सरहुल पर घाघरा में सांस्कृतिक उत्सव, ढोल-नगाड़ों के बीच बच्चों की झांकी और पारंपरिक नृत्य ने जीता दिल
Ghaghra Sarhul: सरहुल का पर्व इस वर्ष घाघरा में बड़े ही उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया. प्रकृति और आदिवासी संस्कृति से जुड़ा यह महत्वपूर्ण त्योहार गांव और आसपास के क्षेत्रों में खास आकर्षण का केंद्र बना रहा.
सुबह से ही लोग पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर एकत्र हुए. गांव के सरना स्थल पर पूजा-अर्चना की गई, जहां प्रकृति देवता और सखुआ (सल) वृक्ष की पूजा कर अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और बारिश की कामना की गई.
इस दौरान बच्चों द्वारा निकाली गई आकर्षक झांकी ने सभी का मन मोह लिया. झांकी में आदिवासी जीवन, परंपराएं और प्रकृति संरक्षण के संदेश को खूबसूरती से दर्शाया गया। छोटे-छोटे बच्चों ने रंग-बिरंगे परिधान पहनकर नृत्य और गीत प्रस्तुत किए, जिससे माहौल और भी जीवंत हो उठा.
महिलाओं और युवाओं ने पारंपरिक नृत्य—जैसे झूमर और नागपुरी—करके उत्सव में चार चांद लगा दिए. ढोल-नगाड़ों की थाप पर पूरा क्षेत्र गूंज उठा और लोग देर शाम तक जश्न में डूबे रहे.
सरहुल का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी संदेश देता है.