सुभाष गर्ग के दावे पर भड़के निशिकांत दुबे! बोले- सबूत दो या सार्वजनिक माफी मांगो
Deoghar: पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग के एक पुराने बयान को लेकर गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने कड़ा रुख अपनाया है। सुभाष गर्ग ने दावा किया था कि वर्ष 2018 में निशिकांत दुबे उनके कार्यालय पहुंचे थे और उनसे आधिकारिक मुलाकात की थी। इस दावे पर सांसद ने आपत्ति जताते हुए इसे साबित करने की चुनौती दी है।
निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया के जरिए कहा है कि यदि पूर्व वित्त सचिव अपने दावे को साबित नहीं कर पाते हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। सांसद ने इस मामले में आपराधिक मानहानि की कानूनी कार्रवाई का भी जिक्र किया है।
2018 में मुलाकात के दावे पर निशिकांत दुबे का पलटवार
सुभाष गर्ग के बयान के मुताबिक, वर्ष 2018 में निशिकांत दुबे उनके कार्यालय आए थे और दोनों के बीच आधिकारिक मुलाकात हुई थी। इसी दावे को लेकर निशिकांत दुबे ने सवाल उठाते हुए कहा कि वह आज तक दिल्ली में भारत सरकार के किसी सचिव या रांची में राज्य सरकार के किसी सचिव के कार्यालय नहीं गए हैं।
सांसद ने कहा कि यदि पूर्व वित्त सचिव यह साबित कर दें कि वह कभी किसी सचिव के कार्यालय गए हैं, तो वह उनके दावे को स्वीकार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रोटोकॉल के लिहाज से सांसद का पद सचिव से ऊपर होता है।
ये जो सुभाष गर्ग पूर्व वित्त सचिव की बदमिज़ाजी है,उसे मैंने ठीक करने का फ़ैसला किया है,मैंने उसके उपर आपाराधिक मानहानि किया है,क्योंकि उसने अपने दफ़्तर में मेरे साथ मुलाक़ात का ज़िक्र किया है,सुभाष तुम्हारी जानकारी के लिए मैं सन 2009 में सांसद बना तबसे लेकर आजतक मैं भारत सरकार के दफ़्तर में नहीं गया हूँ,क्योंकि सचिव भारत सरकार प्रोटोकॉल में सांसद से नीचे हैं । दूसरा 2009 से लेकर आजतक मैंने कभी भी ट्रान्सफर पोस्टिंग की कोई चिट्ठी लिखी है,तुम्हारा क्या तुम्हारे कोई मित्र भी मेरी कोई चिट्ठी या दफ़्तर की किसी मिटिंग के सम्बन्ध में सूचना दे देंगे तो मैं तुम्हें मर्द की औलाद मानूँगा ।देश की अर्थव्यवस्था को डुबाने वाले सुभाष का रास्ता जेल है
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) September 21, 2026
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‘मैं अधिकारियों को अपने कार्यालय बुला सकता था’
निशिकांत दुबे ने अपने बयान में उस समय की अपनी संसदीय भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस अवधि की घटना का दावा किया जा रहा है, उस समय वह पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) के चेयरमैन थे।
सांसद के मुताबिक, अपनी संवैधानिक और संसदीय भूमिका के तहत वह अधिकारियों को अपने कार्यालय में बुला सकते थे। इसी आधार पर उन्होंने पूर्व वित्त सचिव के कार्यालय जाने के दावे पर सवाल उठाया है।
ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर पत्र के दावे पर भी सवाल
निशिकांत दुबे ने सुभाष गर्ग के कथित ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े पत्र लिखे जाने के दावे पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि इस दावे में सच्चाई है तो इसे सार्वजनिक रूप से प्रमाणित किया जाना चाहिए।
सांसद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उनके खिलाफ किया गया दावा साबित नहीं होता है तो पूर्व वित्त सचिव को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी।
मानहानि की कार्रवाई की बात
निशिकांत दुबे ने कहा है कि उन्होंने इस मामले में आपराधिक मानहानि का दावा किया है और आगे भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस पूरे विवाद में सुभाष गर्ग की ओर से इस प्रतिक्रिया पर क्या जवाब दिया गया है, यह अलग से सामने आना बाकी है।
GDP ग्रोथ के बयान के बाद भी चर्चा में रहे सुभाष गर्ग
गौरतलब है कि पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की GDP ग्रोथ को लेकर किए गए दावे पर सवाल उठाने के बाद चर्चा में रहे हैं। उन्होंने 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ रेट के दावे पर सवाल उठाया था।
इसके बाद सुभाष गर्ग के बयान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई और अब उनके पुराने कथित बयान पर निशिकांत दुबे की प्रतिक्रिया से एक नया विवाद सामने आया है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा जारी है।