“वनवासी” बयान पर सियासी भूचाल, आदिवासी समाज के विरोध के बीच सड़कों पर उतरी कांग्रेस, अमित शाह का फूंका पुतला

Ranchi: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं और ‘आदिवासी’ शब्द उनकी पहचान, इतिहास और अधिकारों का प्रतीक है. उनका आरोप है कि ‘वनवासी’ शब्द का प्रयोग आदिवासी समाज की पहचान को बदलने की कोशिश है, जिसे वे स्वीकार नहीं करेंगे.
 

Ranchi: केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के कथित ‘वनवासी’ संबोधन को लेकर झारखंड में विरोध तेज हो गया है. झारखंड आदिवासी कांग्रेस और विभिन्न आदिवासी संगठनों ने उनके बयान के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ‘आदिवासी’ समुदाय को ‘वनवासी’ कहकर उनकी ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं और ‘आदिवासी’ शब्द उनकी पहचान, इतिहास और अधिकारों का प्रतीक है. उनका आरोप है कि ‘वनवासी’ शब्द का प्रयोग आदिवासी समाज की पहचान को बदलने की कोशिश है, जिसे वे स्वीकार नहीं करेंगे. आदिवासी कांग्रेस नेताओं ने गृह मंत्री से अपने बयान पर स्पष्टीकरण और माफी की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी है कि यदि इस मुद्दे पर उचित प्रतिक्रिया नहीं मिली तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.

संगठन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष राज उरांव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने उनके वक्तव्य को आदिवासी विरोधी बताते हुए प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा कि पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित जनजातीय समागम के दौरान गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासी समाज को “वनवासी” कहा गया था. उसी का विरोध करने के लिए आज झारखंड आदिवासी कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़क पर उतरे हैं.

झारखंड आदिवासी कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि “आदिवासी” शब्द हमारी पहचान, इतिहास, संघर्ष और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक है. इसे “वनवासी” जैसे शब्दों से बदलने का प्रयास आदिवासी समाज की अस्मिता और आत्मसम्मान को कमजोर करने की भाजपा की सोची-समझी साजिश है. जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा.

प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि दिल्ली में आयोजित उस कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय के लोगों के साथ अत्यंत अमानवीय व्यवहार किया गया. लगभग 45 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी में खुले मैदान में आदिवासी भाइयों-बहनों को जमीन पर बैठाया गया जबकि उनके लिए समुचित व्यवस्था तक नहीं की गई. यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज का खुला अपमान और अपमानजनक व्यवहार है.

झारखंड आदिवासी कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा और आरएसएस की नीतियों पर तीखा प्रहार किया. साथ ही कहा कि एक ओर ये लोग आदिवासी समाज के नाम पर दिखावटी सांस्कृतिक कार्यक्रम करते हैं. वहीं दूसरी ओर उनके जल, जंगल और जमीन पर लगातार हमला किया जा रहा है. बड़े-बड़े कॉर्पाेरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है. जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है और उनके पारंपरिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है.

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आदिवासी समाज के मूल मुद्दों-भूमि अधिकार, वन अधिकार, रोजगार, विस्थापन और सामाजिक सुरक्षा पर पूरी तरह मौन है. उनकी नीतियां आदिवासी हितों की रक्षा करने के बजाय उन्हें व्यवस्थित रूप से कमजोर कर रही हैं.

इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आदिवासी कांग्रेस के कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित रहे. सभी ने एक स्वर में इस अपमानजनक टिप्पणी और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की तथा आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लिया. झारखंड आदिवासी कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रकार की मानसिकता और नीतियां जारी रहीं, तो राज्यभर में और भी व्यापक एवं तीव्र आंदोलन किया जाएगा.