झारखंड की कला प्रतिभाओं का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान, तीन कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया

Ranchi: झारखंड के लिए गौरव की खबर है. राज्य के तीन कलाकारों सुशांत कुमार महापात्र, बुटन देवी और सोमवारी देवी को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान मिला है. तीनों कलाकारों को मिले इस सम्मान से झारखंड के कला जगत में खुशी का माहौल है.
 
 

Ranchi: नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार समारोह में झारखंड के तीन कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरायकेला के छऊ मुखौटा शिल्पकार गुरु सुशांत कुमार महापात्र तथा रांची के बुंडू की सगी बहनों बुटन देवी और सोमवारी देवी को अपने हाथों पुरस्कार प्रदान किया।

यह सम्मान झारखंड की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

सुशांत कुमार महापात्र को छऊ और मुखौटा शिल्प के लिए सम्मान

सरायकेला के प्रसिद्ध छऊ मुखौटा शिल्पकार गुरु सुशांत कुमार महापात्र को छऊ और पारंपरिक मुखौटा शिल्प के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

पुरस्कार प्राप्त करने के बाद गुरु सुशांत कुमार महापात्र ने यह सम्मान अपने गुरुओं को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि सरायकेला की छऊ मुखौटा कला को आगे बढ़ाना उनके जीवन का उद्देश्य है।

उन्होंने कहा कि वह आगे भी छऊ मुखौटा शिल्प और छऊ नृत्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए काम करते रहेंगे।

बुटन देवी और सोमवारी देवी को नचनी परंपरा के संरक्षण के लिए सम्मान

रांची जिले के बुंडू की सगी बहनों बुटन देवी और सोमवारी देवी को पारंपरिक नचनी नृत्य परंपरा को जीवित रखने और आगे बढ़ाने के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

दोनों बहनों ने लंबे समय से पारंपरिक नचनी नृत्य की कला को संरक्षित करने में योगदान दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर मिले इस सम्मान से झारखंड की लोक एवं पारंपरिक कला को नई पहचान मिली है।

2024 और 2025 के लिए 115 कलाकार सम्मानित

संगीत नाटक अकादमी की ओर से वर्ष 2024 और 2025 के लिए विशेष अलंकरण समारोह आयोजित किया गया। इसमें देशभर के कुल 115 कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप एवं पुरस्कार प्रदान किए गए।

समारोह में विभिन्न कला विधाओं से जुड़े कलाकारों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। झारखंड के तीन कलाकारों का चयन राज्य की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए विशेष उपलब्धि है।

कई गणमान्य अतिथि रहे मौजूद

विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में कई केंद्रीय मंत्री, कला एवं संस्कृति क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोग और संगीत नाटक अकादमी के पदाधिकारी मौजूद रहे।

समारोह में संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा और सचिव राजू दास समेत कई प्रमुख अतिथियों ने हिस्सा लिया।

झारखंड की लोक कला को मिली राष्ट्रीय पहचान

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार में झारखंड के तीन कलाकारों का सम्मान राज्य की समृद्ध लोक एवं पारंपरिक कला के लिए गौरव का विषय है। सरायकेला छऊ के मुखौटा शिल्प से लेकर बुंडू की नचनी नृत्य परंपरा तक, इन कलाकारों ने अपनी कला को पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलने से न केवल तीनों कलाकारों का गौरव बढ़ा है, बल्कि झारखंड की पारंपरिक कला-संस्कृति को भी राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिली है।