JSSC परीक्षा घोटाले में नया खुलासा, जेल जा चुका आरोपी कैसे पहुंचा परीक्षा सिस्टम तक?

Ranchi: JSSC भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही CID को अरुण कुमार को लेकर अहम जानकारी मिली है. रिपोर्ट के अनुसार, अरुण कुमार बिहार सिपाही भर्ती से जुड़े करीब 14.3 करोड़ रुपये के गबन मामले में आरोपीरहा है और इस मामले में उसे जेल भेजा गया था.
 

Ranchi: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की डिप्लोमा स्तरीय भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही CID को अरुण कुमार को लेकर कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच के अनुसार, अरुण कुमार बिहार सिपाही भर्ती से जुड़े 14.3 करोड़ रुपये के कथित गबन मामले में आरोपी रहा है और इस मामले में उसे जेल भेजा गया था। अब इसी व्यक्ति की कंपनी को झारखंड में JSSC की डिप्लोमा स्तरीय भर्ती परीक्षा से जुड़ा काम मिलने का मामला जांच के केंद्र में है।

CID की जांच में यह भी सामने आया है कि जेल में रहने के दौरान अरुण कुमार की मुलाकात पटना हाईकोर्ट में सेक्शन अफसर रहे अभिषेक से हुई थी। आरोप है कि इसी संपर्क के दौरान झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी कर अभ्यर्थियों से पैसे वसूलने की योजना तैयार की गई।

बिहार सिपाही भर्ती में गबन का आरोप

मामला वर्ष 2017-18 और 2018-19 की बिहार सिपाही भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा बताया जा रहा है। इस भर्ती का टेंडर एक निजी कंपनी को मिला था। आरोप है कि परीक्षार्थियों से एप्लीकेशन फीस के रूप में जमा राशि में बड़े स्तर पर अनियमितता हुई थी।

इसी मामले में अरुण कुमार को जेल भेजा गया था। बाद में हाईकोर्ट में कुल कथित गबन राशि का एक-तिहाई हिस्सा जमा करने के बाद उसे जमानत मिली।

जेल में बनी पहचान से झारखंड तक पहुंची कहानी

जांच के मुताबिक, जमानत की कानूनी प्रक्रिया के दौरान अरुण कुमार का संपर्क पटना हाईकोर्ट के सेक्शन अफसर रहे अभिषेक से हुआ। पुलिस को दिए बयान में अभिषेक ने कथित तौर पर अरुण के साथ हुई बातचीत और झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी थी।

आरोप है कि इसी दौरान झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को प्रभावित करने और अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलने की योजना तैयार हुई। टेंडर हासिल करने में भारी खर्च का हवाला देकर कथित तौर पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक करने और परीक्षार्थियों से पैसे वसूलने का नेटवर्क तैयार किया गया।

2022 में ही पुलिस को मिल गई थी जानकारी

CID की जांच में यह बात भी सामने आई है कि सितंबर 2022 में हुई एक गिरफ्तारी के दौरान आरोपी अभिषेक ने पूछताछ में अरुण कुमार की बिहार वाली पृष्ठभूमि, उसकी जमानत और झारखंड में मिले काम से संबंधित जानकारी पुलिस को दी थी।

बताया जा रहा है कि यह पूरा विवरण केस डायरी में दर्ज किया गया था। इसके बावजूद उस समय अरुण कुमार की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। अब अगस्त 2026 में CID ने उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया है।

अरुण की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को उन तथ्यों की पुष्टि करने में मदद मिल रही है, जिनका उल्लेख कथित तौर पर वर्ष 2022 की केस डायरी में पहले ही किया जा चुका था। इससे जांच के दौरान यह सवाल भी उठ रहा है कि पहले से जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद अरुण की गिरफ्तारी में इतना लंबा वक्त क्यों लगा।

रांची और हजारीबाग के कोचिंग संस्थानों की जांच

JPSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच के दौरान CID ने रांची और हजारीबाग के कुछ कोचिंग संस्थानों की भी पड़ताल की है।

जांच के क्रम में रांची के लालपुर स्थित शिवांगन की पाठशाला और इसके निदेशक संजीत कुमार के रातू रोड स्थित आवास की जांच की गई। इसके अलावा हजारीबाग में संचालित मेघा कोचिंग सेंटर में भी जांच-पड़ताल की गई। दोनों स्थानों से दस्तावेज जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।

अभय तिवारी समेत कई लोगों से पूछताछ

CID की टीम अभय तिवारी, उसके भाई और उसकी पत्नी से पूछताछ कर रही है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के आरोपी मो. एबाद से भी पूछताछ की गई है।

पूछताछ के दौरान मो. एबाद ने परीक्षा उप नियंत्रक समेत अन्य लोगों पर OMR शीट में गड़बड़ी कराने का आरोप लगाया है। CID ने इस मामले में 18 अन्य सफल अभ्यर्थियों से भी पूछताछ की है।

जांच के दौरान कोचिंग संस्थानों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद दोनों संस्थानों से जुड़े दस्तावेज और अन्य जानकारियां खंगाली जा रही हैं।

जांच का दायरा बढ़ा

अरुण कुमार की गिरफ्तारी के बाद JSSC परीक्षा गड़बड़ी मामले की जांच और महत्वपूर्ण हो गई है। अब CID कथित नेटवर्क में शामिल लोगों, परीक्षा से जुड़े काम हासिल करने की प्रक्रिया, प्रश्नपत्र लीक की संभावित साजिश और अभ्यर्थियों से कथित तौर पर पैसे वसूलने के आरोपों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

जांच एजेंसी वर्ष 2022 में दर्ज बयानों और हाल में सामने आई जानकारी का भी मिलान कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

नोट: उपरोक्त खबर में लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं। अंतिम रूप से दोष सिद्ध होना अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।