JPSC विवाद में रघुवर दास का बड़ा हमला! ‘किसे बचा रही सरकार?’ CBI जांच की मांग

Ranchi:  JPSC विवाद को लेकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि JPSC मामलों की जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है और प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है. उन्होंने 11वीं से 13वीं और 14वीं JPSC परीक्षाओं से जुड़े कई मुद्दों पर भी सवाल उठाए.
 

Ranchi:  झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े मामलों की जांच को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार जेपीएससी प्रकरण की जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रही है। रघुवर दास ने आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है, लेकिन सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों और प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने छात्रों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया है। उनके मुताबिक, छात्रों को आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त करा दिया गया, लेकिन इसके बाद उन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पूर्व JPSC चेयरमैन और PA से पूछताछ का जिक्र

रघुवर दास ने कहा कि JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांग्ते और उनके पीए के खिलाफ CID जांच चल रही है तथा उनसे पूछताछ भी की जा रही है।

उन्होंने दावा किया कि JPSC की तत्कालीन सदस्य रहीं अजीता भट्टाचार्य, जमाल अहमद और अनिमा हांसदा के पीए से इंटरव्यू मैनेज करने के नाम पर कथित तौर पर 15 लाख रुपये तक लिए जाने की बात सामने आई है। रघुवर दास ने सवाल उठाया कि यदि ऐसे आरोप सामने आए हैं, तो संबंधित आयोग सदस्यों से पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों का पक्ष इस बयान में उपलब्ध नहीं है।

11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा को लेकर उठाए सवाल

रघुवर दास ने 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के दौरान आयोग में रहे सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में आयोग के अध्यक्ष बदलते रहे और ऐसे में संबंधित सदस्यों के बयान के बिना जांच को पूर्ण कैसे माना जा सकता है।

उन्होंने पूर्व अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा और आयोग के सदस्यों के बीच कथित विवाद का भी जिक्र किया। रघुवर दास के मुताबिक, इसी विवाद के कारण 11वीं से 13वीं JPSC मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी नहीं हो सका था।

फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन पर भी सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 17 अगस्त 2026 को मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) के पत्र में JPSC-JSSC से जुड़े अनियमितताओं और कदाचार के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की दिशा में कार्रवाई का उल्लेख किया था।

उनका आरोप है कि इसके बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि मामलों की त्वरित सुनवाई का निर्णय लिया गया था, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ी।

परीक्षा सुधार समिति को लेकर भी सरकार पर निशाना

रघुवर दास ने JPSC और JSSC में परीक्षा सुधार के लिए गठित समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए व्यापक अध्ययन हेतु समिति बनाने की घोषणा की थी और उसे दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी।

पूर्व मुख्यमंत्री का दावा है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने के करीब है, लेकिन समिति की अब तक एक भी बैठक नहीं हुई है। उन्होंने इसे छात्रों के भविष्य के प्रति सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़ा करने वाला बताया।

11वीं-13वीं JPSC परीक्षा के अभ्यर्थियों को लेकर भी सवाल

रघुवर दास ने 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा में 40वीं रैंक प्राप्त करने वाले रवि कुमार का उदाहरण देते हुए कई गंभीर आरोपों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार रवि कुमार के खिलाफ उत्तर प्रदेश और हरियाणा में FIR दर्ज है तथा उसे कथित तौर पर सॉल्वर गैंग से जोड़ा गया है। उन्होंने इन मामलों में इनाम घोषित होने और अग्रिम जमानत पर होने का भी दावा किया।

उन्होंने हरियाणा के एक अभ्यर्थी विक्की के 37वीं रैंक प्राप्त करने तथा रवि कुमार, दिनेश प्रजापति और विक्की के बीच कथित संबंधों का भी जिक्र किया।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित व्यक्तियों का पक्ष भी इस बयान में उपलब्ध नहीं है।

14वीं JPSC में बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों पर जांच की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 14वीं JPSC परीक्षा में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 418 अभ्यर्थियों के सफल होने से संबंधित खबरें मीडिया में सामने आई थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि इस मामले की अब तक जांच क्यों नहीं की गई।

रघुवर दास ने सरकार से पूछा कि आखिर ऐसे मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है और किन लोगों को बचाया जा रहा है।

निष्पक्ष CBI जांच की मांग

रघुवर दास ने JPSC-JSSC से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष CBI जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में किसी भी स्तर पर दोषियों को बचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि CBI जांच से जांच की निष्पक्षता को लेकर उठने वाले सवालों को दूर किया जा सकता है और यदि अनियमितताओं में कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।