झारखंड में SIR के बीच 63 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस, 24 अगस्त से देना होगा दस्तावेजी जवाब
Ranchi, Jharkhand News: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने बड़ी संख्या में मतदाताओं के सत्यापन की तैयारी शुरू कर दी है। ड्राफ्ट मतदाता सूची में अलग-अलग तरह की विसंगतियों वाले 63,24,116 मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने हैं। इन मतदाताओं को 24 अगस्त से निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी नागरिकता और मतदाता होने से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।
इससे पहले 22 और 23 अगस्त को राज्य के मतदान केंद्रों पर विशेष कैंप लगाए गए हैं। इन कैंपों में उन लोगों की समस्याएं सुनी जा रही हैं, जिनका नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है या नाम, पता और अन्य विवरण में किसी तरह की त्रुटि सामने आई है।
45 लाख से ज्यादा वोटर ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ में
आयोग के आंकड़ों के अनुसार सबसे बड़ी संख्या लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले मतदाताओं की है। इस श्रेणी में 45,55,227 वोटर शामिल हैं। इनमें ऐसे मामले बताए गए हैं, जहां पिछली मतदाता सूची से नाम का मिलान तो होता है, लेकिन नाम या माता-पिता के नाम में अंतर, जन्मतिथि में गड़बड़ी या एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होने जैसी विसंगतियां सामने आई हैं।
इसके अलावा 14,03,205 मतदाता नो-मैपिंग श्रेणी में हैं, जबकि 3,65,684 मतदाताओं की पहचान डेमोग्राफिकल सिमिलर एंट्री (DSE) के आधार पर सत्यापन के लिए की गई है।
नोटिस के बाद मिलेगा जवाब देने का मौका
ऐसे मतदाताओं को संबंधित निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ERO) के स्तर पर सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। बीएलओ के माध्यम से नोटिस पहुंचाया जाएगा और संबंधित मतदाता को जरूरी दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया जाएगा।
नोटिस की प्रक्रिया के दौरान बीएलओ संबंधित मतदाता के साथ तस्वीर भी लेंगे। यदि पहली सूचना पर मतदाता उपस्थित नहीं होता है तो दूसरी नोटिस जारी करने का प्रावधान है। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर सक्षम अधिकारी निर्णय लेंगे।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मतदाता का नाम केवल नो-मैपिंग या तार्किक विसंगति के आधार पर सीधे मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। विधिसम्मत सुनवाई और सक्षम अधिकारी के आदेश के बाद ही किसी मामले में निर्णय लिया जाएगा।
झारखंड में ASDDO वोटरों का प्रतिशत कई राज्यों से ज्यादा
SIR के तहत जिन राज्यों में प्रक्रिया चल रही है, उनके आंकड़ों की तुलना में झारखंड में ASDDO श्रेणी के मतदाताओं का अनुपात कई राज्यों से अधिक बताया गया है। झारखंड में यह आंकड़ा 16.50 प्रतिशत है।
तुलना करें तो हरियाणा में 16.39 प्रतिशत, चंडीगढ़ में 12.8 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 10.80 प्रतिशत, ओडिशा में 6.02 प्रतिशत, मणिपुर में 7.5 प्रतिशत, मिजोरम में 5.2 प्रतिशत, मेघालय में 7.68 प्रतिशत और सिक्किम में 8 प्रतिशत ASDDO वोटर बताए गए हैं। वहीं महाराष्ट्र में 21.25, कर्नाटक में 19.60, तेलंगाना में 21.70 और दिल्ली में 33 प्रतिशत का आंकड़ा सामने आया है।
कैंपों में पहुंच रहे मतदाता
22 और 23 अगस्त को लगाए गए विशेष कैंपों में मतदाता अपने नाम और विवरण से जुड़ी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं। कई जगहों पर लोग फॉर्म-6 और फॉर्म-8 के माध्यम से आवेदन करते दिखाई दिए।
कुछ मतदाताओं ने नाम हटने या परिवार के सदस्यों के अलग-अलग वार्ड में दर्ज होने की शिकायत भी की। वहीं, बीएलओ के सामने ऐसे मतदाताओं की पहचान करना भी चुनौती बना हुआ है, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।
नए मतदाताओं से भी नाम जुड़वाने की अपील
चुनाव आयोग ने 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं से मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने की अपील की है। आयोग का जोर इस बात पर है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान पात्र नागरिकों का नाम सूची में शामिल हो और मतदाता सूची में दर्ज गलतियों को भी समय रहते सुधारा जा सके।
इस पूरी प्रक्रिया में अब सबसे महत्वपूर्ण चरण 24 अगस्त से शुरू होगा, जब नोटिस पाने वाले मतदाताओं को अपने दावे के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।