रेस्क्यू किए गए बच्चों की होगी काउंसलिंग, पढ़ाई लिखाई के साथ मिलेंगी सरकारी सुविधाएं.. माता-पिता की तलाश तेज...
Ranchi: मानव तस्करों के चुंगल से आजाद हुए मासूम बच्चों को उनके माता-पिता तक पहुंचाने को लेकर पुलिस का प्रयास तेज हो गया है. वहीं दूसरी तरफ रांची जिला प्रशासन ने भी बरामद सभी बच्चों को उत्पीड़न के गमों को भुलाने के लिए डॉक्टरों की मदद ले रही है.
Jan 20, 2026, 17:43 IST
Ranchi: जिला पुलिस द्वारा मानव तस्करों के चुंगल से आजाद करवाए गाए बच्चों के पुनर्वास को लेकर डीसी रांची ने पहल शुरू कर दी है. इसके लिए कई निर्देश जारी किए हैं. जिन बच्चों को रेस्क्यू किया गया, वे सभी बच्चे बेहद प्रताड़ना के शिकार हुए हैं. ऐसे में उन्हें मनोचिकित्सकों से काउंसलिंग करवाना बेहद जरूरी है.
मनोचिकित्सक करेंगे काउंसिलिंग
मानव तस्करों के चुंगल से आजाद हुए मासूम बच्चों को उनके माता-पिता तक पहुंचाने को लेकर पुलिस का प्रयास तेज हो गया है. वहीं दूसरी तरफ रांची जिला प्रशासन ने भी बरामद सभी बच्चों को उत्पीड़न के गमों को भुलाने के लिए डॉक्टरों की मदद ले रही है.
रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने बताया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों को मनोचिकित्सकों द्वारा काउंसलिंग दी जाएगी. साथ ही पढ़ाई-लिखाई के लिए सरकारी सुविधाओं का पूरा लाभ मिलेगा.
डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल दिशा-निर्देश दिए हैं.
रांची डीसी ने बताया कि परिवार से मिलने तक सभी बच्चे जिला प्रशासन की निगरानी में सुरक्षित शेल्टर होम में रहेंगे. वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि बच्चों की देखभाल और मनोवैज्ञानिक सहायता सुनिश्चित हो सके.
बच्चों को ट्रॉमा से उबरने के लिए विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे. मनोचिकित्सक डॉक्टर इन सत्रों का संचालन करेंगे, जिसमें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस रहेगा. इसके अलावा बच्चों को सरकारी योजनाओं के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी.
स्कूल में करवाया जाएगा नामांकन
डीसी रांची ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए नजदीकी स्कूलों में उनका दाखिला कराया जाएगा. साथ ही मिड-डे मील, यूनिफॉर्म और किताबें जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
माता-पिता की तलाश में तेजी
रेस्क्यू बच्चों के माता-पिता या अभिभावकों की खोज के लिए प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है. विभिन्न जिलों और राज्यों में सूचनाएं साझा की जा रही हैं. परिवार का पता लगाने तक बच्चे सुरक्षित शेल्टर होम में रहेंगे. जहां 24x7 निगरानी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं. रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. प्रक्रिया पूरी होने तक कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सभी विभाग समन्वय बनाकर काम करेंगे.
जिला प्रशासन की सक्रिय भूमिका
इस मामले में चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (CWC), पुलिस और सामाजिक कल्याण विभाग की संयुक्त टीम काम कर रही है. डीसी के आदेश पर शेल्टर होम्स की क्षमता बढ़ाई गई है और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी त्वरित कार्रवाई से बच्चों का सामाजिक पुनर्वास आसान होगा.
अंश और अंशिका बने राह
बता दें कि बीते रविवार को रांची पुलिस ने एक बड़े शातिर बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश किया था. पुलिस ने गिरोह के पास से एक दर्जन बच्चों को बरामद किया. साथ ही बच्चों की चोरी करने वाले गिरोह के 16 लोगों को गिरफ्तार भी किया था. मामले का खुलासा करते हुए एसएसपी राकेश रंजन ने बताया कि रांची के धुर्वा से अंश, अंशिका के लापता होने के बाद रांची पुलिस ने रांची समेत अन्य जिलों और राज्यों में बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया. जिसमें बच्चा चोर गिरोह का खुलासा हुआ.
इस गिरोह की पहचान गुलगुलिया गैंग के रूप में हुई है. गिरोह पिछले दस वर्षों से बच्चा चोरी करने में लगा हुआ है. गुलगुलिया गैंग कई बच्चों को बेच चुका है. इस गैंग के तार बिहार, ओडिशा, बंगाल और यूपी जुड़ा मिला है. एसएसपी ने बताया कि इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों की तलाश में पुलिस की स्पेशल टीम लगी हुई है. जल्द ही पुलिस न सिर्फ लापता बच्चों को बरामद करेगी, बल्कि गिरोह में शामिल अन्य को भी गिरफ्तार कर जेल भेजेगी. एसएसपी ने बताया कि बरामद बच्चों को बोकारो, धनबाद, चाईबासा और रांची से चोरी किया गया था. रांची पुलिस बरामद बच्चों के परिजनों की तलाश कर रही है