JPSC-JSSC Scam का बड़ा खुलासा! अंतरराज्यीय गिरोह के संकेत, उत्पाद सिपाही मास्टरमाइंड का कनेक्शन?

Ranchi: JPSC-JSSC फर्जीवाड़े की जांच में अंतरराज्यीय गिरोह के संकेत सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है. जांच एजेंसियों को कथित तौर पर ऐसे कनेक्शन मिले हैं, जिनमें उत्पाद सिपाही धांधली के मास्टरमाइंड की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है. पूरे नेटवर्क, आरोपियों की भूमिका और संभावित कनेक्शन को लेकर जांच जारी है.
 

Ranchi: झारखंड में JPSC-JSSC नियुक्ति फर्जीवाड़े की जांच कर रही CID को पूछताछ के दौरान अहम जानकारी मिली है। आरोपी मो. एबाद के बयान में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा धांधली मामले के कथित मास्टरमाइंड अतुल वत्स का नाम सामने आया है। इसके बाद CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि अतुल वत्स का कनेक्शन JPSC की अन्य परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों से भी है या नहीं।

16 लोगों के सिंडिकेट का दावा

पूछताछ में मो. एबाद ने कथित तौर पर बताया कि JPSC परीक्षा में OMR शीट की सेटिंग कराने में अतुल वत्स और मिथिलेश सिंह ने मदद की थी। उसके अनुसार इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए करीब 16 लोगों का सिंडिकेट काम कर रहा था।

CID अब आरोपी के बयान में सामने आए नामों और उनकी कथित भूमिकाओं का सत्यापन कर रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क का दायरा केवल झारखंड तक सीमित था या दूसरे राज्यों की भर्ती परीक्षाओं तक भी फैला हुआ था।

उत्पाद सिपाही परीक्षा धांधली में गिरफ्तार हो चुका है अतुल वत्स

अतुल वत्स को पुलिस ने 12 अप्रैल 2026 को झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित धांधली के मामले में 164 अन्य लोगों के साथ तमाड़ थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उस समय अतुल वत्स को कथित गिरोह का सरगना बताया था।

हालांकि, उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा मामले में पुलिस की ओर से अब तक सीधे तौर पर पेपर लीक की बात नहीं कही गई है। मामले को सॉल्वर गिरोह के जरिए अभ्यर्थियों से ठगी से जोड़कर जांच की गई है।

कई भर्ती परीक्षाओं से जुड़े होने का आरोप

जांच में अतुल वत्स के नाम को राजस्थान क्लर्क भर्ती परीक्षा 2017, NEET पेपर लीक 2024, बिहार CHO भर्ती 2024, यूपी RO/ARO प्रारंभिक परीक्षा 2024 और यूपी सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी जैसे मामलों से भी जोड़ा गया है।

हालांकि, इन मामलों में किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

मो. एबाद ने पूछताछ में बताए कई नाम

मो. एबाद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रोनाही का रहने वाला बताया गया है। गिरफ्तारी से पहले वह TDPL कंपनी में काम करता था। पूछताछ के दौरान उसने JPSC परीक्षा में OMR और OSM शीट में कथित छेड़छाड़ की जानकारी दी है।

एबाद के कथित बयान के मुताबिक इस नेटवर्क में रामबीर सिंह, अरविंद कुमार, राजेश सिंह, आदित्य पांडेय, सुनील कुमार, संतोष सिंह, ब्रजेश कुमार, अली, इमरान, अजय संग्राम सिंह, प्रमोद पाठक, कृष्णा यादव और मो. उस्मान समेत अन्य लोग शामिल थे।

इन सभी नामों और उनकी कथित भूमिकाओं की जांच CID द्वारा की जा रही है। केवल पूछताछ में नाम सामने आना किसी व्यक्ति के अपराध में शामिल होने का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

अभय तिवारी के बयान में भी आया था मिथिलेश सिंह का नाम

JPSC घोटाले की जांच में मिथिलेश सिंह का नाम पहले भी सामने आ चुका है। बताया गया है कि JPSC मामले के कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी के बयान में मिथिलेश सिंह का उल्लेख किया गया था।

अब मो. एबाद के बयान में अतुल वत्स और मिथिलेश सिंह का नाम सामने आने के बाद जांच एजेंसी इन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

दूसरे राज्यों तक नेटवर्क फैलने का शक

CID को आशंका है कि कथित सिंडिकेट केवल झारखंड की नियुक्ति परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहा होगा। जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या यही नेटवर्क दूसरे राज्यों में आयोजित भर्ती परीक्षाओं में भी अभ्यर्थियों को प्रभावित करने, OMR/OSM शीट में छेड़छाड़ या सॉल्वर उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियों में शामिल था।

फिलहाल CID आरोपियों के बयानों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का मिलान कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और आरोपियों की भूमिका की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।