सुप्रीम कोर्ट से भी महादेव उरांव को झटका, आदिवासी जमीन मामले में SLP

Ranchi: इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने 12 परिवारों को राहत देते हुए अतिक्रमण हटाने का आदेश वापस लिया था और महादेव उरांव पर 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था. मामला जमीन के लेनदेन और न्यायालय के समक्ष तथ्यों के खुलासे को लेकर भी चर्चा में रहा है.
 

Ranchi: मधुकम के शिव-दुर्गा मंदिर रोड स्थित आदिवासी जमीन से जुड़े मामले में जमीन मालिक महादेव उरांव को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च अदालत ने मामले में दायर स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान जमीन बेचने के बाद वहां रह रहे परिवारों को हटाने के लिए अदालत का रुख करने पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।

जमीन बेचने के बाद बेदखली की मांग पर कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जमीन के लेनदेन और बाद में वहां रह रहे परिवारों को हटाने की मांग का मुद्दा उठा। अदालत ने पूरे मामले पर सख्त टिप्पणी की और संकेत दिया कि घटनाक्रम जालसाजी की श्रेणी में आ सकता है। कोर्ट की टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता की ओर से SLP वापस लेने का आग्रह किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

हाईकोर्ट पहले ही दे चुका है 12 परिवारों को राहत

इससे पहले 31 जुलाई 2026 को झारखंड हाईकोर्ट ने मधुकम में करीब 50-60 वर्षों से रह रहे 12 गैर-आदिवासी परिवारों को राहत दी थी। अदालत ने अतिक्रमण हटाने से संबंधित पहले के आदेश को वापस ले लिया था। साथ ही महादेव उरांव पर 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। यह राशि प्रभावित 12 परिवारों को एक-एक लाख रुपये देने का निर्देश दिया गया था।

एक करोड़ से अधिक के लेनदेन का मामला

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने जमीन से जुड़े मामले में एक करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय लेनदेन की बात सामने आई थी। अदालत ने आरोपों और महत्वपूर्ण तथ्यों के कथित तौर पर पूरी तरह सामने नहीं रखे जाने को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने यह भी माना कि प्रभावित 12 परिवारों को मूल मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया था।

50-60 साल से रह रहे परिवारों का दावा

प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे मधुकम इलाके में कई दशकों से रह रहे हैं। उनका दावा है कि उन्होंने जमीन के लिए संबंधित जमीन मालिक को भुगतान किया था और इसके बाद वहां मकान बनाकर रहने लगे। परिवारों ने अचानक उन्हें अतिक्रमणकारी बताकर हटाने की कार्रवाई का विरोध किया था।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या?

SLP खारिज होने के बाद महादेव उरांव की ओर से हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने की कोशिश को भी झटका लगा है। मामले में जमीन के लेनदेन, लंबे समय से रह रहे परिवारों के अधिकार और न्यायालय के समक्ष सभी तथ्यों को रखने का मुद्दा अहम बना हुआ है।