भाषा विवाद में उलझा JTET विवाद , सरकार के फैसले पर अभ्यर्थी नाराज़; एक्सपर्ट की राय बंटी

Ranchi:जेटेट परीक्षा के भाषा विवाद की वजह से परीक्षा न टल जाए, इसलिए परीक्षा कराने का फैसला लिया गया और भाषा विवाद पर कमेटी बनाई गई है. उन्होंने कहा कि जब कैबिनेट की बैठक में किसी बिंदु पर मतांतर हो तो संवेदनशील मुख्यमंत्री ने कमेटी बनाकर बेहतरीन फैसला लिया है. मनोज पांडेय ने कहा कि छात्रों से ज्यादा राजनीतिक दल इस मुद्दे को उठा रहे हैं. उस षड्यंत्र में इंडिया ब्लॉक के दलों और राज्य की जनता को नहीं फंसना है.
 

Ranchi: जेटेट (झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा) में भाषा को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब इस मुद्दे पर यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यह विवाद सरकार की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. भाषा विवाद के समाधान के लिए सरकार द्वारा कमेटी गठन की घोषणा के बाद राजनीतिक दलों और शिक्षा विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर जेटेट को उलझाकर युवाओं का ध्यान मूल मुद्दों- नियुक्ति, आरक्षण और समयबद्ध परीक्षा से भटका रही है. उनका कहना है कि कमेटी बनाना केवल मामले को टालने का तरीका है, न कि ठोस समाधान.

वहीं, शिक्षा विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है. कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि झारखंड जैसे बहुभाषी राज्य में भाषा नीति को लेकर व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है, ऐसे में कमेटी बनाना एक सकारात्मक कदम हो सकता है. जबकि अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि पहले से तय नियमों में बार-बार बदलाव छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है.

इस बीच जेटेट अभ्यर्थियों में असमंजस और नाराज़गी बनी हुई है. अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द स्पष्ट निर्णय लेकर परीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए, ताकि उनका भविष्य अधर में न लटके.