युवाओं के हाथ में किताब की जगह ठगी का मोबाइल? देवघर से सामने आई चिंताजनक तस्वीर

Deoghar:  जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है. 2025 में करीब 900 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद 2026 में अब तक करीब 350 से 400 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है. सारठ, करौं और आसपास के कई ग्रामीण इलाकों में साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है.
 

Deoghar:  झारखंड के देवघर जिले में साइबर अपराध पुलिस के लिए लगातार बड़ी चुनौती बना हुआ है। मोबाइल और इंटरनेट के जरिए लोगों को अलग-अलग तरीकों से झांसे में लेकर बैंक खातों से पैसे उड़ाने वाले गिरोह ग्रामीण इलाकों तक अपनी पहुंच बना चुके हैं। पुलिस की लगातार कार्रवाई और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों के बावजूद साइबर अपराध की घटनाओं पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी है।

पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई अब केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। अपराध से अर्जित रकम और उससे बनाई गई संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की दिशा में भी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही पुलिस ऐसे नेटवर्क के पीछे सक्रिय बड़े आरोपियों और कथित किंगपिन तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

ग्रामीण इलाकों तक फैला साइबर अपराध का नेटवर्क

देवघर जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर अपराध से जुड़े मामलों में पुलिस पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। सारठ के कपसा और पिंडारी, करौं के नगदारी और पत्थरोल के पासेया जैसे इलाकों से पुलिस ने कई संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

पुलिस के अनुसार, इन इलाकों में साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। संवेदनशील गांवों में तकनीकी निगरानी बढ़ाने के साथ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

2025 में करीब 900, 2026 में अब तक 400 के करीब गिरफ्तारी

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में देवघर पुलिस ने करीब 900 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया था। वहीं 2026 में अब तक करीब 350 से 400 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।

इससे पहले 2023-24 के दौरान भी बड़ी संख्या में साइबर अपराध से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके बावजूद लगातार सामने आ रहे मामलों ने पुलिस और प्रशासन के सामने चुनौती बनाए रखी है।

पुलिस और जानकारों के अनुसार, बेरोजगारी, साइबर अपराध को लेकर जागरूकता की कमी और कम समय में अधिक पैसा कमाने का लालच युवाओं के इस तरह के अपराध में शामिल होने के पीछे प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं।

मोबाइल और इंटरनेट बने ठगी का जरिया

साइबर अपराधी लोगों को अलग-अलग बहानों से मैसेज, फोन कॉल या लिंक भेजकर अपने जाल में फंसाते हैं। कई मामलों में पीड़ित को लिंक पर क्लिक करने, ओटीपी साझा करने या बैंकिंग से जुड़ी जानकारी देने के लिए उकसाया जाता है। इसके बाद खाते से रकम निकाल ली जाती है।

डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ मोबाइल फोन और इंटरनेट साइबर ठगों के लिए अपराध का प्रमुख माध्यम बन गए हैं। पुलिस लगातार लोगों से अपील कर रही है कि वे किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और बैंकिंग या ओटीपी से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

अपराध से अर्जित संपत्ति पर भी पुलिस की नजर

सरकारी वकील अशोक राय के अनुसार, साइबर अपराध से अर्जित रकम और संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। उनका कहना है कि पहले अपराध से कमाई गई संपत्ति पर कार्रवाई सीमित रहने के कारण कुछ युवाओं में गलत तरीके से पैसा कमाने का आकर्षण बढ़ सकता था।

अब पुलिस अपराध से अर्जित रकम और उससे खरीदी गई संपत्तियों को चिह्नित कर जब्ती की दिशा में कार्रवाई कर रही है। उनका यह भी कहना है कि साइबर अपराध के मामलों में केवल छोटे स्तर के आरोपियों तक जांच सीमित रखने के बजाय बड़े नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच जरूरी है।

कई मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान उनके परिजनों या स्थानीय लोगों की ओर से विरोध की स्थिति भी सामने आती है। पुलिस ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर रही है।

बड़े नेटवर्क और किंगपिन तक पहुंचने की कोशिश

वर्तमान एसपी प्रवीण पुष्कर के नेतृत्व में देवघर पुलिस साइबर अपराध के पीछे सक्रिय बड़े नेटवर्क की पहचान करने और कथित किंगपिन तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

पुलिस का फोकस अब केवल आरोपियों को पकड़ने पर नहीं, बल्कि यह पता लगाने पर भी है कि साइबर ठगी के लिए कौन-कौन से लोग आपस में जुड़े हैं, पैसे का लेनदेन किस माध्यम से होता है और अपराध से अर्जित रकम का इस्तेमाल कहां किया जाता है।

संवेदनशील गांवों में बढ़ाई गई तकनीकी निगरानी

देवघर एसडीपीओ कुलदीप कुमार के अनुसार, जिन गांवों और इलाकों में साइबर अपराध से जुड़े मामलों की संख्या अधिक रही है, वहां तकनीकी निगरानी बढ़ाई गई है।

साइबर डीएसपी के नेतृत्व में लगातार कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तारी के साथ-साथ लोगों को साइबर ठगी के तरीकों और उससे बचाव को लेकर जागरूक भी किया जा रहा है।

परिवार और जागरूकता की भूमिका अहम

पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध पर नियंत्रण के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। परिवार और समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अभिभावकों को युवाओं की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने और संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर समय रहते हस्तक्षेप करने की जरूरत है।

साइबर अपराध की ओर आकर्षित हो रहे युवाओं को समय रहते सही दिशा देने के लिए काउंसलिंग और जागरूकता भी जरूरी है। पुलिस का मानना है कि साइबर ठगी से मिलने वाला पैसा भले ही कुछ समय के लिए आसान कमाई जैसा दिखाई दे, लेकिन इसके कानूनी और सामाजिक परिणाम आरोपी के साथ-साथ उसके परिवार के लिए भी गंभीर हो सकते हैं।

पुलिस की अपील

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, PIN, CVV, बैंक पासवर्ड या अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा न करें। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी तरह की ऑनलाइन ठगी होने पर तुरंत संबंधित बैंक तथा साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

देवघर पुलिस की बढ़ती कार्रवाई के बीच अब निगाह इस बात पर है कि जांच एजेंसियां साइबर ठगी के छोटे आरोपियों से आगे बढ़कर इस नेटवर्क से जुड़े बड़े संचालकों और कथित किंगपिन तक कब पहुंच पाती हैं।