्तियों से जुड़े विवाद पर मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से CID जांच की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश की गई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद उसे दोबारा सील कर रिकॉर्ड पर रख दिया। साथ ही सरकार को मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए 48 घंटे का समय दिया गया है। अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।

सीलबंद लिफाफे में पेश हुई जांच रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने CID की आपराधिक जांच की प्रगति रिपोर्ट अदालत को सौंपी। कोर्ट ने रिपोर्ट को खोलकर देखा और इसके बाद उसे फिर से सील कर रिकॉर्ड में रखने का निर्देश दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच से संबंधित इस रिपोर्ट की प्रति फिलहाल याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

सरकार ने मांगा था चार सप्ताह का समय

राज्य सरकार की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए अदालत से चार सप्ताह का समय मांगा गया था। सरकार का तर्क था कि मामले में आपराधिक जांच अभी जारी है और जांच की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही विस्तृत जवाब दाखिल किया जा सकता है।

हालांकि, अदालत ने लंबा समय देने के बजाय सरकार को 48 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

जांच की रफ्तार पर कोर्ट ने जताई चिंता

सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक रोशन ने जांच की गति को लेकर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि मामला बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है और ऐसे में जांच लगातार प्रभावी गति से आगे बढ़नी चाहिए।

कोर्ट के सामने फिलहाल मुख्य सवाल सरकार की उस अधिसूचना की कानूनी वैधता का है, जिसके तहत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को प्रभावित करने वाला फैसला लिया गया था।

सभी नियुक्त अभ्यर्थियों को दोषी नहीं माना जा सकता

सुनवाई में अदालत ने एक अहम टिप्पणी भी की। कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप और आपराधिक जांच अपनी जगह हैं, लेकिन सिर्फ अनियमितता के आरोप के आधार पर सभी नियुक्त अभ्यर्थियों को दोषी नहीं माना जा सकता।

अदालत के इस रुख का सीधा मतलब है कि जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि कथित अनियमितताओं में कौन लोग वास्तव में शामिल थे और किन अभ्यर्थियों पर इसका कोई आरोप नहीं है।

नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर रोक जारी

JPSC-JSSC से जुड़े मामलों में राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इससे पहले अदालत ने सरकार के नियुक्तियां रद्द करने संबंधी आदेश पर अंतरिम रोक लगाई थी। मंगलवार की सुनवाई में यह राहत फिलहाल जारी रही।

सरकार ने 17 अगस्त की कैबिनेट बैठक के बाद 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने, छह परीक्षाओं को स्थगित करने और कई मामलों की CID जांच कराने का फैसला लिया था। इसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

18 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

अब मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को होगी। उस दिन सरकार का जवाब और CID जांच की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। अदालत यह तय करेगी कि संबंधित सरकारी अधिसूचना को लेकर आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जानी है।

फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण नियुक्त अभ्यर्थियों को राहत मिली हुई है और अगली सुनवाई तक स्थिति यथावत बनी रहेगी।