झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर भाषा नीति पर खड़े किए सवाल...

Ranchi: इसे युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए बताया कि भाषा आधारित नियमावली से प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है और अब भाषा विवाद के कारण युवाओं के भविष्य पर और संकट मंडरा रहा है.
 

Ranchi: झारखंड में भाषा विवाद एक बार फिर सियासी मुद्दा बनता दिख रहा है. झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को खुला पत्र लिखकर राज्य सरकार की भाषा नीति पर सवाल खड़े किए हैं.

भाषा के आधार पर भेदभाव क्यों?

आदित्य साहू ने अपने पत्र में कहा है कि झारखंड विविध भाषाओं और संस्कृतियों वाला राज्य है, जहां अलग-अलग बोलियां और भाषाएं वर्षों से सह-अस्तित्व में रही हैं. ऐसे में किसी भी स्तर पर भाषा के आधार पर भेदभाव करना राज्य की सामाजिक समरसता के लिए उचित नहीं है.

भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका को मिले मान्यता

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सीमावर्ती इलाकों में भाषा को लेकर दोहरा मापदंड अपना रही है. उनके अनुसार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से सटे जिलों में उड़िया और बांग्ला को क्षेत्रीय भाषा का दर्जा दिया जा रहा है, लेकिन बिहार की सीमा से जुड़े जिलों में प्रचलित भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका जैसी भाषाओं को वही मान्यता नहीं मिल रही है.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने इसे युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए बताया कि भाषा आधारित नियमावली से प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है और अब भाषा विवाद के कारण युवाओं के भविष्य पर और संकट मंडरा रहा है.

अपने पत्र में आदित्य साहू ने सरकार से मांग की है कि जेटेट नियमावली की गहन समीक्षा की जाए और सभी जिलों की स्थानीय भाषाओं को समान रूप से शामिल किया जाए, ताकि किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो.