Jharkhand Politics: ब्यूरोक्रेसी से नाराज मंत्री राधाकृष्ण किशोर! विधायकों से बदसलूकी पर स्पीकर को पत्र

Ranchi: झारखंड सरकार के मंत्री राधाकृष्ण किशोर ब्यूरोक्रेसी के कथित व्यवहार से नाराज हैं. उन्होंने विधायकों के साथ अधिकारियों द्वारा कथित बदसलूकी और सम्मानजनक व्यवहार नहीं किए जाने का मुद्दा उठाते हुए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है. मंत्री ने ऐसे मामलों को विधायकों के विशेषाधिकार हनन के दायरे में लाने की मांग की है.
 

Ranchi:  झारखंड में विधायकों और ब्यूरोक्रेसी के बीच बढ़ती दूरी को लेकर संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कड़ा रुख अपनाया है। विधायकों के साथ अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर किए जाने वाले अपमानजनक और असम्मानजनक व्यवहार को विशेषाधिकार हनन के दायरे में लाने की मांग को लेकर उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो को पत्र लिखा है। मंत्री ने विधानसभा की कार्य संचालन नियमावली में आवश्यक प्रावधान जोड़ने की भी वकालत की है।

अनुच्छेद 194 का दिया हवाला

स्पीकर को भेजे पत्र में राधाकृष्ण किशोर ने संविधान के अनुच्छेद 194 का उल्लेख करते हुए कहा कि विधायकों को सदन के भीतर बिना भय और दबाव के जनहित से जुड़े मुद्दे उठाने का विशेषाधिकार प्राप्त है। ऐसे में यदि कोई अधिकारी जानबूझकर विधायक के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करता है या सरकारी कार्यालय में उनके साथ असम्मानजनक व्यवहार करता है, तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

मंत्री ने ऐसे मामलों को विशेषाधिकार हनन के दायरे में शामिल करने की मांग की है। इसके अलावा सदन या सदन के बाहर विधायकों द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दों को जानबूझकर टालना और प्रोटोकॉल से जुड़े सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करना भी विशेषाधिकार हनन की श्रेणी में लाने का सुझाव दिया गया है।

'डीजीपी को पत्र लिखा, दो महीने बाद भी जवाब नहीं'

राधाकृष्ण किशोर ने ब्यूरोक्रेसी के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विधायकों की लगातार शिकायत रहती है कि अधिकारी उनके उचित सुझावों और जनहित से जुड़े मामलों का संज्ञान नहीं लेते हैं। उन्होंने अपने अनुभव का भी जिक्र किया।

मंत्री के मुताबिक, उन्होंने करीब दो महीने पहले डीजीपी को एक पत्र लिखा था, लेकिन अब तक उसका जवाब नहीं मिला है। उन्होंने इसे उचित नहीं बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों के पत्रों और उनके द्वारा उठाए गए मामलों पर अधिकारियों को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।

अधिकारियों के फोन नहीं उठाने का भी मुद्दा

मंत्री ने कहा कि कई बार विधायकों के फोन तक अधिकारी नहीं उठाते हैं। वहीं, विधायकों की ओर से भेजे गए पत्रों पर भी समय पर कार्रवाई नहीं होती। उनका कहना है कि यह सिर्फ विधायकों के सम्मान से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि जनता के बीच जनप्रतिनिधियों की विश्वसनीयता से भी सीधे जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि विधायक अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारियों से संपर्क करते हैं। यदि अधिकारियों की ओर से उनके फोन या पत्रों का संज्ञान नहीं लिया जाता है, तो इसका असर जनता के बीच विधायकों की छवि और उनकी कार्यक्षमता पर पड़ता है।

नियमावली में प्रावधान जोड़ने की मांग

राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा की कार्य संचालन नियमावली में स्पष्ट प्रावधान जोड़ने की आवश्यकता बताई है। इसके तहत यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी जानबूझकर किसी विधायक के साथ अपमानजनक, अशिष्ट या असम्मानजनक व्यवहार करता है, तो उसके खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई की जा सके।

मंत्री की इस पहल से झारखंड में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच अधिकार, प्रोटोकॉल और जवाबदेही को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। अब इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।