दुनिया के लिए चिप बनाने को तैयार है देश...भारत 2025 तक बनेगी पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप
Jharkhand Desk: चिप्स-अर्थात् सेमीकंडक्टर-आज की तकनीकी दुनिया की रीढ़ हैं. मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, 5G नेटवर्क, स्वास्थ्य उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक सेना उपकरण-सभी में सेमीकंडक्टर हर जगह उपयोग हो रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने "इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन" की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य देश को चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और परीक्षण में आत्मनिर्भर बनाना है.
अब इसी की तर्ज पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता बाबूलाल मरांडी ने ‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशी अभियान की महत्ता पर जोर देते हुए एक ट्वीट में सेमीकंडक्टर चिप्स के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर चिप्स आज वैश्विक अर्थव्यवस्था का ईंधन हैं, जो मोबाइल, कार, लैपटॉप से लेकर रॉकेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण हैं.
बाबूलाल मरांडी ने बताया कि 2024 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की 21% सेमीकंडक्टर चिप फैक्ट्रियां चीन में हैं, और 2030 तक यह हिस्सा बढ़कर 30% हो सकता है. हालांकि, वैश्विक मांग में चीन की हिस्सेदारी केवल 5% है, यानी चीन अपनी जरूरत से कई गुना ज्यादा उत्पादन कर वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भरता बढ़ा रहा है. इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है.
उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योग मिलकर ‘मेक इन इंडिया’ चिप्स पर ध्यान दे रहे हैं. यह न केवल आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम है, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करता है. मरांडी ने जोर देकर कहा कि सेमीकंडक्टर चिप से लेकर खादी तक, भारत में बनी हर चीज देश को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में अहम है.
‘सबके साथ से सबका विकास’
बाबूलाल मरांडी ने अपील की कि स्वदेशी अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार और जनता दोनों को मिलकर योगदान देना होगा. उन्होंने कहा कि ‘सबके साथ से ही सबका विकास’ संभव है. यह अभियान न केवल भारत की आर्थिक ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक मंच पर देश की स्थिति को भी मजबूत करेगा.