लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा पहली प्राथमिकता, श्रावणी मेले के लिए 105 KM कांवरिया पथ पर हाई सिक्योरिटी
Ranchi: श्रावणी मेला 2026 को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद कर दी है. लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए 105 किलोमीटर लंबे कांवरिया पथ पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. पुलिस और जिला प्रशासन ने पूरे मार्ग पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ निगरानी बढ़ा दी है ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न हो सके.
मेला क्षेत्र और कांवरिया पथ पर जगह-जगह पुलिस चेक पोस्ट, अस्थायी सहायता केंद्र और कंट्रोल रूम बनाए गए हैं. संवेदनशील स्थानों पर विशेष पुलिस बल की तैनाती की गई है, जबकि भीड़ प्रबंधन के लिए CCTV कैमरों, ड्रोन निगरानी और क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को भी सक्रिय रखा गया है.
सावन और श्रावणी मेले को लेकर पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी उपायुक्तों, वरीय पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को विस्तृत सतर्कता एवं सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं. पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस मेले के दौरान लाखों कांवरियों और श्रद्धालुओं के आने की संभावना है.
पत्र में बताया गया है कि विशेष रूप से 3, 10, 17 (नागपंचमी) और 24 अगस्त को पड़ने वाले चौथे सोमवार पर भारी भीड़ रहने का अनुमान है. इसके अलावा 29 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर देवघर- दुम्मा स्थित झारखंड प्रवेश द्वार पर होने वाले श्रावणी मेला उद्घाटन समारोह के कारण भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना जताई गई है. ऐसे में पुलिस को तमाम इंतजाम करने की हिदायत दी गई है.
105 किलोमीटर पथ ओर विशेष नजर
श्रावणी मेले के दौरान शिवभक्त कांवड़िये बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर लगभग 105 किलोमीटर पैदल यात्रा करते हुए देवघर पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पित करते हैं. इस दौरान वे कई जिलों से होकर गुजरते हैं, इसलिए पूरे मार्ग में सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है. साथ ही मेले में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पैदल, सड़क और रेल मार्ग से देवघर पहुंचते हैं. विशेष रूप से सोमवार को जलाभिषेक का अधिक धार्मिक महत्व होने के कारण लगभग तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना रहती है.
इस दौरान बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम समेत देश के कई राज्यों और नेपाल, भूटान तथा बांग्लादेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवघर और बासुकीनाथ पहुंचते हैं. जबकि अंतिम सोमवार 24 अगस्त 2026 को सबसे अधिक भीड़ रहने की संभावना जताई गई है. पुलिस मुख्यालय ने इसे देखते हुए हर एहतियात बरतने के निर्देश दिए है. सुल्तानगंज से लेकर देवघर तक के पथ पर विशेष सुरक्षा इंतजाम करने के लिए बिहार पुलिस से भी सहयोग लिया जा रहा है.
कांवड़िया पथ पर सुरक्षा के प्रमुख निर्देश
- कांवड़िया पथ पर पर्याप्त संख्या में पुलिस गश्ती दल की तैनाती.
- मार्ग के आसपास स्थित गांवों में असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी तथा फरार और वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी.
- अपराध नियंत्रण के लिए विभिन्न स्थानों पर चेक पोस्ट स्थापित कर नियमित जांच.
- सुनसान, अंधेरे और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर समुचित प्रकाश व्यवस्था.
- पुलिस बल की सक्रियता पर लगातार निगरानी रखना.
- बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, ट्रेनों तथा सार्वजनिक परिवहन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के विशेष इंतजाम.
- मंदिर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड एवं भीड़ वाले स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे, शौचालय, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था.
- कांवड़िया मार्ग पर झुके या कम ऊंचाई वाले बिजली के तारों की मरम्मत तथा फ्लोरोसेंट टेप, रंगीन कपड़े या रिफ्लेक्टर लगाकर दुर्घटनाओं की रोकथाम.
- श्रद्धालुओं की कतार में घुसपैठ करने वालों पर निगरानी.
- कांवड़ियों के वेश में नशा खिलाकर या अन्य तरीकों से ठगी करने वाले संदिग्ध व्यक्तियों पर विशेष नजर.
- महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और छिनतई जैसी घटनाओं की रोकथाम.
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बच्चों के लिए गुमशुदगी एवं खोया-पाया सहायता केंद्र की स्थापना.
- आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ कार्रवाई.
- सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले असामाजिक तत्वों पर निगरानी और त्वरित कार्रवाई।
- भगदड़ जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष तैयारी.
- प्रमुख मार्गों पर 24×7 एंबुलेंस, डॉक्टर, दवाइयों और जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता.
- यातायात व्यवस्था को सुगम एवं व्यवस्थित बनाना.
- श्रद्धालुओं के विश्राम स्थलों पर शेड एवं सुरक्षा व्यवस्था.
- रास्ते मे पड़ने वाले होटल और धर्मशालाओं की सुरक्षा जांच.
- अत्यधिक भीड़ और बारिश के कारण होने वाली गंदगी की नियमित सफाई.
- खाद्य पदार्थों में मिलावट और नकली सामान की जांच के लिए विशेष अभियान.
- मंदिर परिसर, कांवरिया पथ और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में संदिग्ध व्यक्तियों तथा लावारिस वस्तुओं पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं.
पुलिस मुख्यालय के पत्र में श्रावणी मेला के दौरान पूर्व में हुई कई महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख किया गया है, जिनसे सीख लेकर इस वर्ष सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है.
- वर्ष 2014 में श्रावणी मेला के दौरान जलार्पण व्यवस्था को लेकर पंडा समाज और मंदिर प्रबंधन के बीच विवाद हुआ था. विरोध-प्रदर्शन के कारण कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई थी, जिससे प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी थी.
- वर्ष 2014 में देवघर शहर में टोल टैक्स वसूली के लिए बनाए गए आठ पोस्टों पर फर्जी रसीद काटने और भीड़ प्रबंधन में अव्यवस्था की शिकायतें मिली थीं. श्रद्धालुओं को भीड़ के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा था.
- 10 अगस्त 2015 को कतारबद्ध कांवड़ियों के बीच भगदड़ मचने से 10 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी तथा करीब 20 लोग घायल हुए थे. यह घटना श्रावणी मेला के इतिहास की सबसे बड़ी दुर्घटनाओं में से एक मानी जाती है.
- श्रावणी मेला के दौरान कुछ असामाजिक तत्व अनाधिकृत रूप से मंदिर परिसर और गर्भगृह में प्रवेश कर चोरी एवं छिनतई जैसी घटनाओं को अंजाम देते रहे हैं. इसलिए इस बार विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं.
दुमका जिले से जुड़े प्रमुख मामले
- वर्ष 2008 में बासुकीनाथ मंदिर के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान दुकानदारों और प्रशासन के बीच हिंसक झड़प हुई थी. सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था.
- वर्ष 2011 ने बासुकीनाथ मंदिर में प्रवेश को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिसे वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से शांत कराया गया.
- जुलाई 2023 में दुमका-देवघर मार्ग पर नया रेफरल अस्पताल के पास जलार्पण के लिए आए जमशेदपुर के कुख्यात अपराधी अमरनाथ सिंह की बाइक सवार अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.
श्रावणी मेला जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में केवल भीड़ प्रबंधन ही नहीं, बल्कि अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, आतंकवाद एवं नक्सल गतिविधियों पर नजर, चिकित्सा सुविधा, यातायात, स्वच्छता और अफवाह रोकने जैसी व्यवस्थाओं पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है. पूर्व की घटनाओं से सबक लेते हुए इस बार प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं.