251 नागाड़ों की धुन से पूरा माहौल एक पुरानी सभ्यता और संस्कृति को किया स्थापित, इस बार का आयोजन रहा बेहद ख़ास

Jharkhand Desk: आयोजन का लक्ष्य एक मंच पर देश के 50% आदिवासी प्रतिनिधि को शामिल करना है. पिछले 11 वर्षो में देश भर के 333 जनजातियों के 43500 से अधिक लोगों को जोड़ते हुए आदिवासी पहचान को एक नये रूप मे विकसित किया गया है. आयोजन में देश के अलग अलग प्रांत से आये आदिवासियों द्वारा स्टाल लगाया गया है, जहां खाने पीने के सामान के अलावा...
 

Jharkhand Desk: टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा बिष्टुपुर क्षेत्र में स्थित गोपाल मैदान में 12वां संवाद कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया. टाटा स्टील फाउंडेशन भगवान बिरसा मुंडा की जयंती एवं झारखंड राज्य स्थापना दिवस पर पिछले 11 वर्षो से यह आयोजन करता आ रहा है.

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर इस बार का आयोजन कुछ खास रहा. कॉन्क्लेव के उद्घाटन समारोह में टाटा स्टील के एमडी के अलावा टाटा स्टील के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे. आदिवासी समाज की पारंपरिक ढोल नगाड़ा और वाध्य यंत्र की धुन पर आयोजन की शुरुआत हुई. गोपाल मैदान 251 नागाड़ों की धुन से पूरा माहौल एक पुरानी सभ्यता और संस्कृति को स्थापित कर रहा था. वहीं मंच पर मुंडा संथाल भाषा में गीत प्रस्तुत किये गए. पारंपरिक परिधान में महिला-पुरुष आयोजन को सफल बना रहे थे.

आपको बता दें कि जमशेदपुर में जनजातीय संस्कृति का यह सबसे प्रमुख कार्यक्रम होता है. इस कॉन्क्लेव में 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के 153 जनजातियों के 25 सौ प्रतिभागी शामिल हुए.

आयोजन का लक्ष्य एक मंच पर देश के 50% आदिवासी प्रतिनिधि को शामिल करना है. पिछले 11 वर्षो में देश भर के 333 जनजातियों के 43500 से अधिक लोगों को जोड़ते हुए आदिवासी पहचान को एक नये रूप मे विकसित किया गया है. आयोजन में देश के अलग अलग प्रांत से आये आदिवासियों द्वारा स्टाल लगाया गया है, जहां खाने पीने के सामान के अलावा पुरानी चिकित्सा पद्धति और अन्य चीजों को बताने का काम किया गया.

आयोजन में टाटा स्टील के एमडी और अन्य पदाधिकारियों ने भगवान बिरसा मुंडा की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. मौके पर टाटा स्टील के एमडी टी. वी. नरेंद्र ने कहा कि पिछले 11 वर्षो से आयोजित इस कार्यक्रम का आकार बढ़ने लगा है, जो एक अच्छा अनुभव है. आदिवासी समाज के अलग-अलग जाति जनजाति से जुड़ी बातों को समझने का मौका मिलता है. आने वाले वर्षों मे इसका स्वरूप और भी बड़ा होगा.

एमडी ने बताया कि स्टील बाजार चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है. लेकिन भारत के लिए अच्छी बात यह है कि यहां आयरन ओर है और स्टील निर्माण के साथ बाजार भी है. वहीं झारखंड पर उन्होंने कहा कि 25 साल के झारखंड में अभी बहुत कुछ करना है और नई इंडस्ट्रीज को लाना होगा.