अस्पताल में नवजात की हेराफेरी! असली माता-पिता की जगह दूसरे दंपती का नाम दर्ज होने से मचा हड़कंप
Garhwa: झारखंड के गढ़वा जिले के सदर अस्पताल में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां असली माता-पिता का नाम हटाकर दूसरे माता-पिता का नाम सरकारी रजिस्टर में दर्ज कर दिया गया. सदर अस्पताल के कागजात में छेड़छाड़ के लिए एएनएम से स्पष्टीकरण मांगा गया है. वहीं सदर अस्पताल के उपाधीक्षक द्वारा मामले की जांच की जा रही है.
गौरतलब है कि गढ़वा शहर के पाठक मोहल्ला निवासी रवि कुमार की पत्नी रूपा देवी (32) को 21 फरवरी, 2026 को दोपहर 2:00 बजे प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उसी दिन दोपहर 2:35 बजे उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया. जानकारी के मुताबिक, उनकी पहले से तीन बेटियां हैं.
जानकारी के अनुसार, प्रसव से पहले, प्रसूता ने बच्ची को पलामू जिले के हैदरनगर निवासी अपने निःसंतान भाई और भाभी को देने पर सहमति जताई थी. प्रसव के समय, अस्पताल की ओपीडी स्लिप, बेडहेड टिकट स्लिप, ओपीडी रजिस्टर, डिलीवरी रजिस्टर, L-3 फॉर्मेट और बर्थ सर्टिफिकेट के लिए भरे गए पिंक फॉर्म, सभी में रूपा देवी और उनके पति लव कुमार का नाम नवजात के माता-पिता के तौर पर लिखा था. इसी बीच, हैदरनगर के रहने वाले राजू कुमार कांस्यकार और उनकी पत्नी कामिनी साहू भी सदर अस्पताल पहुंचे.
क्या है आरोप?
प्रसूता, उसके पति और उसके भाई और भाभी ने सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे की शिफ्ट में प्रसव कक्ष में ड्यूटी पर मौजूद नर्सों से सभी रजिस्टर में माता-पिता की जगह कामिनी साहू और राजू कुमार कांस्यकार का नाम लिखने की विनती की. लेकिन, उस समय ड्यूटी पर मौजूद नर्सों ने ऐसा करने से मना कर दिया.
आरोप है कि दूसरी शिफ्ट में ड्यूटी पर पहुंची एएनएम तारामणि कुजूर ने सभी रजिस्टर में काट-छांटकर नवजात के माता-पिता और पता बदल दिया. प्रसूता का नाम बदलकर कामिनी साहू, 29 वर्ष और पति का नाम बदलकर राजू कुमार कांस्यकार कर दिया गया.
इतना ही नहीं, बर्थ सर्टिफिकेट के लिए भरे गए पिंक फॉर्म पर बॉल पेन से काटकर नवजात बच्ची के माता-पिता का नाम और पता भी बदल दिया गया. इसके बाद कामिनी साहू और राजू कुमार कांस्यकार नवजात बच्ची को सदर अस्पताल से अपने साथ ले गए. कहा जा रहा है कि इसके पीछे मकसद यह था कि बर्थ सर्टिफिकेट पर वही नाम दर्ज हो जाएगा और बाद में कोई कानूनी झंझट नहीं होगा.
कैसे सामने आया मामला?
12 मार्च को प्रसूता महिला रूपा देवी और उनके पति लव कुमार दोबारा सदर अस्पताल पहुंचे. उन्होंने नर्सों से पेट दर्द की शिकायत की और दूध सुखाने की दवा मांगी. इत्तेफाक से, उस समय नर्सों की वही टीम ड्यूटी पर थी, जिन्होंने उसकी डिलीवरी कराई थी. बातचीत के दौरान नवजात बच्ची को उसके भाई और भाभी को देने और रजिस्टर में नाम बदलने का पूरा मामला सामने आया. इसके बाद लेबर रूम की इंचार्ज नर्स ने सदर अस्पताल के उपाधीक्षक को पूरी घटना की लिखित जानकारी दी. उपाधीक्षक ने एएनएम तारामणि कुजूर से स्पष्टीकरण मांगा है.
इस पूरे मामले में सिविल सर्जन ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और डीएस को जांच करने का निर्देश दिया गया है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.