मेहनत की मिसाल बनी शिवांगी: छाता बेचने वाले पिता की बेटी ने जैक बोर्ड परीक्षा में 498 अंक हासिल कर पूरे राज्य में किया टॉप
Simdega: खेल की नगरी के रूप में प्रसिद्ध सिमडेगा की बेटियां अब शिक्षा के क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं. इसका ताजा उदाहरण कोलेबिरा प्रखंड के बरसलोया गांव की प्रतिभाशाली छात्रा शिवांगी कुमारी हैं. जिन्होंने झारखंड जैक मैट्रिक परीक्षा में 99.60 प्रतिशत (498 अंक) हासिल कर स्टेट टॉपर बनकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है.
शिवांगी कुमारी, रामकिशोर साहू और छोटकी देवी की पुत्री है. उनके पिता स्थानीय बाजार में किराने की दुकान लगाकर और छाता आदि बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी है. साधारण परिवार में पली-बढ़ी शिवांगी ने अपनी मेहनत, लगन और अनुशासन के दम पर यह बड़ी सफलता हासिल की है.
अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और संस्कृत में लाई शत प्रतिशत अंक
शिवांगी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बरसलोया स्थित शांतिनिकेतन पब्लिक स्कूल से पांचवीं कक्षा तक प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने प्रस्तावित उच्च विद्यालय लचरागढ़ में छठी से दसवीं तक की पढ़ाई की. शिवांगी का परीक्षा केंद्र एसएस प्लस टू उच्च विद्यालय बानो था, जहां से उन्होंने राज्य में शीर्ष स्थान प्राप्त किया. विषयवार अंकों की बात करें तो उन्होंने अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और संस्कृत में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि हिंदी और सामाजिक विज्ञान में 98-98 अंक हासिल किए. उनकी यह उपलब्धि निरंतर मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य का परिणाम है.
शिवांगी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और अभिभावकों को दिया है. उन्होंने बताया कि स्कूल में नियमित रूप से चलने वाली विशेष कक्षाओं ने उनकी तैयारी को मजबूत किया. साथ ही कुलदीप सर सहित अन्य शिक्षकों का मार्गदर्शन उन्हें लगातार मिलता रहा. शिवांगी के अनुसार, उनकी सफलता में सेल्फ स्टडी की सबसे बड़ी भूमिका रही. उन्होंने परीक्षा की तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखी और मोबाइल का उपयोग केवल पढ़ाई के लिए किया.
जज बनना चहती है टॉपर शिवांगी
भविष्य को लेकर शिवांगी के सपने भी बड़े हैं. वह आगे चलकर लॉ की पढ़ाई करना चाहती है और न्यायिक सेवा में जाकर जज बनकर गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को न्याय दिलाने का लक्ष्य रखती है. वर्तमान में मैट्रिक परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए शिवांगी ने संदेश दिया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. नियमित पढ़ाई, आत्मविश्वास और सेल्फ स्टडी के बल पर ही लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.