धमकी से शुरू होती है कहानी, फायरिंग पर पहुंचती है! जानिए, हाफ एनकाउंटर तक की पूरी पटकथा...
Ranchi: झारखंड में संगठित अपराध का तरीका तेजी से बदलता नजर आ रहा है। कारोबारियों को धमकी देकर रंगदारी मांगने से शुरू होने वाला मामला कई बार फायरिंग और पुलिस मुठभेड़ तक पहुंच रहा है। पुलिस अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चला रही है। इस दौरान कई आरोपी गोली लगने से घायल हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य में रंगदारी और गोलीबारी की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है।
राज्य में अपराध की इस बदलती तस्वीर ने पुलिस के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सवाल यह है कि जब लगातार गिरफ्तारियां हो रही हैं और मुठभेड़ों में अपराधी घायल हो रहे हैं, तो फिर संगठित गिरोहों का नेटवर्क कमजोर क्यों नहीं पड़ रहा?
राहुल सिंह, राहुल दुबे और प्रिंस खान गैंग पुलिस के लिए चुनौती
झारखंड में राहुल सिंह, राहुल दुबे और प्रिंस खान जैसे गैंगस्टरों के गिरोह पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं। इन गिरोहों के सदस्यों पर कारोबारियों को धमकी देने, रंगदारी मांगने, सुपारी लेकर हत्या करने और फायरिंग जैसी घटनाओं में शामिल होने के आरोप हैं।
पुलिस लगातार इन गिरोहों के शूटरों और गुर्गों की तलाश में छापेमारी कर रही है। गिरफ्तारी और हथियार बरामदगी के दौरान कई जगहों पर पुलिस और आरोपियों के बीच मुठभेड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 11 जनवरी 2025 से 30 अक्टूबर 2026 के बीच झारखंड के अलग-अलग जिलों में करीब 40 पुलिस मुठभेड़ हुईं। इनमें तीन अपराधियों की मौत हुई, जबकि 33 से अधिक घायल हुए। ज्यादातर मुठभेड़ रंगदारी, गैंगवार, हत्या और संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़े मामलों में कार्रवाई के दौरान हुईं।
राजधानी रांची में लगातार सामने आ रहीं मुठभेड़ की घटनाएं
राजधानी रांची में हाल के दिनों में पुलिस और अपराधियों के बीच टकराव की घटनाएं चर्चा में हैं। 30 अक्टूबर को धुर्वा थाना क्षेत्र के सीठियो में राहुल दुबे गिरोह के सदस्यों के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई। इस दौरान सौरव कुमार के पैर में गोली लगी। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। मौके से तीन पिस्टल, एक स्विफ्ट कार और एक पल्सर बाइक बरामद की गई।
इससे दो दिन पहले भी राहुल सिंह गिरोह के सदस्यों के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई थी। इसमें शाहिद नाम का आरोपी घायल हुआ था। लगातार हो रही इन घटनाओं से राजधानी में सक्रिय गिरोहों और उनके शूटरों की गतिविधियां एक बार फिर चर्चा में हैं।
धनबाद में प्रिंस खान गैंग के शूटरों से कई बार भिड़ी पुलिस
धनबाद में रंगदारी और गैंगवार का नेटवर्क पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। 14 अक्टूबर 2025 से 14 अक्टूबर 2026 के बीच जिले में आठ मुठभेड़ दर्ज की गईं। इस दौरान प्रिंस खान गिरोह से जुड़े कथित शूटरों के साथ पुलिस की कई बार सीधी भिड़ंत हुई।
पुलिस कार्रवाई के दौरान इरफान आलम, नन्हे अंसारी, सागर सिंह उर्फ शिबू और सुधीश ओझा जैसे नाम सामने आए। वहीं, राम प्रताप हत्याकांड के आरोपी शंकर डे उर्फ पिंकू डे को भी मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया।
जमशेदपुर, हजारीबाग और रामगढ़ में भी पुलिस का अभियान
जमशेदपुर में भी हत्या और गोलीबारी की घटनाओं में शामिल आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज की। वर्ष 2026 में यहां चार मुठभेड़ हुईं। मरीन ड्राइव स्थित बिंदल मॉल के उडिपी रेस्टोरेंट में फायरिंग के आरोपियों मोहन यादव और अजीत मंडल को हथियार बरामदगी के लिए ले जाने के दौरान पुलिस से मुठभेड़ हुई। इस दौरान दोनों घायल हो गए।
हजारीबाग और रामगढ़ में भी राहुल दुबे तथा प्रिंस खान गिरोह से जुड़े कथित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। गिद्दी, बड़कागांव और भुरकुंडा क्षेत्र में हुई मुठभेड़ों में कई आरोपी घायल हुए। रामगढ़ के कुज्जू में 11 जनवरी 2025 को संतोष सिंह हत्याकांड के आरोपी राहुल तुरी की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी।
पलामू और जामताड़ा में भी हुईं जानलेवा मुठभेड़
पलामू में गैंगस्टर अमन साहू की पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी। वहीं, समीर खलीफा हत्याकांड के आरोपी फैज खान और सुमित चंद्रवंशी पुलिस कार्रवाई में घायल हुए।
जामताड़ा में तीन अगस्त 2026 को गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की मुठभेड़ में मौत हुई। इसके अलावा अगस्त में चतरा के बसरिया जंगल में राहुल दुबे गिरोह के सदस्यों के साथ हुई मुठभेड़ में कथित शूटर विकास कुमार घायल हुआ था।
गिरफ्तारियां हो रहीं, फिर भी क्यों नहीं टूट रहा गैंग का नेटवर्क?
लगातार पुलिस कार्रवाई के बावजूद रंगदारी और फायरिंग की घटनाओं का पूरी तरह नहीं रुकना कई सवाल खड़े करता है। इसकी एक बड़ी वजह संगठित गिरोहों का नेटवर्क माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि गिरोहों के सरगना राज्य या देश से बाहर रहकर भी अपने स्थानीय गुर्गों के जरिए गतिविधियां संचालित करते हैं।
स्थानीय स्तर पर नए लड़कों को गिरोह से जोड़ना, शूटर तैयार करना, हथियारों की व्यवस्था करना और कारोबारियों को धमकाकर रंगदारी वसूलना इस नेटवर्क का हिस्सा बनता जा रहा है।
पुलिस के सामने अब सरगनाओं तक पहुंचने की चुनौती
पुलिस के लिए चुनौती सिर्फ फायरिंग करने वाले शूटरों को पकड़ने तक सीमित नहीं है। गिरोहों को आर्थिक मदद देने वाले लोगों, हथियारों की सप्लाई करने वालों, नए सदस्यों की भर्ती कराने वालों और बाहर बैठकर वारदात की योजना बनाने वाले सरगनाओं तक पहुंचना भी जरूरी है।
करीब 40 मुठभेड़ों के आंकड़े पुलिस की कार्रवाई का दायरा जरूर दिखाते हैं, लेकिन संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण का असली पैमाना रंगदारी, धमकी और गोलीबारी की घटनाओं में कमी आना होगा। अब देखना होगा कि पुलिस की कार्रवाई गैंगस्टरों के नेटवर्क को कितना कमजोर कर पाती है।