झारखंड की राजनीति के वरिष्ठ नेता माधव लाल सिंह का निधन, समर्थकों में गहरा दुख

Jharkhand: हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची रेफर कर दिया. इसके बाद उन्हें रांची स्थित पल्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान आज बुधवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर फैलते ही गोमिया सहित पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई. 
 

Jharkhand: झारखंड के पूर्व मंत्री और गोमिया से पूर्व विधायक माधव लाल सिंह का निधन हो गया. उन्होंने रांची के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली. बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और हाल ही में स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची रेफर कर दिया. इसके बाद उन्हें रांची स्थित पल्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान आज बुधवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर फैलते ही गोमिया सहित पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई. 

पूर्व मंत्री के निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई. कई नेताओं और समर्थकों ने उनके निधन को झारखंड की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया है. 

चार बार गोमिया से विधायक रहे थे माधवलाल सिंह

माधवलाल सिंह ने गोमिया विधानसभा क्षेत्र का चार बार प्रतिनिधित्व किया था. वे वर्ष 1985, 1990, 2000 और 2009 में विधायक निर्वाचित हुए थे. बिहार और बाद में झारखंड की राजनीति में उन्होंने एक सशक्त और जनप्रिय नेता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई थी. 

सादगी और जनसेवा से बनाई अलग पहचान

मंत्री रहते हुए भी वे सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के लिए जाने जाते थे. आम लोगों के बीच वे “माधव बाबू” के नाम से बेहद लोकप्रिय थे.

ग्रामीण इलाकों में थी मजबूत पकड़

ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक उनकी गहरी पकड़ थी. गोमिया क्षेत्र के विकास, जनसमस्याओं के समाधान और आम लोगों से सीधे जुड़ाव के कारण वे जनता के दिलों में विशेष स्थान रखते थे. उनके निधन की सूचना मिलते ही समर्थकों, शुभचिंतकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं का पल्स अस्पताल और उनके आवास पर पहुंचना शुरू हो गया. कई समर्थक फोन पर बात करते हुए भावुक हो उठे.

निधन से गोमिया समेत पूरे क्षेत्र में शोक की लहर

विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और क्षेत्र के लोगों ने उनके निधन को राज्य की राजनीति और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया है. उनके निधन से गोमिया क्षेत्र में शोक और मायूसी का माहौल है.