JPSC-JSSC Exams: छात्र आंदोलन के बाद अधर में डेढ़ दर्जन से ज्यादा भर्ती परीक्षाएं, हजारों अभ्यर्थियों को नियुक्ति का इंतजार
Bihar news: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब उन अभ्यर्थियों के लिए बड़ी चिंता बन गया है, जिन्होंने सरकारी नौकरी की उम्मीद में वर्षों तक तैयारी की। राज्य सरकार की ओर से कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने और मामलों की CID जांच शुरू होने के बाद JPSC और JSSC की करीब डेढ़ दर्जन परीक्षाओं का भविष्य फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि जांच कब पूरी होगी और नियुक्ति की प्रक्रिया दोबारा कब शुरू की जाएगी। कई परीक्षाएं ऐसी हैं जिनकी प्रारंभिक परीक्षा हो चुकी है, जबकि कुछ में मुख्य परीक्षा तक आयोजित हो चुकी है। इसके बावजूद आगे की प्रक्रिया पर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है।
कुछ परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से राहत
राज्य सरकार की ओर से रद्द की गई 22 नियुक्ति परीक्षाओं में कुछ मामलों में अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है। इनमें JPSC सिविल सेवा की 11वीं से 13वीं परीक्षा, फूड सेफ्टी ऑफिसर, CDPO भर्ती और CGL नियुक्ति परीक्षा शामिल हैं।
हालांकि, इन मामलों में भी जांच की प्रक्रिया जारी है। दूसरी ओर, जिन परीक्षाओं पर अभी कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है, उनके अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं।
करीब 15 हजार नौकरियों से जुड़ा मामला
रद्द की गई प्रतियोगिता परीक्षाओं के जरिए करीब 15 हजार पदों पर सरकारी नियुक्ति का अवसर सामने आया था। ऐसे में परीक्षा रद्द होने और जांच लंबी खिंचने का असर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है।
छात्र अमृत मुंडा का कहना है कि सरकार को जांच जल्द पूरी कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। उनके मुताबिक, सरकारी नौकरी के लिए लंबे समय से तैयारी कर रहे छात्रों का समय और मेहनत दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
डीएसएमयू छात्र संघ के उपाध्यक्ष बादल भोक्ता ने कहा कि छात्र आंदोलन के दौरान राजनीतिक हस्तक्षेप से मामला और जटिल हुआ। उनका कहना है कि सरकार ने कुछ कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन अब जांच को जल्द पूरा करना जरूरी है, ताकि अभ्यर्थियों को राहत मिल सके।
किन परीक्षाओं पर पड़ा असर?
रद्द या प्रभावित नियुक्ति प्रक्रियाओं में JPSC की कई महत्वपूर्ण भर्तियां शामिल हैं। इनमें विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक अधिकारियों की भर्ती, सहायक वन संरक्षक, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, ड्रग इंस्पेक्टर, सहायक निदेशक/वरीय वैज्ञानिक अधिकारी, APP, सिविल सेवा परीक्षा और विभिन्न सरकारी इंजीनियरिंग व पॉलिटेक्निक कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर एवं व्याख्याता पदों की नियुक्तियां शामिल हैं।
इसके अलावा सिविल जज जूनियर डिवीजन, झारखंड पात्रता परीक्षा, छठी लिमिटेड उपसमाहर्ता परीक्षा और सिविल सेवा की बैकलॉग भर्तियां भी इस पूरे विवाद से प्रभावित हुई हैं।
आदिवासी छात्र संघ ने भी सरकार से की जल्द कार्रवाई की मांग
इधर, आदिवासी छात्र संघ ने सरकार से जल्द नियोजन नीति तैयार करने और लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को गति देने की मांग की है। संघ के केंद्रीय प्रवक्ता सुशील कुमार का कहना है कि CID जांच को जल्द से जल्द पूरा कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि JPSC, JSSC और CGL से जुड़े मामलों में सरकार ने छात्रों की मांगों के आधार पर कई फैसले लिए हैं। अब जांच में सहयोग करते हुए प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाना जरूरी है। उनके मुताबिक, भर्ती परीक्षाओं में लगातार विवाद से झारखंड की छवि भी प्रभावित हो रही है।
JPSC में नहीं हो रहे नीतिगत फैसले
छात्र आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद के बीच JPSC के चेयरमैन समेत सभी सदस्यों के इस्तीफे के बाद आयोग की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हुई है। करीब एक महीने से आयोग के निष्क्रिय रहने के कारण नीतिगत स्तर पर महत्वपूर्ण फैसले नहीं हो पा रहे हैं।
वहीं, JSSC भी CGL परीक्षा से जुड़े विवाद और जांच के कारण दबाव में है। ऐसे में निकट भविष्य में नई परीक्षाओं के आयोजन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
लाखों अभ्यर्थियों की निगाह सरकार के अगले कदम पर
पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि CID जांच कितने समय में पूरी होती है और सरकार लंबित परीक्षाओं को लेकर क्या फैसला करती है। जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी है, उनके लिए यह सिर्फ एक भर्ती प्रक्रिया का मामला नहीं बल्कि वर्षों की तैयारी और भविष्य का सवाल है।
अगर जांच जल्द पूरी नहीं हुई तो लंबित परीक्षाओं और नियुक्तियों का इंतजार और लंबा हो सकता है। ऐसे में छात्रों की नजर अब सरकार और भर्ती आयोगों के अगले कदम पर टिकी है।