MMDR कानून पर रघुवर दास का JMM-कांग्रेस पर हमला! DMF राशि और बंद खदानों पर मांगा जवाब
Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिला भाजपा की ओर से रविवार को चाईबासा के कैफेटेरिया में MMDR कानून को लेकर प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रघुवर दास ने झामुमो और कांग्रेस पर खनिज संपदा तथा MMDR एक्ट को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा का पारदर्शी तरीके से उपयोग किया जाए तो इससे राज्य में निवेश, उत्पादन, रोजगार और राजस्व को बढ़ावा मिल सकता है।
राज्य की खनिज सम्पदा की अवैध माइनिंग कर झारखंड मुक्ति मोर्चा और कॉंग्रेस ने ATM बना दिया, इसलिए वे MMDR बिल का विरोध कर रहे हैं। ये दल इस बिल की गलत व्याख्या कर लोगों के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। वास्तव में यह झारखंड के लिए फायदेमंद है। आज चाईबासा में प्रेस वार्ता कर MMDR बिल पर झारखंड सरकार की सच्चाई उजागर की। @BJP4India @BJP4Jharkhand
— Raghubar Das (@dasraghubar) September 20, 2026
राज्य की खनिज सम्पदा की अवैध माइनिंग कर झारखंड मुक्ति मोर्चा और कॉंग्रेस ने ATM बना दिया, इसलिए वे MMDR बिल का विरोध कर रहे हैं। ये दल इस बिल की गलत व्याख्या कर लोगों के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। वास्तव में यह झारखंड के लिए फायदेमंद है। आज चाईबासा में प्रेस वार्ता कर MMDR बिल पर झारखंड सरकार की सच्चाई उजागर की। @BJP4India @BJP4Jharkhand
— Raghubar Das (@dasraghubar) September 20, 2026
MMDR संशोधन को लेकर झारखंड में राजनीतिक विवाद जारी है। झामुमो और कांग्रेस कानून के कुछ प्रावधानों का विरोध कर रहे हैं और राज्य के खनिज एवं राजस्व अधिकारों पर असर पड़ने की आशंका जता चुके हैं। वहीं रघुवर दास लगातार संशोधन को राज्य और राष्ट्र के हित में बताते रहे हैं।
खनिज उत्पादन और निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर
रघुवर दास ने कहा कि खनिज क्षेत्र में उत्पादन और निवेश बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही राज्य को रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम और अन्य मदों से राजस्व प्राप्त होगा।
उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम जैसे खनिज बहुल जिले में लंबे समय से बंद पड़ी लौह अयस्क खदानों का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, उपलब्ध सरकारी आंकड़ों में 2023 के दौरान झारखंड की 15 लौह अयस्क अथवा लौह अयस्क-मंगलनीज खनन लीज में केवल सात के संचालन में होने का उल्लेख है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बंद खदानों की समयबद्ध नीलामी और सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी कर उनका संचालन शुरू कराया जाए तो इससे राज्य के राजस्व के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो सकता है।
DMF राशि के इस्तेमाल पर रघुवर दास ने उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान रघुवर दास ने District Mineral Foundation यानी DMF/DMFT की राशि के इस्तेमाल को लेकर भी राज्य सरकार से जवाब मांगा।
उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए DMF की व्यवस्था की गई है। झारखंड सरकार की ओर से भी DMFT को खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास से जोड़कर संचालित किया जाता है।
रघुवर दास ने CAG के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि मार्च 2023 तक झारखंड के DMFTs में 4,003.51 करोड़ रुपये जमा हुए थे, जबकि इनमें से 1,826.46 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
उन्होंने सवाल उठाया कि खनन प्रभावित गांवों में DMF की राशि से अब तक कितने लोगों को वास्तविक लाभ मिला है। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी योजनाओं में DMF राशि के इस्तेमाल का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की।
बंद खदानों को लेकर सरकार से मांगा जवाब
रघुवर दास ने आरोप लगाया कि खदानों की नीलामी और संचालन में अनावश्यक देरी से वैध खनन प्रभावित होता है और राज्य के राजस्व को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियां अवैध उत्खनन के लिए भी अवसर पैदा कर सकती हैं।
उन्होंने खनन क्षेत्र से जुड़े भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के आरोपों की पारदर्शी जांच की मांग की। रघुवर दास का कहना था कि आयरन ओर से लेकर कोयला तक झारखंड की खनिज संपदा राज्य की आर्थिक ताकत बन सकती है, लेकिन इसके लिए पारदर्शी नीलामी, समयबद्ध खनन, पर्यावरणीय नियमों का पालन और DMF राशि का प्रभावी इस्तेमाल जरूरी है।
MMDR कानून पर JMM-कांग्रेस से अलग है भाजपा का रुख
MMDR संशोधन को लेकर भाजपा और झामुमो-कांग्रेस के बीच लगातार राजनीतिक मतभेद सामने आ रहे हैं। भाजपा की ओर से संशोधन को वैध खनन, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला बताया जा रहा है। वहीं झामुमो और कांग्रेस ने राज्य के खनिज अधिकारों और संभावित राजस्व नुकसान को लेकर आपत्ति जताई है।
झामुमो ने सितंबर में संशोधित MMDR कानून के खिलाफ राज्य के विभिन्न प्रखंडों में प्रदर्शन भी किया और खनिज संसाधनों से जुड़े राज्य के संवैधानिक अधिकारों तथा वित्तीय स्वायत्तता की रक्षा की मांग की।
विकास के आंकड़ों पर बहस की चुनौती
रघुवर दास ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि खनिज संपदा से मिलने वाले लाभ का वास्तविक फायदा खनन प्रभावित गांवों तक क्यों नहीं पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि अपने पांच वर्ष के मुख्यमंत्री कार्यकाल और वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल के विकास एवं शासन से जुड़े कार्यों पर वह किसी भी सार्वजनिक मंच पर तथ्यात्मक बहस के लिए तैयार हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने लोगों से राजनीतिक नारों के बजाय खनिज, रोजगार, राजस्व, DMF, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के आंकड़ों के आधार पर सरकार के काम का मूल्यांकन करने की अपील की।
निष्कर्ष
चाईबासा में रघुवर दास की प्रेस वार्ता के बाद MMDR कानून, बंद खदानों, खनिज राजस्व और DMF राशि के इस्तेमाल का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। एक ओर भाजपा संशोधन को खनन और निवेश के लिए उपयोगी बता रही है, वहीं झामुमो और कांग्रेस इसके राज्य के अधिकारों एवं राजस्व पर संभावित प्रभाव को लेकर विरोध जता रहे हैं।