सट्टा खिलाने वाले इंटरनेशनल गैंग का पर्दाफाश, दुबई में बैठा है किंगपिन, करोड़ों के ट्रांजेक्शन का खुलासा

Jharkhand Desk: पूरे नेटवर्क का संचालन छत्तीसगढ़ के भिलाई से हो रहा था. खेलोयार साइट से बेटिंग करवाई जा रही थी, जिसका नेटवर्क भारत के अलावा कई देशों में फैला हुआ है. इस नेटवर्क का एक फ्रेंचाइजी झारखंड के पलामू में पकड़ा गया है. इस फ्रेंचाइजी का नंबर 141 है.
 

Jharkhand Desk: छत्तीसगढ़ के महादेव बेटिंग एप की तरह एक नया बेटिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ है. यह नेटवर्क सैकड़ों करोड़ का ट्रांजेक्शन कर रहा है. झारखंड के पलामू में इस नेटवर्क का खुलासा हुआ है और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

पूरे नेटवर्क का संचालन छत्तीसगढ़ के भिलाई से हो रहा था. खेलोयार साइट से बेटिंग करवाई जा रही थी, जिसका नेटवर्क भारत के अलावा कई देशों में फैला हुआ है. इस नेटवर्क का एक फ्रेंचाइजी झारखंड के पलामू में पकड़ा गया है. इस फ्रेंचाइजी का नंबर 141 है. पलामू में पकड़ा गया फ्रेंचाइजी से प्रतिदिन पांच से सात लाख का ट्रांजेक्शन करता था. पांच से छह हजार सदस्य इससे जुड़े हुए थे.

दूसरे फ्रेंचाइजी 50 से 60 लाख का ट्रांजेक्शन करते हैं. खेलोयार साइट का संचालन दुबई से हो रहा है, जबकि इसका मास्टरमाइंड बिहार के औरंगाबाद एवं छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है. बेटिंग एप साइट के सभी सर्वर दुबई में हैं, पूरा नेटवर्क का करीब 40 हजार करोड़ का कारोबार है. यह नेटवर्क क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल करता है.

दरअसल पलामू के हुसैनाबाद में पुलिस को संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिली थी. इसी सूचना के आलोक के हुसैनाबाद अनुमंडल कार्यालय के पीछे पुलिस ने छापेमारी की थी और मौके से सात युवकों को संदिग्ध हालत में पकड़ा गया था. सभी से पूछताछ में पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ है. नेटवर्क के माध्यम से महादेव एप की तरह खेलोयार साइट की जानकारी मिली, जो ऑनलाइन बेटिंग करवा रहा है. इस बेटिंग एप के माध्यम से हजारों लोग जुड़े हैं करोड़ो का ट्रांजेक्शन कर रहा है.

नेटवर्क पकड़े जाने के बाद पुलिस ने छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले राहुल सिंह, बिहार के मदनपुर के रहने वाले सुजीत कुमार विश्वकर्मा, अजित कुमार विश्वकर्मा, रोहित कुमार सिंह, झारखंड के बोकारो के जागेश्वर बिहार के रहने वाले जुबेर अंसारी, पतरातू के रहने वाले अयाज आलम, रांची के तमाड़ के रहने वाले अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया है. बेटिंग का मास्टरमाइंड मदनपुर का राजन कुमार सिंह और छत्तीसगढ़ के भिलाई का शेल्वी उर्फ मनीष है.

हजारीबाग से पुलिस को मिला था अहम सुराग, म्युल अकाउंट खुलवा रहे थे संदिग्ध

दरअसल हजारीबाग पुलिस को जानकारी मिली थी कि कुछ संदिग्ध म्युल अकाउंट खुलवाने वाले हैं. हजारीबाग पुलिस ने पूरी जानकारी पलामू पुलिस के साथ साझा की थी. इसके बाद अन्य संदिग्ध को पकड़ा गया था. दरअसल यह नेटवर्क ट्रांजेक्शन के म्युल अकाउंट का इस्तेमाल करता है, जबकि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल होता है.

ऑनलाइन बेटिंग गेमिंग के मामले में कार्रवाई हुई है और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस को कई जानकारी मिली है जिसके बाद का आगे की कार्रवाई भी की जा रही है. बेटिंग एप का सर्वर दुबई में ही है. पलामू में खड़ा किया गया नेटवर्क सिर्फ खेलो यार साइट की फ्रेंचआईजी है. पलामू के हुसैनाबाद के इलाके में किराए के घर में सभी आरोपी ऑनलाइन बेटिंग करवाते थे. गिरोह का मास्टरमाइंड बिहार के औरंगाबाद एवं छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है.:- रीष्मा रमेशन, एसपी, पलामू

प्रमोटर फ्रेंचाइजी को देता है 30 प्रतिशत कमीशन, कई तरह का होता है वेरिफिकेशन

दुबई में बैठा प्रमोटर फ्रेंचाइजी को ट्रांजेक्शन का 30 प्रतिशत कमीशन देता है. पलामू में पकड़ा गया फ्रेंचाइजी का नंबर 141 है. ट्रांनेक्शन का 70 प्रतिशत हिस्सा प्रमोटर रखता है, जबकि ट्रांजेक्शन के लिए कई स्तर की प्रक्रिया अपनाई जाती है. फ्रेंचाइजी को चलाने के लिए 10 से 15 म्युल बैंक खातों का इस्तेमाल होता है.

फ्रेंचाइजी में शामिल सदस्य कई तरह के वेरिफिकेशन करने के बाद एक दूसरे से ट्रांजेक्शन करते हैं. ट्रांजेक्शन के लिए जिन म्युल खातों का इस्तेमाल किया जाता है, वह पांच से छह हजार महीने पर भाड़े पर लिया जाता है. एक महीने तक एक बैंक खाता का इस्तेमाल किया जाता है, बाद में वह वास्तविक खाताधारक को वापस कर दिया जाता है.

बेटिंग गेम का एक बड़ा नेटवर्क पकड़ा गया है. यह एक छतरी की तरह है, जिससे कई बेटिंग साइट भी जुड़े हुए हैं. पलामू में पकड़ा गया बेटिंग गेम का प्रमोटर दुबई में है. जबकि ट्रांजेक्शन के लिए क्रिप्टो करेंसी एवं हवाला के जरिए पैसे को दुबई में पहुंचाया जाता है. :- मोहम्मद याकूब, आईपीएस, एसडीपीओ, हुसैनाबाद

पहले ली थी ट्रेनिंग, फिर खड़ा किया पूरा नेटवर्क

पुलिस की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड सेल्वी उर्फ मनीष और राजन कुमार सिंह पुणे एवं बड़े शहरों में अन्य बेटिंग एप से जुड़े हुए थे. दोनों ने पहले ट्रेनिंग ली और बाद में खुद से पूरे भारत में एक नेटवर्क खड़ा किया है और दुबई के प्रमोटर के फ्रेंचाइजी को बांटा है. पुलिस दोनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कई इलाकों में छापेमारी कर रही है. दोनों गांव के वैसे ही युवकों का इस्तेमाल करते हैं जो नौकरी के लिए पलायन करने वाले हैं. सभी को समझा बुझाकर फ्रेंचाइजी दी जाती है और उसके बाद बेटिंग एप के माध्यम साइबर फ्रॉड की शुरुआत की जाती है.