रांची के 1,209 बूथों पर एक भी नया वोटर नहीं! CEO ने अफसरों को लगाई फटकार

Ranchi: झारखंड में SIR के तहत नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया की समीक्षा में बड़ी कमी सामने आई है. राज्य के 6,722 मतदान केंद्रों पर अब तक एक भी Form-6 नहीं मिला है. रांची में सबसे ज्यादा 1,209 बूथ ऐसे हैं. CEO के. रविकुमार ने इसे गंभीर मामला बताते हुए बूथवार समीक्षा और पात्र युवाओं को मतदाता सूची से जोड़ने में तेजी लाने का निर्देश दिया है.
 

Ranchi: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत नए और युवा मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन विभाग ने चिंता जताई है। मतदाता सूची के ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद मतदान केंद्रवार Form-6 की समीक्षा में सामने आया कि राज्य के 6,722 मतदान केंद्रों पर अब तक एक भी Form-6 प्राप्त नहीं हुआ है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रविकुमार ने इसे गंभीर विषय बताते हुए संबंधित जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को बूथवार स्थिति की विशेष समीक्षा करने का निर्देश दिया है।

रांची के 1,209 बूथों पर एक भी आवेदन नहीं

जिलावार आंकड़ों में रांची की स्थिति सबसे खराब सामने आई है। जिले के 1,209 मतदान केंद्रों पर अब तक नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए एक भी Form-6 नहीं मिला है।

इसके बाद पलामू में 592, हजारीबाग में 572, गिरिडीह में 416 और धनबाद में 392 मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां अभी तक एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।

वहीं, जिन मतदान केंद्रों पर अब तक केवल 1 से 5 Form-6 मिले हैं, उनकी संख्या भी काफी अधिक है। धनबाद में ऐसे 1,243, गिरिडीह में 1,072, रांची में 981, पलामू में 936 और हजारीबाग में 814 मतदान केंद्र हैं।

हर बूथ पर औसतन 60 आवेदन का अनुमान

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि विधानसभा चुनाव 2024 के बाद करीब दो वर्ष बीत चुके हैं। राज्य में मतदाताओं की संख्या में हर साल लगभग चार प्रतिशत की वृद्धि को देखते हुए प्रत्येक मतदान केंद्र पर औसतन करीब 60 Form-6 मिलने का अनुमान है।

ऐसे में बड़ी संख्या में बूथों पर शून्य या बेहद कम आवेदन मिलना चिंता का विषय है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित न रहे।

5 अगस्त को जारी हुआ था ड्राफ्ट

SIR के तहत 5 अगस्त 2026 को मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित किया गया था। इसके बाद नए पात्र मतदाताओं से Form-6 और निर्धारित घोषणा-पत्र के जरिए ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं।

1 अक्टूबर 2026 को अर्हता तिथि मानते हुए उस तारीख तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके या करने वाले सभी पात्र भारतीय नागरिकों का मतदाता सूची में पंजीकरण सुनिश्चित किया जाना है। Form-6 के जरिए नाम जोड़ने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित है।

स्कूल-कॉलेजों में चलेगा विशेष अभियान

CEO ने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को घर-घर जाकर नए और युवा पात्र नागरिकों की पहचान करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा स्कूलों और कॉलेजों में विशेष अभियान चलाकर 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को मतदाता पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा।

युवाओं को ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी देने के साथ Form-6 और घोषणा-पत्र प्राप्त कर उनका समयबद्ध डिजिटाइजेशन सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।

मतदाता पंजीकरण का रिकॉर्ड रहेगा स्थायी

के. रविकुमार ने कहा कि SIR के दौरान मतदाता सूची में किया गया पंजीकरण भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इससे जुड़े दस्तावेजों का स्थायी रिकॉर्ड के रूप में संधारण किया जाता है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि Form-6 और घोषणा-पत्र प्राप्त करने से लेकर उनके डिजिटाइजेशन और नियमानुसार निष्पादन तक पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाए।

फर्जी वंशावली से वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने पर होगी कार्रवाई

SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए दूसरे व्यक्ति के खतियान से तैयार फर्जी वंशावली या प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

CEO के अनुसार, दूसरे व्यक्ति की वंशावली में किसी गैर-पारिवारिक व्यक्ति को अपने परिवार के सदस्य या वंशज के तौर पर शामिल करना दंडनीय है। इसी तरह किसी विदेशी नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने का प्रयास भी अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

चुनावी रिकॉर्ड में गलत जानकारी देना पड़ सकता है भारी

वंशावली का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान, पारिवारिक संबंध और पुराने रिकॉर्ड से उसके संबंध के सत्यापन में किया जा रहा है। ऐसे में जानबूझकर गलत वंशावली तैयार कर उसके आधार पर मतदाता सूची में अपना या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल कराने का प्रयास चुनावी रिकॉर्ड में गलत सूचना देने के दायरे में आ सकता है।

निर्वाचन विभाग को ऐसी फर्जी वंशावली से जुड़ी शिकायतें मिलने की भी जानकारी दी गई है। आरोप है कि कुछ मामलों में दूसरे परिवारों की वंशावली में नाम जोड़कर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उनके आधार पर जाति प्रमाण-पत्र या निवास प्रमाण-पत्र बनवाने का प्रयास किया जा रहा है।

गलत घोषणा पर एक साल तक की सजा का प्रावधान

मतदाता सूची में केवल पात्र व्यक्तियों का ही नाम दर्ज किया जाना चाहिए। लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 के तहत भारत का नागरिक नहीं होने वाला व्यक्ति मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए अयोग्य है।

वहीं, मतदाता सूची तैयार करने या उसमें नाम जोड़ने के लिए जानबूझकर गलत घोषणा या गलत जानकारी देने पर लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 लागू हो सकती है। इसके तहत एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।