झारखंड के वित्त मंत्री ने केंद्र के सामने रखीं तीन बड़ी मांगें, बोले- मजबूत राज्यों के बिना विकसित भारत का लक्ष्य अधूरा

 

 

 

Jharkhand: वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए राज्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना जरूरी है। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान केंद्र सरकार के सामने राज्य के आर्थिक हितों से जुड़े कई मुद्दे उठाए।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से 18 और 19 सितंबर को ‘विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण’ विषय पर सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें राज्यों की वित्तीय जरूरतों, विकास के लिए संसाधन जुटाने और केंद्र-राज्य के बीच वित्तीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

खनन से जुड़े राजस्व को लेकर केंद्र से मांग

राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने राज्यों को खनन पर सेस लगाने का अधिकार फिर से देने, जीएसटी से होने वाली क्षति की भरपाई और जी-राम-जी योजना में केंद्र एवं राज्य के बीच 90:10 के वित्तीय अनुपात को बहाल करने की मांग की।

वित्त मंत्री के मुताबिक, खनिज संसाधनों से संपन्न झारखंड को खनन क्षेत्र से जुड़े नीतिगत और कर संबंधी बदलावों के कारण करीब 20 हजार से 22 हजार करोड़ रुपये तक की संभावित आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि खनिज क्षेत्र में हुए बदलावों का सीधा असर राज्य के राजस्व पर पड़ा है।

सिर्फ GDP बढ़ने से नहीं बनेगा विकसित भारत

वित्त मंत्री ने विकास की परिभाषा को केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2047 के विकसित भारत का आकलन सिर्फ GDP, प्रति व्यक्ति आय या उत्पादन में बढ़ोतरी के आधार पर नहीं होना चाहिए।

उनके मुताबिक, देश के विकास में यह भी देखा जाना चाहिए कि समाज के अलग-अलग वर्गों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में कितना सुधार आया है। उन्होंने आय की असमानता को चुनौती बताते हुए कहा कि विकास का लाभ समाज के सभी हिस्सों तक पहुंचना जरूरी है।

गांव, खेती और बुनियादी सुविधाओं पर निवेश बढ़ाने की जरूरत

राधाकृष्ण किशोर ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी गांवों में रहती है और कृषि का बड़ा हिस्सा अभी भी मानसून पर निर्भर है। ऐसे में सिंचाई व्यवस्था के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा को भी विकास की बुनियाद बताते हुए इन क्षेत्रों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की बात कही। उनका कहना था कि ग्रामीण इलाकों और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किए बिना विकसित भारत का लक्ष्य पूरी तरह हासिल करना मुश्किल होगा।

झारखंड की वित्तीय स्थिति का भी किया उल्लेख

सम्मेलन के दौरान झारखंड की वित्तीय स्थिति का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने राज्य की कुछ उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने कहा कि झारखंड नीति आयोग की ‘अचीवर’ श्रेणी में शामिल है। राज्य का राजस्व संग्रह मजबूत बना हुआ है, राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखा गया है और पूंजीगत व्यय भी ऊंचे स्तर पर है।

उन्होंने कहा कि देश को विकसित बनाने के लिए राज्यों को आर्थिक रूप से सक्षम करना जरूरी है। मजबूत वित्तीय स्थिति वाले राज्य ही विकास की गति को आगे बढ़ाने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

सम्मेलन में झारखंड के वित्त सचिव प्रशांत कुमार, अपर सचिव कर्ण सत्यार्थी, संयुक्त सचिव चंद्रभूषण प्रसाद, मंत्री के आप्त सचिव अनिरबान आईच और नरेंद्र कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।