एनकाउंटर और डर के साये में जी रहे हैं नक्सली, कभी होता था यहां इन नक्सलियों का राज, आज रनिंग कैंप में जी रहे...
Ranchi: 22 जनवरी 2026 को झारखंड के सारंडा जंगल में नक्सल इतिहास का सबसे बड़ा एनकाउंटर हुआ. इस एनकाउंटर में एक साथ 17 नक्सली मारे गए...
Jan 28, 2026, 13:24 IST
Ranch: एक समय था जब जंगलों में नक्सलियों का राज चलता था. उनके कैंप सालों-साल स्थायी रहते थे, जहां जन अदालत तक लगती थी. लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. जंगलों में भगदड़ मची हुई है और कभी खुद को जंगल का राजा समझने वाले नक्सली अब रनिंग कैंप में शिफ्ट हो गए हैं.
22 जनवरी 2026 को झारखंड के सारंडा जंगल में नक्सल इतिहास का सबसे बड़ा एनकाउंटर हुआ. इस एनकाउंटर में एक साथ 17 नक्सली मारे गए. मारे गए नक्सलियों में एक करोड़ रुपये का इनामी अनल उर्फ पतिराम मांझी (अनल दा) भी शामिल था.
नक्सलियों के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सारंडा जंगल में हुए इस एनकाउंटर के बाद जंगल में भगदड़ की स्थिति बन गई है. पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सारंडा में अभी भी 50 से 55 नक्सली सक्रिय हैं, जिनमें दो पर एक-एक करोड़ रुपये का इनाम है.
आईजी अभियान ने बताया कि बचे हुए नक्सली अब सुरक्षाबलों के रडार में आने से बचने के लिए रनिंग कैंप में शिफ्ट हो गए हैं. वे अब बीहड़ों में कैंप तो लगा रहे हैं, लेकिन कैंप केवल रात भर ही टिक पाता है.
सुबह होते ही नक्सली अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर दूसरे ठिकाने की ओर बढ़ जाते हैं, ताकि किसी तरह सुरक्षाबलों की नजर से बच सकें. इसके लिए उन्होंने रनिंग कैंप की व्यवस्था अपनाई है, जिसमें वे अपना सारा सामान साथ लेकर घूमते हैं और हर दिन ठिकाना बदलने को मजबूर हो गए हैं.
नक्सल जानकारों के अनुसार, भाकपा (माओवादी) अपने उद्भव काल से ही गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाते आए हैं. गुरिल्ला युद्ध में विषम परिस्थितियों में रनिंग कैंप चलाना बेहद मुश्किल होता है.
इस स्थिति में नक्सली किसी पर भी भरोसा नहीं करते न ग्रामीणों पर और न ही अपने मुखबिरों पर. संगठन का मुखिया ही तय करता है कि कब और कहां कैंप लगेगा. कैडरों को भी अगले दिन ठहरने की जगह का पता नहीं होता.
वर्तमान में भले ही नक्सली सारंडा में रनिंग कैंप में शिफ्ट हो गए हों, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब वे बहुत मजबूत थे. सारंडा में नक्सलियों ने न सिर्फ स्थायी कैंप बनाए थे, बल्कि अंडरग्राउंड बंकर भी तैयार किए थे. घने जंगलों और बीहड़ों को नक्सलियों का सबसे सुरक्षित इलाका क्यों कहा जाता था, यह बात अब खुलकर सामने आ रही है.
जैसे-जैसे सुरक्षाबल जंगल के अंदर घुस रहे हैं, नक्सलियों द्वारा बनाई गई संरचनाओं को देखकर सभी हैरान हैं. नक्सलियों ने युद्ध जैसी रणनीति के तहत जंगल में मजबूत संरचनाएं तैयार की थीं, जिनके बल पर उन्होंने दशकों तक आतंक मचाया रहा.
झारखंड के सारंडा जंगल में नक्सलियों ने बड़े पैमाने पर बंकर बनाए रखे थे. इन बंकरों को देखकर ऐसा लगता है मानो आप किसी अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर क्षेत्र में पहुंच गए हों, जहां दो देशों के बीच युद्ध की तैयारियां की गई हों. लेकिन यह बॉर्डर नहीं, बल्कि देश के अंदर सुरक्षाबलों से लड़ाई लड़ रहे नक्सलियों के जंगली ठिकानों का हाल है.
नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने और खुद को सुरक्षित रखने की पूरी रणनीति जंगलों में तैयार कर रखी थी. जैसे-जैसे सुरक्षाबल जंगलों के अंदर गहराई तक प्रवेश कर रहे हैं, नक्सलियों की रहस्यमयी दुनिया बाहर आ रही है.