इतनी कड़ी सुरक्षा बावजुद इसके कैसे फरार हुआ जेल से तीन कैदी, बड़ा सवाल!

Ranchi: समय रात के 1 बजे के बाद चुना. क्योंकि ठंड की वजह से काफी कोहरा होता है. ऐसे में वॉच टावर पर जो प्रहरी होता है, उसे नीचे सब कुछ स्पष्ट दिखाई नहीं देता है. हालांकि जेल आईजी ने बताया कि यह एक घोर लापरवाही है. इस मामले में दो जेल कर्मियों को सस्पेंड किया गया है. वहीं तीन को शोकॉज जारी करके यह पूछा गया है क्यों नहीं आपको टर्मिनेट कर दिया जाए...
 

Ranchi: झारखंड के हजारीबाग जेल से तीन कैदी फरार होने के मामले की जांच शुरू कर दी गई है. फिलहाल प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए जेल आईजी ने दो सुरक्षाकर्मी को सस्पेंड कर दिया है. वहीं कई सुरक्षाकर्मियों को शोकॉज किया गया है.



हेक्सा ब्लेड कहां से आया
झारखंड के हजारीबाग जिले के जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा से तीन कैदियों के एक साथ फरार होने की घटना ने एक बार फिर से जेल सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ जहां फरार कैदियों के गिरफ्तारी के लिए हजारीबाग पुलिस दिन-रात एक किए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ जेल प्रशासन के द्वारा कड़ी सुरक्षा के बीच आखिर तीन कैदी एक साथ कैसे फरार हुए इसकी जांच भी शुरू कर दी गई है. जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि सेल को काटने के लिए हेक्सा ब्लेड का प्रयोग किया गया है.

झारखंड के जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने बताया कि मामला बेहद गंभीर है. इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बीच तीन कैदी कैसे फरार हो गए हैं, यह बड़ा सवाल है. जेल आईजी ने बताया की सीसीटीवी देखने से यह पता चलता है की रात के एक बजे के बाद तीनों कैदी फरार हुए हैं. सवाल यह है कि उनके पास सेल को काटने के लिए हेक्सा ब्लेड कहां से आया. दूसरा सवाल यह है कि आखिर 30 कैदियों की सेल से तीन कैदी कैसे फरार हो गए. जेल आईजी ने कहा कि कैदियों के फरार होने के दौरान बाकी कैदियों को भी इसकी जानकारी हुई होगी, लेकिन उन्होंने किसी को कोई सूचना नहीं दी.

जिला आईजी ने बताया कि पूरे मामले में जेल में बंद कैदियों की भूमिका भी संदेहास्पद है. जेल आईजी ने कहा कि जिस वार्ड में 40 से ज्यादा कैदी बंद हो और उस वार्ड के ग्रिल को काटकर अगर तीन कैदी फरार हो जाता है तो वार्ड के अन्य कैदियों को भी उनके फरार होने की जानकारी पूर्व से होगी. ऐसा लगता है कि कैदियों के मिली भगत से ही तीन कैदी फरार होने में कामयाब हुए हैं. हजारीबाग जेल से फरार तीनों कैदी फरार होने का समय रात के 1 बजे के बाद चुना. क्योंकि ठंड की वजह से काफी कोहरा होता है. ऐसे में वॉच टावर पर जो प्रहरी होता है, उसे नीचे सब कुछ स्पष्ट दिखाई नहीं देता है. हालांकि जेल आईजी ने बताया कि यह एक घोर लापरवाही है. इस मामले में दो जेल कर्मियों को सस्पेंड किया गया है. वहीं तीन को शोकॉज जारी करके यह पूछा गया है क्यों नहीं आपको टर्मिनेट कर दिया जाए.

फरार तीनों कैदियों की तलाश तेज कर दी गई है. फरार कैदियों की तस्वीर सभी जिलों के पुलिस के बीच वितरित की गई है. जिससे उनके मूवमेंट की जानकारी होते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सके. फरार कैदियो में सबसे कुख्यात देवा भुईया का नाम शामिल है. देवा का हजारीबाग से पुराना संबंध रहा है. वे हजारीबाग जेल से पूर्व धनबाद जेल से भी फरार होने में कामयाब हो चुका है. धनबाद जेल से भागने के बाद वह साढ़े तीन साल तक भूमिगत रहा था. उसके खिलाफ धनबाद जिले के विभिन्न थानों में एक दर्जन से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं. जिनमें 2019 का गैंगरेप केस भी शामिल है.

दूसरा फरार कैदी जीतेंद्र रवानी है. जिस पर भाटडीह ओपी में पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज था. अदालत ने उसे 22 साल की सजा सुनाई थी. जेल में उसने फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास भी किया था. लेकिन समय रहते बचा लिया गया. तीसरा आरोपी राहुल रजवार है. जो 2024 में एक नाबालिग प्रेम प्रसंग के मामले में जेल गया था. बाद में पीड़िता ने उसे झांसा देकर यौन शोषण का आरोप लगाया. जिसके बाद अदालत ने उसे पॉक्सो एक्ट में उम्रकैद की सजा दी.