पलामू–गढ़वा में सोलर पावर प्लांट का इंतज़ार लंबा, जमीन नहीं मिलने से सालों से अटका प्रोजेक्ट

Palamu: केंद्र सरकार के द्वारा पूर्व से घोषित योजना के लिए जमीन को लेकर पलामू सांसद विष्णुदयाल राम ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से कई बार पत्राचार भी किया. लेकिन जिला प्रशासन के द्वारा कोई भी पहल नहीं की जा रही है ना ही जमीन संबंधी समस्या का हल हो पाया है.
 

Palamu: पलामू-गढ़वा (झारखंड) में प्रस्तावित सोलर पार्क/पावर प्लांट अभी तक नहीं बन पाया है क्योंकि आवश्यक जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई है. केंद्र सरकार ने पहले इस क्षेत्र में सोलर पार्क के लिए 100 एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई थी, लेकिन आज तक वह जमीन अधिग्रहण/हस्तांतरित नहीं हुई. इसी कारण से यह प्रोजेक्ट लटक गया है. नतीजतन, पावर प्लांट जैसे बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं हो सका.

अब केंद्र सरकार ने पलामू एवं गढ़वा के इलाके में 20-20 मेगावाट की सोलर प्लांट लगाने की योजना तैयार की है. इस संबंध में प्रस्ताव भी पारित है और दोनों इलाके में 100-100 एकड़ जमीन भी तलाश की जा रही है. साल 2021 में पलामू और गढ़वा में सोलर प्लांट लगाने की योजना तैयार की गई थी और प्रस्ताव लाया गया था. उसके बाद से दोनों जिलों में जमीन की तलाश शुरू हुई है लेकिन अभी तक यह तलाश खत्म नहीं हुई है. हालांकि गढ़वा के कांडी के इलाके में पावर प्लांट के लिए जमीन भी देखा गया है.

झारखंड नवीनीकरण ऊर्जा विकास निगम के द्वारा ताजा मामले में 9 मेगावाट की अलग से पावर प्लांट लगाने की योजना तैयार की गई है और इसके लिए टेंडर भी जारी किया गया है. करीब 93 करोड़ की लागत से यह पावर प्लांट तैयार होगा और 25 वर्षों के लिए होगी. पलामू के हुसैनाबाद में इस सोलर पावर प्लांट लगाने की योजना है.

केंद्र सरकार के द्वारा पूर्व से घोषित योजना के लिए जमीन को लेकर पलामू सांसद विष्णुदयाल राम ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से कई बार पत्राचार भी किया. लेकिन जिला प्रशासन के द्वारा कोई भी पहल नहीं की जा रही है ना ही जमीन संबंधी समस्या का हल हो पाया है. सोलर पावर प्लांट का मामला कई बार सार्वजनिक स्तर पर भी उठा है. सोलर पावर प्लांट लग जाने से बिजली के क्षेत्र में पलामू एवं गढ़वा का इलाका आत्मनिर्भर हो सकता है.

फिलहाल दोनों जिलों में उत्तर प्रदेश के रिहंद के अलावा दूसरी जगह से बिजली की सप्लाई होती है. पलामू के सांसद विष्णुदयाल राम ने कहा कि सोलर पावर प्लांट प्रस्तावित है लेकिन जमीन नहीं मिलने के कारण इसका निर्माण नहीं हो रहा है. इनको लेकर राज्य की सरकार उदासीन रवैया अपना रही है. पावर प्लांट बन जाने से यह इलाका बिजली के मामले में आत्मनिर्भर हो सकता है और दूसरे इलाके में भी बिजली भेजी जा सकती है.