Pitru Paksha: साहिबगंज के गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़, पितरों को तर्पण देने पहुंचे श्रद्धालु
Sahibganj: पितृ पक्ष के दौरान साहिबगंज के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार उमड़ रही है। प्रतिपदा श्राद्ध के तीसरे दिन मंगलवार को भी शहर के विभिन्न गंगा घाटों पर लोगों ने पहुंचकर अपने पूर्वजों को याद किया और विधि-विधान के साथ तर्पण किया। सुबह से ही घाटों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था।
शहर के मुक्तेश्वर गंगा घाट पर मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में लोगों ने अपने पितरों के निमित्त तर्पण किया। पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं से तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कराए। इस दौरान पूरा घाट मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा। श्रद्धालु पंक्तिबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।
सुबह 5 बजे से घाटों पर पहुंचने लगे श्रद्धालु
तर्पण के लिए सुबह करीब 5 बजे से ही गंगा घाटों पर लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो लगभग 10 बजे तक जारी रहा। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म किया।
साहिबगंज निवासी अर्जुन राम, रंजन पोद्दार, मनोज पोद्दार समेत अन्य श्रद्धालुओं ने अपने पितरों को याद करते हुए तर्पण किया। श्रद्धालुओं का कहना था कि वे अपने पूर्वजों के आशीर्वाद को परिवार की सुख-समृद्धि से जोड़कर देखते हैं और पितृ पक्ष के दौरान परंपरा के अनुसार तर्पण करते हैं।
महिलाओं ने भी किया पितरों का तर्पण
साहिबगंज के गंगा घाटों पर पुरुषों के साथ महिलाएं भी तर्पण करती नजर आईं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, पितृ पक्ष में लोग अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और उनके निमित्त तर्पण व श्राद्ध कर्म करते हैं।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, तर्पण में तिल, जौ, फूल और अरवा चावल जैसी सामग्री का उपयोग किया जाता है। श्रद्धालु इन धार्मिक कर्मकांडों के जरिए अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
कई गंगा घाटों पर हुआ तर्पण
मुक्तेश्वर घाट के अलावा शकुंतला सहाय घाट पर भी श्रद्धालुओं ने पहुंचकर तर्पण किया। वहीं राजमहल अनुमंडल क्षेत्र के सूर्यदेव घाट, काली घाट समेत अन्य गंगा घाटों पर भी लोगों ने अपने पूर्वजों को याद करते हुए पारंपरिक तरीके से तर्पण किया।
पितृ पक्ष के दौरान घाटों पर सुबह के समय श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के कारण धार्मिक माहौल बना हुआ है। पुरोहितों द्वारा विधि-विधान से अनुष्ठान कराया जा रहा है और श्रद्धालु अपने पितरों की शांति के लिए पूजा-पाठ और तर्पण कर रहे हैं।