रामनवमी अवकाश विवाद: झारखंड में रामनवमी की छुट्टी बदलेगी? शिक्षक संघ की राज्य सरकार से बड़ी मांग...

Ranchi: इसी पत्र में संघ ने अन्य मुद्दों को भी उठाया है, जिसमें गर्मी के मद्देनजर स्कूल समय-सारणी में बदलाव की मांग भी शामिल है. संघ ने 1 अप्रैल से 30 जून तक संचालित वर्तमान समय को छात्रों और शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण बताते हुए इसमें संशोधन का सुझाव दिया है.
 

Ranchi: झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ (JPSS) ने रामनवमी के मौके पर अवकाश की तिथि में बदलाव की मांग सरकार से की है. संघ ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव के साथ-साथ कार्मिक विभाग को पत्र लिखकर 26 मार्च 2026 के निर्धारित अवकाश को संशोधित कर 27 मार्च 2026 करने का आग्रह किया है.

संघ का कहना है कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से यह बदलाव जरूरी है, ताकि अधिक से अधिक लोग पर्व में शामिल हो सके. संघ के प्रदेश अध्यक्ष आनंद किशोर साहू और महासचिव बलजीत कुमार सिंह ने बताया कि रामनवमी, झारखंड में विशेष महत्व का पर्व है, जिसे पूरे उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाता है. ऐसे में अवकाश की तिथि का व्यावहारिक होना जरूरी है. उन्होंने सरकार से इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द निर्णय लेने की अपील की है.

इसी पत्र में संघ ने अन्य मुद्दों को भी उठाया है, जिसमें गर्मी के मद्देनजर स्कूल समय-सारणी में बदलाव की मांग भी शामिल है. संघ ने 1 अप्रैल से 30 जून तक संचालित वर्तमान समय को छात्रों और शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण बताते हुए इसमें संशोधन का सुझाव दिया है.

वहीं संघ का कहना है कि इस अवधि में तापमान काफी बढ़ जाता है और दोपहर 1 बजे तक विद्यालय संचालन स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है. ऐसे में पहले की तरह स्कूलों का संचालन सुबह 6:30 बजे से 11:30 बजे तक करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि भीषण गर्मी से राहत मिल सके.

संघ ने यह भी तर्क दिया कि झारखंड में पहले से ही RTE मानकों से अधिक कार्य दिवस और शैक्षणिक घंटे संचालित हो रहे हैं, इसलिए समय में आंशिक बदलाव से पढ़ाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा. इसके साथ ही शनिवार को पुनः आधे दिन (हाफ डे) स्कूल संचालन की व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई है.

इसके अलावा संघ ने आगामी जनगणना 2027 में शिक्षकों की संभावित ड्यूटी को देखते हुए ग्रीष्मावकाश के बदले अतिरिक्त अर्जित अवकाश (EL) देने की भी मांग की है. संघ का मानना है कि अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों के कारण शिक्षकों को यह सुविधा मिलनी चाहिए.

संघ की सभी मांगें छात्र और शिक्षक हित को ध्यान में रखते हुए रखी गई हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करेगी और जल्द ही आवश्यक निर्णय लेगी, ताकि शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाया जा सके: बलजीत कुमार सिंह, महासचिव, झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ