झारखंड के 291 आदिवासी टोलों तक पहुंचेगा शुद्ध पेयजल, 320 सौर आधारित योजनाओं को सरकार की मंजूरी
Ranchi, Jharkhand News: झारखंड सरकार ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) समुदायों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने 11 जिलों के 291 आदिवासी टोलों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 320 नई सौर ऊर्जा आधारित लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन योजनाओं को प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान (PM-JANMAN) के तहत लागू किया जाएगा।
मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में 15 जून को आयोजित एपेक्स कमेटी की बैठक में इन योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित होने वाली इन परियोजनाओं से राज्य के 4,603 पीवीटीजी परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, इन योजनाओं के क्रियान्वयन पर करीब 20.98 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी बराबर होगी। दोनों सरकारें 10.49-10.49 करोड़ रुपये का योगदान देंगी। हालांकि, इस लागत में संचालन एवं रखरखाव (O&M) खर्च शामिल नहीं है।
सबसे अधिक लाभ मेदिनीनगर जिले को मिलने जा रहा है, जहां 129 योजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा दुमका, गोड्डा और पाकुड़ समेत संताल परगना के कई जिलों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
दरअसल, केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के निर्देश पर वर्ष 2025 में राज्य के कल्याण विभाग और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने संयुक्त रूप से सर्वेक्षण कराया था। जिला प्रशासन की निगरानी में हुए इस सर्वे में उन आदिवासी टोलों की पहचान की गई, जहां अब तक पेयजल सुविधा नहीं पहुंच सकी थी।
सर्वेक्षण में सामने आया कि राज्य के 11 जिलों के 291 पीवीटीजी टोले अब भी सुरक्षित पेयजल से वंचित हैं। इसी आधार पर 320 नई सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति योजनाओं का खाका तैयार किया गया।
चयनित 291 टोलों में से 260 ऐसे हैं, जहां 20 से कम घर हैं। इन इलाकों में 279 सामुदायिक जलापूर्ति योजनाएं स्थापित की जाएंगी। वहीं, 31 ऐसे टोले हैं, जहां 20 से अधिक परिवार निवास करते हैं। इन क्षेत्रों में 41 योजनाएं घर-घर नल कनेक्शन के साथ विकसित की जाएंगी, ताकि प्रत्येक परिवार तक सीधे स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।
सरकार का मानना है कि इस पहल से दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में पेयजल संकट काफी हद तक दूर होगा और जनजातीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।