ST दर्जा बनाम सत्ता की जंग: असम चुनाव 2026 में चाय जनजातियों पर टिकी निगाहें, JMM के 16 उम्मीदवारों की अग्निपरीक्षा

JMM In Assam Election: JMM की पूरी चुनावी बिसात असम के करीब 70 लाख चाय बागान श्रमिकों यानी ‘चाय जनजातियों’ के इर्द-गिर्द बिछी है. ये वो लोग हैं जिनका मूल नाता झारखंड के छोटानागपुर पठार से है. प्रचार के दौरान हेमंत सोरेन ने इन श्रमिकों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने के संवेदनशील मुद्दे को हवा दी. 
 

JMM In Assam Election: असम विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल 2026 को संपन्न हुए मतदान के बाद 4 मई 2026 को मतगणना जारी है, जिसमें भाजपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ ही झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है. असम में 126 विधानसभा सीटों पर वोटिंग हुई थी और अब राज्य की सत्ता का रुख साफ होता दिख रहा है.

चाय बागान समुदाय और ST दर्जा का मुद्दा

चाय बागान में काम करने वाले बहुसंख्यक समुदाय को असम में ‘चाय जनजाति’ (Tea Tribes/Adivasi) कहा जाता है. यह समुदाय ऐतिहासिक रूप से राज्य की अर्थव्यवस्था और कृषि गतिविधियों का हिस्सा रहा है. चुनाव से पहले यह मुद्दा गरमा गया था कि इन समुदायों को ST (अनुसूचित जनजाति) का दर्जा देने से उन्हें शिक्षा, रोजगार और आरक्षण जैसे संवैधानिक लाभ मिलेंगे.

राज्य सरकार ने पिछले साल छह प्रमुख समुदायों के ST दर्जा पर सकारात्मक सिफारिश की थी, जिसमें चाय जनजाति भी शामिल थी. इस प्रस्ताव को आगे केंद्र सरकार तक भेजा जाना था. हालांकि इससे पहले ही विभिन्न जनजातीय समूहों में विरोध और समर्थन दोनों तरह की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई थीं.

JMM का चुनावी दांव

JMM ने असम के चुनावी मैदान में लगभग 21 उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिनमें से लगभग 16 उम्मीदवारों पर विशेष जोर चाय बागान और आदिवासी वोटबैंक को प्रभावित करने का था. पार्टी ने दावा किया कि उनके उम्मीदवार इन समुदायों के हितों के मुद्दों का प्रतिनिधित्व करेंगे और उनकी आवाज को विधानसभा में मजबूत करेंगे.

पार्टी प्रमुख और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चुनाव से पहले कहा था कि उनके प्रत्याशी स्थानीय आदिवासी समुदायों, विशेषकर चाय बागान कार्यकर्ताओं के मतों को जोड़ेंगे और उनकी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को मुख्यधारा की राजनीति में लाएंगे.

कुलीन राजनीत‍िक परिदृश्य

जहां भाजपा और उसके सहयोगी NDA गठबंधन राज्य में सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में जुटे हैं, वहीं कांग्रेस-आधारित विपक्षी मोर्चा भी अपना प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा है. JMM की एंट्री इस समीकरण में एक नई दिशा लाई है. खासकर उन इलाकों में जहां चाय जनजाति और अन्य आदिवासी समुदायों की संख्या महत्वपूर्ण है.

चुनाव परिणामों की मतगणना जारी है, जिसमें अभी तक भाजपा को मजबूत पकड़ दिखाई दे रही है, लेकिन कई जिलों में परिणाम अब भी आ रहे हैं और असम की नई सरकार का गठन किसके हाथों में होगा, यह आने वाले घंटों में और स्पष्ट होगा.

विश्लेषण — क्या बदलेगा समीकरण?

विश्लेषकों का मानना है कि चाय जनजाति और अन्य छोटे आदिवासी समूहों का समर्थन JMM को कुछ खास क्षेत्रों में लाभ पहुंचा सकता है, खासकर उन विधानसभा क्षेत्रों में जहां यह वोट सिक्का की तरह काम कर सकता है. परन्तु, यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यह समर्थन बीजेपी-केंद्रित या कांग्रेस-संघ की मजबूत धार को टक्कर देने के लिए काफी होगा या नहीं.

चुनावी दंगल में ST दर्जा का मुद्दा तथा JMM का व्यापक वोटिंग आधार असम की राजनीति में नए समीकरण और संभावित गठबंधन की दिशा भी तय कर सकता है. आने वाले दिन परिणामों की पूरी तस्वीर पर राजनीतिक विश्लेषण और रणनीतियाँ उजागर होंगी.