अंग्रेजों ने दी थी इस शहर को नई पहचान, कभी कालीमाटी के नाम से जाना जाता था...
Jharkhand Desk: हमारे देश में ज्यादातर शहरों, सड़कों और स्थानों के नाम किसी महापुरुष, क्रांतिकारियों, राजनेताओं और शहीदों के नाम पर रखे गए हैं और इन्हीं नामों में छिपा हुआ है एक नाम झारखंड का औद्योगिक शहर जमशेदपुर. जमशेदपुर जिसका दूसरा नाम टाटानगर भी है और इसे लोग पूर्वी सिंहभूम जिले के नाम से भी जानते हैं. भारत के झारखंड राज्य का एक शहर है. जमशेदजी टाटा ने ही इस शहर में एशिया का पहला स्टील प्लांट लगाया था. साल 1919 में, भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफ़ोर्ड ने इस शहर का नाम जमशेदपुर रखा था. इससे पहले, यह शहर साकची नाम से जाना जाता था. साकची पुर्व में एक आदिवासी गाँव हुआ करता था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका नाम कभी कालीमाटी हुआ करता था? इस नाम के पीछे की कहानी बेहद मनोरंजक है.
कालीमाटी क्यों कहलाता था शहर?
शहर के पुराने नाम कालीमाटी की जड़ें उसकी जमीन से जुड़ी हुई थीं. यहां की मिट्टी काली और उपजाऊ थी, इसी कारण से इसे कालीमाटी कहा जाता था. आसपास छोटे-छोटे गांव और जंगल थे और लोग खेती-बाड़ी पर निर्भर रहते थे. धीरे-धीरे यहां लौह अयस्क और दूसरे खनिजों की खोज होने लगी, जिसने इस क्षेत्र का भविष्य बदल दिया.
जमशेदजी टाटा और उद्योग की शुरुआत बीसवीं सदी की शुरुआत में जब भारत में औद्योगिक क्रांति की नींव रखी जा रही थी, तब जमशेदजी टाटा ने यहां लौह और इस्पात उद्योग लगाने का सपना देखा. उन्होंने कालीमाटी को चुना क्योंकि यहां प्राकृतिक संसाधन बहुत अधिक मात्रा में थे. 1907 में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (आज की टाटा स्टील) की स्थापना हुई और यह छोटा-सा गांव धीरे-धीरे एक आधुनिक औद्योगिक नगर में बदलने लगा और ये गांव से शहर कहा जाने लगा.
नाम बदलने का कारण
ब्रिटिश राज के फैसले से इस शहर का नाम कालीमाटी से बदलकर जमशेदपुर रखा गया. यह फैसला ब्रिटिश ने जमशेदजी टाटा के योगदान को देखते हुए लिया. 1919 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने आधिकारिक रूप से इस शहर का नाम जमशेदजी टाटा के सम्मान में, जमशेदपुर घोषित किया. यह बदलाव केवल नाम का ही नहीं था, बल्कि भारत के औद्योगिक इतिहास में एक नई पहचान का प्रतीक था.
टाटानगर और पूर्वी सिंहभूम का महत्व
उस वक़्त रेलवे ने शहर के विकास में बड़ी भूमिका निभाई. जमशेदपुर का रेलवे स्टेशन टाटानगर के नाम से प्रसिद्ध हुआ, क्योंकि यहां से टाटा स्टील की फैक्ट्री से सामान देशभर में भेजा जाता था. वहीं प्रशासनिक दृष्टि से यह क्षेत्र पूर्वी सिंहभूम जिला कहलाता है. यानी एक ही शहर को लोग अलग-अलग नामों से जानते हैं – कभी जमशेदपुर, कभी टाटानगर और कभी पूर्वी सिंहभूम.
आज का जमशेदपुर
आज जमशेदपुर भारत का ‘स्टील सिटी’ कहलाता है. यहां केवल उद्योग ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल सुविधाओं के लिए भी लोग आते हैं. शहर का नाम भले ही समय के साथ बदला हो, लेकिन इसकी पहचान मेहनत, उद्योग और विकास के प्रतीक के रूप में हमेशा कायम रहेगी.