Operation Nanhe Farishte: बच्चों की सुरक्षा में RPF रांची डिवीजन देशभर में नंबर-2, जानिए पूरी उपलब्धि

बच्चों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित संरक्षण दिलाने के अभियान 'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के रांची डिवीजन ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इस अभियान के तहत उत्कृष्ट कार्य करते हुए रांची डिवीजन ने देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है. ऑपरेशन के जरिए रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में भटके, लापता या संकट में मिले बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित संरक्षण उपलब्ध कराने का काम किया जाता है.
 

Ranchi:  रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में अकेले या मुसीबत में फंसे बच्चों को सुरक्षित निकालने के अभियान में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। दक्षिण पूर्व रेलवे के रांची रेल डिवीजन ने अक्टूबर 2026 में 'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' के तहत 33 बच्चों को सुरक्षित बचाया। इस प्रदर्शन के साथ रांची डिवीजन दक्षिण पूर्व रेलवे के चार रेल डिवीजनों में दूसरे स्थान पर रहा।

रेलवे सुरक्षा बल का यह अभियान उन बच्चों की मदद के लिए चलाया जाता है, जो किसी कारण से अपने परिवार से बिछड़ जाते हैं या रेलवे परिसर में अकेले और असुरक्षित स्थिति में पाए जाते हैं।

18 लड़के और 15 लड़कियों को मिला सुरक्षित संरक्षण

अक्टूबर महीने में रांची डिवीजन की RPF टीम ने कुल 33 बच्चों को रेस्क्यू किया। इनमें 18 लड़के और 15 लड़कियां शामिल हैं। रेलवे सुरक्षा बल की टीम ने अभियान के तहत बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित संरक्षण उपलब्ध कराने की कार्रवाई की।

खड़गपुर डिवीजन रहा पहले स्थान पर

दक्षिण पूर्व रेलवे के चार डिवीजनों के प्रदर्शन में खड़गपुर डिवीजन सबसे आगे रहा। यहां की RPF टीम ने अक्टूबर 2026 में 34 बच्चों को सुरक्षित बचाया। वहीं, 33 बच्चों के रेस्क्यू के साथ रांची डिवीजन दूसरे स्थान पर रहा।

चार डिवीजनों में 93 बच्चों का रेस्क्यू

दक्षिण पूर्व रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में चारों रेल डिवीजनों में RPF ने संयुक्त रूप से 93 बच्चों को सुरक्षित बचाया। यह आंकड़ा रेलवे परिसरों में बच्चों की सुरक्षा और उनके संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियान की सक्रियता को दर्शाता है।

क्या है ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते?

'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' रेलवे सुरक्षा बल की ओर से चलाया जाने वाला विशेष अभियान है। इसका उद्देश्य रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में अकेले, लावारिस या संकट की स्थिति में मिले बच्चों को सुरक्षित बचाना है। रेस्क्यू के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बच्चों को संबंधित बाल कल्याण समिति, बाल संरक्षण संस्थाओं या सक्षम अधिकारियों के सुपुर्द किया जाता है, ताकि उन्हें जरूरी देखभाल और संरक्षण मिल सके।

रांची डिवीजन की यह उपलब्धि बताती है कि रेलवे परिसरों में बच्चों की सुरक्षा के लिए RPF की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।