मोरहाबादी मैदान में गूंजा मांदर, आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा झारखंड; CM हेमंत सोरेन ने कहा- ‘हमारी संस्कृति, हमारी पहचान, हमारा गौरव’

Jharkhand Tribal Festival 2026: मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की धरती ने दुनिया को ऐसा जीवन दर्शन दिया है, जहां प्रकृति पूजनीय है, समुदाय सर्वोपरि है और संस्कृति जीवन का अभिन्न हिस्सा है. उन्होंने कहा कि झारखंड आदिवासी महोत्सव केवल समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत का उत्सव नहीं है, बल्कि यह अपने अस्तित्व...
 

Ranchi: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड की राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन किया गया। राज्यपाल की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित महोत्सव के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हुए। इस दौरान पारंपरिक नृत्य, मांदर की थाप और जनजातीय संस्कृति की विभिन्न झलकियों ने पूरे माहौल को जीवंत कर दिया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विश्व आदिवासी दिवस और झारखंड आदिवासी महोत्सव के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई, शुभकामनाएं और ‘जोहार’ कहा।

प्रकृति, समुदाय और संस्कृति का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की धरती ने दुनिया को ऐसा जीवन दर्शन दिया है, जहां प्रकृति पूजनीय है, समुदाय सर्वोपरि है और संस्कृति जीवन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि झारखंड आदिवासी महोत्सव केवल समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत का उत्सव नहीं है, बल्कि यह अपने अस्तित्व, अस्मिता और अधिकारों के प्रति संकल्प को भी मजबूत करने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत झारखंड की पहचान हैं और इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।

‘जल, जंगल, जमीन और पहचान की रक्षा हमारी विरासत’

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में जल, जंगल और जमीन की रक्षा को आदिवासी समाज की ऐतिहासिक विरासत से जोड़ते हुए कहा कि अपनी पहचान और अधिकारों की रक्षा की लड़ाई लंबे समय से चली आ रही है।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना वर्तमान पीढ़ी का संकल्प होना चाहिए। इस दौरान उन्होंने ‘अबुआ दिशुम, अबुआ राज, अबुआ पहचान’ के भाव के साथ झारखंड के बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

भव्य जतरा शोभायात्रा में दिखी जनजातीय संस्कृति

विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आयोजित झारखंड आदिवासी महोत्सव की भव्य जतरा शोभायात्रा में भी मुख्यमंत्री शामिल हुए। शोभायात्रा के दौरान विभिन्न जनजातीय समुदायों की पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

मांदर की थाप और पारंपरिक नृत्य की लय से मोरहाबादी मैदान का माहौल पूरी तरह उत्सवमय नजर आया। कार्यक्रम में झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और विविध जनजातीय विरासत की झलक देखने को मिली।

‘हमारी संस्कृति, हमारी पहचान, हमारा गौरव’

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। यह आदिवासी समाज की अस्मिता, स्वाभिमान और गौरव से जुड़ा हुआ महोत्सव है।

उन्होंने कहा कि झारखंड की संस्कृति और पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ इसकी समृद्ध विरासत को संरक्षित करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि “हमारी संस्कृति, हमारी पहचान, हमारा गौरव” है।

महोत्सव के दौरान झारखंड के वीर शहीदों को भी नमन किया गया। मुख्यमंत्री ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि राज्य की पहचान और अधिकारों की रक्षा के संघर्ष में वीर शहीदों का योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा।

सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर

झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 के माध्यम से राज्य की जनजातीय कला, परंपरा, संगीत, नृत्य और जीवनशैली को व्यापक मंच मिला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही।

महोत्सव ने एक बार फिर झारखंड की विविध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक जीवन दर्शन और पारंपरिक विरासत को सामने रखा। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आयोजित यह कार्यक्रम सांस्कृतिक पहचान और विरासत के संरक्षण के संदेश के साथ संपन्न हुआ।