अब दिल्ली-पुणे जाने की जरूरत नहीं! रांची में 1 नवंबर से शुरू होगी शूटिंग एकेडमी

झारखंड में शूटिंग खेल को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल होने जा रही है. रांची में 1 नवंबर से पाटलिपुत्र गन शूटिंग एकेडमी शुरू होने जा रही है. इस एकेडमी के खुलने से राज्य के उन खिलाड़ियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें शूटिंग की ट्रेनिंग के लिए दिल्ली और पुणे जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था. स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण की सुविधा मिलने से उभरते निशानेबाजों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिल सकता है.

 

Ranchi:  झारखंड और बिहार के शूटिंग खिलाड़ियों के लिए अच्छी खबर है। अब निशानेबाजी में बेहतर प्रशिक्षण हासिल करने के लिए खिलाड़ियों को दिल्ली, पुणे और कोलकाता जैसे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। रांची में 1 नवंबर 2026 से पाटलिपुत्र गन शूटिंग एकेडमी शुरू करने की तैयारी है। इस पहल का उद्देश्य राज्य की प्रतिभाओं को आधुनिक सुविधाएं, अनुभवी कोच और बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना सकें।

एकेडमी के संचालक और जदयू विधायक चेतन आनंद के मुताबिक, रांची में शूटिंग खेल के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित करने और स्थानीय खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उद्घाटन के साथ ही नामांकन और प्रशिक्षण शुरू करने की योजना है।

मेन रोड के पास तैयार हुई शूटिंग रेंज

पाटलिपुत्र गन शूटिंग एकेडमी रांची के मेन रोड के पास राधेश्याम लेन में स्थापित की जा रही है। यहां हनुमान मंदिर के पीछे शूटिंग रेंज तैयार की गई है। एकेडमी प्रबंधन का लक्ष्य बिहार में मिले अनुभव के आधार पर झारखंड के खिलाड़ियों को भी बेहतर प्रशिक्षण का अवसर देना है।

11 लेन की रेंज और आधुनिक तकनीक पर जोर

एकेडमी में 10 मीटर शूटिंग के अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए 11 लेन की रेंज बनाई गई है। संचालक के अनुसार, यहां ओलंपिक स्तर की दो सीस टारगेट मशीनें लगाने की योजना है। इसके अलावा, खिलाड़ियों की तकनीक और शारीरिक प्रदर्शन का विश्लेषण करने के लिए स्कैट मशीन भी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

इस तकनीक के जरिए हार्ट रेट, मांसपेशियों की गतिविधियों और सांस लेने के पैटर्न जैसे संकेतकों का आकलन करने में मदद मिल सकती है। इससे खिलाड़ियों को अपनी कमजोरियों को समझने और अभ्यास में सुधार करने का अवसर मिलेगा।

शुरुआत में खिलाड़ियों को मिलेंगे हथियार

शूटिंग खेल में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की कीमत कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होती है। इसे ध्यान में रखते हुए एकेडमी प्रबंधन ने शुरुआती प्रशिक्षण के दौरान खिलाड़ियों को हथियार उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।

चेतन आनंद के अनुसार, खिलाड़ियों को शुरुआत में ही तीन से चार लाख रुपये खर्च करके हथियार खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे पहले प्रशिक्षण लेकर अपनी रुचि और क्षमता को परख सकेंगे। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को भी इस खेल में आगे बढ़ने का मौका मिलने की उम्मीद है।

अनुभवी कोच के मार्गदर्शन में होगी ट्रेनिंग

एकेडमी के हेड कोच विवासन गांगुली होंगे। प्रबंधन के मुताबिक, वह भारतीय निशानेबाज मेहुली घोष को भी प्रशिक्षण दे चुके हैं। अनुभवी कोच के मार्गदर्शन और आधुनिक सुविधाओं के जरिए खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।

बिहार के अनुभव से झारखंड को मिलेगी मदद?

एकेडमी से जुड़े संचालकों का कहना है कि बिहार में वर्ष 2022 के आसपास शुरुआत के बाद खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अवसर मिले हैं। उनके मुताबिक, एक खिलाड़ी ने खेलो इंडिया में कांस्य पदक हासिल किया है, 40 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर हिस्सा ले रहे हैं और 20 से ज्यादा खिलाड़ी भारतीय टीम के ट्रायल में शामिल हो चुके हैं।

प्रबंधन को उम्मीद है कि रांची में भी इसी तरह का प्रशिक्षण ढांचा तैयार होने से झारखंड के खिलाड़ियों को फायदा होगा। एकेडमी की शुरुआत से स्थानीय निशानेबाजों को अपने शहर में अभ्यास करने का अवसर मिलेगा और उन्हें बड़े शहरों में प्रशिक्षण के लिए जाने पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से राहत मिल सकती है।

फिलहाल, एकेडमी का उद्घाटन, नामांकन और प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 नवंबर 2026 से शुरू करने की योजना है। खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं और प्रशिक्षण व्यवस्था की अंतिम जानकारी एकेडमी प्रबंधन की आधिकारिक घोषणा के अनुसार स्पष्ट होगी।