15.5 फीट ऊंचे गणेश जी का भव्य रूप, हाथ के लड्डू पर होगी बोली

Jamshedpur: ‘लड्डू वाले गणेश’ की अनोखी परंपरा एक बार फिर आकर्षण का केंद्र बनने जा रही है. 15.5 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा के हाथ में करीब 11 किलो का विशाल लड्डू रखा जाएगा. इस खास लड्डू को प्राप्त करने के लिए बोली लगाई जाएगी.
 

Jamshedpur: शहर के कीताडीह स्थित गणेश पूजा मैदान में इस बार भगवान गणेश की 15.5 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। हालांकि प्रतिमा के साथ भगवान गणेश के बाएं हाथ में विराजमान 11 किलो का विशाल लड्डू भी लोगों का खास ध्यान खींच रहा है। यह लड्डू न केवल पूजा की विशेषता है, बल्कि इससे जुड़ी करीब चार दशक पुरानी नीलामी की परंपरा भी चर्चा में है।

कीताडीह ब्यॉज क्लब की ओर से हर वर्ष की तरह इस बार भी भगवान गणेश को अर्पित किए गए विशेष लड्डू की नीलामी की जाएगी। शुक्रवार को शाम 5 बजे से 6 बजे के बीच 11 किलो के इस लड्डू की बोली लगाई जाएगी। खास बात यह है कि इस नीलामी में कोई भी श्रद्धालु हिस्सा लेकर बोली लगा सकता है।

11 किलो के लड्डू के लिए लगेगी बोली

कीताडीह गणेश पूजा की सबसे खास परंपराओं में से एक भगवान गणेश के हाथ में रखे लड्डू की नीलामी है। इस बार करीब 11 किलो वजन का विशेष लड्डू तैयार कराया गया है। इसे साकची की प्रसिद्ध जलेबी लाइन स्थित एक दुकान से विशेष रूप से तैयार कराया गया है।

पूजा के बाद इस लड्डू को प्रसाद के रूप में पाने के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहता है। इसी कारण समिति की ओर से इसकी नीलामी कराई जाती है। नीलामी में सबसे अधिक बोली लगाने वाले श्रद्धालु को यह विशेष प्रसाद अपने घर ले जाने का अवसर मिलता है।

1983 से चली आ रही है लड्डू की बोली

कीताडीह ब्यॉज क्लब के कोषाध्यक्ष आकाश शास्त्री के अनुसार, यहां भगवान गणेश के लड्डू की बोली लगाने की परंपरा 1983 से चली आ रही है। यानी यह परंपरा चार दशक से अधिक समय से गणेश पूजा का हिस्सा बनी हुई है।

अब तक इस लड्डू के लिए अधिकतम 71 हजार रुपये की बोली लग चुकी है। ऐसे में इस बार शुक्रवार को होने वाली नीलामी में बोली कितनी ऊंचाई तक पहुंचती है, इस पर श्रद्धालुओं और आयोजन समिति की नजर रहेगी।

प्रसाद पाने की होड़ से शुरू हुई परंपरा

समिति के कोषाध्यक्ष आकाश शास्त्री ने बताया कि पूजा समाप्त होने के बाद लड्डू को प्रसाद के रूप में पाने को लेकर समिति के सदस्यों और श्रद्धालुओं में काफी उत्साह रहता था। इसी उत्साह और लड्डू को लेकर होने वाली होड़ को देखते हुए समिति ने इसकी बोली लगाने की परंपरा शुरू की।

समय के साथ यह परंपरा गणेश पूजा का अहम हिस्सा बन गई और आज भी श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ इसमें हिस्सा लेते हैं।

फीता काटकर नहीं, पारंपरिक तरीके से होती है पूजा

कीताडीह ब्यॉज क्लब की एक और खासियत यह है कि यहां पूजा की शुरुआत किसी औपचारिक फीता कटिंग समारोह से नहीं की जाती। समिति पारंपरिक तरीके से धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ को प्राथमिकता देती है।

गणेश पूजा के आयोजन को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारी और सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आयोजन में अध्यक्ष धरम सिंह वालिया, महासचिव कृष्णा रेड्डी, कोषाध्यक्ष आकाश शास्त्री के साथ कमेटी मेंबर गणेश चौहार, सोनी शर्मा, प्रदीप यादव और हेमंत राव समेत पूरी टीम जुटी हुई है।

इस बार की नीलामी पर सबकी नजर

15.5 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा, हाथ में 11 किलो का विशाल लड्डू और 1983 से चली आ रही बोली की परंपरा ने कीताडीह की गणेश पूजा को खास बना दिया है। अब शुक्रवार शाम होने वाली नीलामी में 11 किलो के इस महालड्डू की बोली कितनी दूर तक जाती है, यह देखना दिलचस्प होगा। पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए श्रद्धालुओं में इस बार भी बोली को लेकर खास उत्सुकता बनी हुई है।